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स्कूल में धरने पर बैठा जेन अल्फा, तो कुछ ही घंटे में स्कूल में लगाए गए 7 शिक्षक, शिक्षा विभाग और छात्रों में नहीं बनी सहमति, फिर से धरने पर स्टूडेंट

जोधावास के सरकारी स्कूल में बरामदे का पटाव गिरने के बाद ग्रामीणों ने इसकी सूचना प्रशासन को दी. इसके बाद बड़ी संख्या में लोग स्कूल परिसर में पहुंचे. छात्रों ने स्कूल की जर्जर स्थिति और लंबे समय से चली आ रही समस्याओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया.

Gen Alpha Students Stage Protest
हिमांशु शर्मा
  • अलवर,
  • 14 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 10:40 AM IST

राजस्थान के अलवर जिले में स्कूल की बदहाल व्यवस्थाओं के खिलाफ अब छात्र सड़क पर उतर आए हैं. थानागाजी के पास जोधावास गांव के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में बरामदे का पटाव अचानक भरभरा कर गिर गया. गनीमत रही कि हादसे के वक्त वहां कोई छात्र या शिक्षक मौजूद नहीं था. घटना के बाद स्कूल की दूसरी समस्याओं को लेकर छात्र धरने पर बैठ गए. शिक्षा विभाग की टीम मौके पर पहुंची और 7 नए शिक्षकों की नियुक्ति कर दी, लेकिन भवन और दूसरी सुविधाओं की मांग को लेकर छात्र-ग्रामीण संतुष्ट नहीं हुए.

पटाव गिरने के बाद खुली स्कूल की बदहाली
जोधावास के सरकारी स्कूल में बरामदे का पटाव गिरने के बाद ग्रामीणों ने इसकी सूचना प्रशासन को दी. इसके बाद बड़ी संख्या में लोग स्कूल परिसर में पहुंचे. छात्रों ने स्कूल की जर्जर स्थिति और लंबे समय से चली आ रही समस्याओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. छात्रों का कहना है कि स्कूल में सिर्फ दो कमरे हैं और बारिश के दौरान दोनों कमरों की छत से पानी टपकता है. ऐसे में बरसात के दिनों में बच्चों को पेड़ों के नीचे या दूसरी जगहों पर खड़े होकर समय बिताना पड़ता है.

5 शिक्षक थे, 7 और नियुक्त किए गए
प्रदर्शन की जानकारी मिलते ही शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल स्कूल पहुंचा. अधिकारियों ने छात्रों और ग्रामीणों से बातचीत की. स्कूल में पहले सिर्फ 5 शिक्षक थे. इसके बाद विभाग ने आनन-फानन में 7 नए शिक्षकों की नियुक्ति कर दी. अब स्कूल में कुल 13 शिक्षक हो गए हैं. हालांकि छात्रों की मुख्य मांग सिर्फ शिक्षकों की संख्या बढ़ाना नहीं है. वे स्कूल के लिए सुरक्षित भवन और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं.

दो शिफ्ट में स्कूल चलाने का प्रस्ताव भी नहीं माना
स्कूल में भवन की कमी को देखते हुए शिक्षा विभाग की ओर से स्कूल को दो शिफ्ट में चलाने का प्रस्ताव दिया गया. अधिकारियों का कहना था कि स्कूल में फिलहाल दो कमरे ही ठीक हालत में हैं, इसलिए शिफ्ट के हिसाब से कक्षाएं संचालित की जा सकती हैं. लेकिन छात्रों और ग्रामीणों ने इस प्रस्ताव पर सहमति नहीं जताई. उनका कहना है कि समस्या का स्थायी समाधान नया और सुरक्षित स्कूल भवन है. मांगों पर सहमति नहीं बनने के बाद शिक्षा विभाग की टीम वापस लौट गई.

न खेल मैदान, न पीने के पानी और शौचालय की पर्याप्त सुविधा
छात्रों ने स्कूल में दूसरी बुनियादी सुविधाओं की कमी की भी शिकायत की है. स्कूल में खेल का मैदान नहीं है. पीने के पानी और शौचालय की व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं है. छात्राओं को शौचालय के लिए खुले में जाने की मजबूरी बताई गई है. स्कूल को उच्च माध्यमिक स्तर पर प्रमोट किया जा चुका है, लेकिन छात्रों को पढ़ाने के लिए अभी भी थर्ड ग्रेड के शिक्षक ही मौजूद थे. अब नए शिक्षकों की नियुक्ति के बाद शिक्षकों की संख्या बढ़ गई है.

स्कूल को इस साल ही कंडम घोषित किया गया
जिला शिक्षा अधिकारी मनोज शर्मा ने बताया कि स्कूल भवन को इसी साल कंडम घोषित किया गया था. भवन की स्थिति खराब होने की रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है. उन्होंने कहा कि नए भवन के लिए जगह चिन्हित करने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है.

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