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बिन मां-बाप के 13 साल की उम्र में प्रभजोत ने शुरू किया एक मिशन, आज हजारों युवाओं को मुफ्त में सिखा रहे AI और डिजिटल स्किल्स

प्रभजोत ने हमारी टीम से बातचीत करते बताया के लॉकडाउन के दौरान उन्हें महसूस हुआ कि हजारों विद्यार्थी केवल संसाधनों की कमी के कारण आनलाइन शिक्षा से वंचित रह गए. अधिकांश प्लेटफॉर्म महंगे थे और ग्रामीण परिवार उनके लिए फीस वहन नहीं कर सकते थे.

18 year old Transforming Education in India
gnttv.com
  • फरीदकोट,
  • 06 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 4:32 PM IST
  • 13 साल की उम्र में शुरू की सीखने की यात्रा
  • मुफ्त में सिखा रहे AI और डिजिटल स्किल्स

कोविड-19 लॉकडाउन ने जहां करोड़ों बच्चों की पढ़ाई प्रभावित की, वहीं पंजाब के फरीदकोट जिले के कोटकपूरा निवासी प्रभजोत सिंह ने उसी दौर को अपनी जिंदगी का टर्निंग प्वाइंट बना लिया. महज 13 साल की उम्र में सीमित संसाधनों के बीच ऑनलाइन सीखना शुरू करने वाले प्रभजोत आज 'ब्रिलियंट पी' नामक निश्शुल्क शिक्षा पहल के संस्थापक हैं. उनके इस प्लेटफॉर्म के जरिए देश-विदेश के हजारों विद्यार्थी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), प्रोग्रामिंग, ग्राफिक डिजाइनिंग, वीडियो एडिटिंग, वेबसाइट डेवलपमेंट और अन्य रोजगारोन्मुखी डिजिटल स्किल्स मुफ्त में सीख रहे हैं.

माता-पिता के निधन के बाद मौसा-मौसी ने संभाली जिम्मेदारी
वर्तमान में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में बीटेक की पढ़ाई कर रहे प्रभजोत सिंह का जीवन संघर्ष और संकल्प की मिसाल है. बचपन में ही माता-पिता का निधन हो गया था, जिसके बाद उनका पालन-पोषण उनके मौसा-मौसी ने किया. उनकी मौसी सतविंदर कौर बताती हैं कि प्रभजोत जब करीब पांच साल के थे, तभी बीमारी के कारण उनके माता-पिता का निधन हो गया. बचपन से ही उनमें नई चीजें सीखने और दूसरों को सिखाने का उत्साह था. उन्होंने कहा कि परिवार ने उन्हें अच्छी शिक्षा देने का प्रयास किया और आज उन्हें इस बात पर गर्व है कि प्रभजोत खुद शिक्षित होने के साथ-साथ दूसरों को भी शिक्षा दे रहे हैं.

मोबाइल और लैपटॉप मिलने के बाद बदली सोच
कोविड काल में प्रभजोत के पास अपना मोबाइल फोन या लैपटॉप तक नहीं था. इसके बावजूद उन्होंने सीखना नहीं छोड़ा. सुकीरत ट्रस्ट और एजुकेट पंजाब प्रोजेक्ट के सहयोग से उन्हें पहले मोबाइल और बाद में लैपटॉप मिला. इसी दौरान उन्होंने तय किया कि जो अवसर उन्हें मिला है, वह आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों तक भी मुफ्त में पहुंचाएंगे.

2020 में शुरू हुआ 'ब्रिलियंट पी', आज बना शिक्षा का बड़ा समुदाय
प्रभजोत ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान उन्होंने महसूस किया कि संसाधनों की कमी के कारण हजारों विद्यार्थी ऑनलाइन शिक्षा से वंचित रह गए. अधिकांश प्लेटफॉर्म महंगे थे, जिनकी फीस ग्रामीण और जरूरतमंद परिवार नहीं चुका सकते थे. इसी सोच के साथ वर्ष 2020 में ब्रिलियंट पी की शुरुआत हुई.

आज यह प्लेटफॉर्म केवल ऑनलाइन लर्निंग तक सीमित नहीं है, बल्कि वालंटियरों और विद्यार्थियों का सक्रिय शिक्षा समुदाय बन चुका है. यहां पायथन, जावा, AI, ग्राफिक डिजाइनिंग, वीडियो एडिटिंग, गूगल वर्कस्पेस और फ्रेंच समेत कई विषयों के निश्शुल्क कोर्स संचालित किए जाते हैं. विद्यार्थियों को लाइव मेंटरशिप, प्रोजेक्ट आधारित प्रशिक्षण, प्रतियोगिताएं, इंटर्नशिप और करियर मार्गदर्शन भी दिया जाता है. इस पूरी पहल में सभी मेंटर्स और टीम सदस्य वालंटियर के रूप में काम करते हैं और किसी भी प्रकार की फीस नहीं ली जाती.

1000 से ज्यादा युवाओं को मिला प्रशिक्षण
प्रभजोत के अनुसार, उनका उद्देश्य सिर्फ पढ़ाना नहीं, बल्कि युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना है. उन्होंने बताया कि अब तक 1000 से अधिक युवा उनके प्लेटफॉर्म से प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं. इनमें से कई ने फ्रीलांसिंग शुरू की, कुछ ने अपने स्टार्टअप स्थापित किए, जबकि कई विद्यार्थियों को रोजगार के अवसर भी मिले. कई युवा डिजाइनिंग के क्षेत्र में अपना काम शुरू कर चुके हैं.

भविष्य की योजनाओं पर बात करते हुए प्रभजोत ने बताया कि ब्रिलियंट पी के लिए ऑफलाइन लर्निंग सुविधा वाली मोबाइल ऐप, क्षेत्रीय भाषाओं में शैक्षणिक सामग्री, अनुभवी मेंटर्स का बड़ा नेटवर्क और ग्रामीण व वंचित समुदायों तक शिक्षा पहुंचाने की दिशा में काम किया जा रहा है. उनका मानना है कि तकनीक तभी सार्थक है, जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे.

-प्रेम पासी की रिपोर्ट

 

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