आज के दौर में बच्चों को पढ़ाई करने के लिए मनाना माता-पिता के लिए आसान काम नहीं रह गया है. खासकर छोटे बच्चों के साथ पढ़ाई के दौरान पेसेंश और समझदारी बेहद जरूरी होती है, क्योंकि वे अपनी इमोशन्स को ठीक से समझा पाते. कई बार बच्चा पढ़ाई के नाम पर चिड़चिड़ा हो जाता है या पढ़ने से बचने लगता है. ऐसे में इसे सिर्फ उसका आलस समझना सही नहीं है, बल्कि इसके पीछे छिपे कारणों को समझना जरूरी है.
जब बच्चा पढ़ाई करते समय गुस्सा करने लगे, बहाने बनाए या जल्दी थक जाए, तो यह इशारा हो सकता है कि वह प्रेशर महसूस कर रहा है. अक्सर माता-पिता की ज्यादा उम्मीदें, बार-बार तुलना करना या छोटी गलतियों पर डांटना बच्चे के मन पर असर डालता है. इसके अलावा बिना ब्रेक के लंबे समय तक पढ़ाई भी बच्चे को मानसिक रूप से थका देती है. ऐसे में बच्चा पढ़ाई से दूर भागने नहीं, बल्कि उससे डरने लगता है.
बच्चे की इमोशन्स को समझना है जरूरी
इस स्थिति में सबसे जरूरी है कि माता-पिता बच्चे के साथ समय बिताएं और उससे खुलकर बात करें. बच्चे से यह जानने की कोशिश करें कि उसे किस बात से परेशानी हो रही है. जब आप उसकी बात बिना डांटे और ध्यान से सुनेंगे, तो वह खुद को सेफ महसूस करेगा. इससे उसका कॉन्फिडेंस बढ़ेगा और पढ़ाई को लेकर उसका डर भी कम होगा.
सख्ती नहीं की जगह प्यार से सिखाएं
बच्चों के साथ पढ़ाई करते समय सख्ती दिखाने के बजाय प्यार और पेशेंस से काम लेना ज्यादा असरदार होता है. ज्यादा डांट या दबाव बच्चे को मेंटली कमजोर बना सकता है. अगर आप उसे समझाकर पढ़ाएंगे, तो वह पढ़ाई को बोझ नहीं बल्कि एक मजेदार एक्टिटी के रूप में देखेगा.
लाइफस्टाइल में छोटे बदलाव से मिलेगा बड़ा फायदा
बच्चे के रूटीन में थोड़े बदलाव करके भी उसकी पढ़ाई में रुचि बढ़ाई जा सकती है. रोज सुबह उसे बादाम और अखरोट जैसे न्यूट्रिशयस चीज़ें देना फायदेमंद होता है, जिससे दिमाग तेज होता है. साथ ही, बच्चों को बाहर खेलने और नेचर से जुड़ने का मौका देना भी जरूरी है. फिजिकल एक्टिविटी बढ़ने से उनका मन फ्रेश रहता है और पढ़ाई में भी ध्यान लगता है.
पढ़ाई और खेल के बीच बैलेंस बनाए रखना बेहद जरूरी है. अगर बच्चा खुश और टेंशन फ्री रहेगा, तो वह खुद ही पढ़ाई में रुचि लेने लगेगा. इसलिए माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चे पर दबाव डालने के बजाय उसका साथ दें और उसे सही दिशा देने की जरूरत है.