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Muzaffarpur News: 1 कमरे में 5 क्लास... टीन शेड के नीचे पढ़ने को मजबूर बच्चे, ऐसे कैसे होगा शिक्षा का उजियारा?

बिहार में सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के दावे लगातार किए जा रहे हैं लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल अलग नजर आती है. मुजफ्फरपुर के भवन विहीन मध्य विद्यालय नई तालीम में पहली से आठवीं तक की पढ़ाई महज दो कमरों और एक जर्जर टीन शेड के सहारे चल रही है. 1 कमरे में 5 क्लास बच्चे पढ़ाई करने को मजबूर हैं. 

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मध्य विद्यालय नई तालीम मध्य विद्यालय नई तालीम

बिहार में सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के दावे लगातार किए जा रहे हैं लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल अलग नजर आती है. मुजफ्फरपुर के भवन विहीन मध्य विद्यालय नई तालीम में पहली से आठवीं तक की पढ़ाई महज दो कमरों और एक जर्जर टीन शेड के सहारे चल रही है. हालात ऐसे हैं कि एक ही कमरे में पांच अलग-अलग कक्षाएं एक साथ संचालित होती हैं, जबकि छठी, सातवीं और आठवीं की पढ़ाई टूटे टीन शेड के नीचे होती है.

बारिश हो तो बच्चे भीगते हैं, गर्मी हो तो तेज धूप झेलते हैं
इस स्कूल में कुल 228 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं और पढ़ाने के लिए प्रधानाध्यापक समेत आठ शिक्षक हैं लेकिन पूरे विद्यालय में सिर्फ दो कमरे उपलब्ध हैं. मजबूरी में एक कमरे में पहली से पांचवीं तक की संयुक्त कक्षाएं चलती हैं, जबकि छठी, सातवीं और आठवीं की पढ़ाई बरामदे के टूटे हुए टीन शेड के नीचे होती है. विद्यालय के प्रधानाध्यापक राजीव रंजन ने बताया कि हमारे विद्यालय में संसाधनों की काफी कमी है. विद्यालय में मात्र दो कमरे हैं. एक कमरे में कई संयुक्त कक्षाएं संचालित होती हैं, जबकि बाकी कक्षाएं बरामदे में चलती हैं.

विद्यालय टीन शेड के सहारे संचालित हो रहा है. बारिश और तेज धूप में काफी परेशानी होती है. बारिश के समय बच्चे भीग जाते हैं. गर्मी में वे तेज धूप झेलते हैं. तेज हवा चलने पर ब्लैकबोर्ड तक गिर जाता है. विद्यालय में बेंच-डेस्क भी नहीं हैं. बच्चे जमीन पर दरी बिछाकर बैठकर पढ़ाई करते हैं. ऐसी स्थिति में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना तो दूर की बात है, बच्चों को संभालना भी बहुत मुश्किल हो जाता है. भवन निर्माण को लेकर विभाग को भी सूचना दी गई है और जिस ट्रस्ट की जमीन पर विद्यालय संचालित हो रहा है, उन्हें भी कई बार लिखित आवेदन दिया गया है. लेकिन अभी तक भवन का निर्माण नहीं हो सका है. 

बारिश में किसी तरह बचाते हैं कॉपी-किताब 
कक्षा सात के छात्र मोनू कुमार ने बताया कि हमारी पढ़ाई टीन शेड के नीचे होती है. इसके अलावा एक साथ कई कक्षाओं के बच्चे पढ़ते हैं, जिससे पढ़ाई करने में काफी परेशानी होती है. शिक्षक जब पढ़ाते हैं तो उनकी आवाज भी ठीक से सुनाई नहीं देती, क्योंकि बगल में भी दूसरी कक्षाएं चलती रहती हैं. इससे लगातार शोर-शराबा होता रहता है. बारिश के समय हम लोग भीग जाते हैं और किसी तरह दीवार के पास खड़े होकर अपनी कॉपी-किताब बचाते हैं. कक्षा आठ के छात्र विकास कुमार ने बताया कि विद्यालय में न तो पर्याप्त भवन है और जो टीन शेड है, वह भी कई जगह से टूटा हुआ है. बारिश होने पर उसमें से पानी टपकने लगता है. हम लोग बरामदे में पढ़ते हैं, जहां बारिश का पानी और तेज हवा से काफी परेशानी होती है. कई बार हमारी कॉपी-किताब भी भीग जाती है, जिसे किसी तरह बचाना पड़ता है. गर्मी के मौसम में टीन शेड के नीचे तेज धूप और उमस के कारण पढ़ाई करना बेहद कठिन हो जाता है.

बच्चों को पढ़ाने में होती है दिक्कत
एक साथ पांच अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों को पढ़ा रही शिक्षिका बिंदा कुमारी ने बताया कि हम पहली कक्षा के बच्चों को पढ़ा रहे हैं. छोटे बच्चे हैं, इसलिए उन्हें संभालना और पढ़ाना काफी कठिन होता है. वहीं, बगल में दूसरी कक्षा के बच्चों को पढ़ा रही शिक्षिका रेणु कुमारी ने बताया कि दूसरी कक्षा के बच्चों को पढ़ाने में दिक्कत तो होती ही है, लेकिन जितनी व्यवस्था उपलब्ध है, उसी में पढ़ाना पड़ता है. इसी कमरे में चौथी कक्षा के छात्र विशाल ने बताया कि पढ़ाई में काफी कठिनाई होती है. दूसरे क्लास के बच्चों के शोर-शराबे की वजह से ठीक से पढ़ाई नहीं हो पाती. वहीं, पांचवीं कक्षा के बच्चों को पढ़ा रही शिक्षिका शमीमा बानो ने बताया कि आप खुद देख रहे हैं कि वर्ग संचालन में कितनी कठिनाई हो रही है. ऐसी व्यवस्था में बच्चों को बेहतर शिक्षा देना बहुत मुश्किल हो जाता है.