मिशन एजुकेशन की अनोखी कहानी महाराष्ट्र के कोल्हापुर से सामने आई है. यहां एक सरकारी स्कूल में अब सिर्फ एक छात्रा पढ़ती है. इस बच्ची की पढ़ाई न रुके, इसके लिए 55 साल के शिक्षक जीवन मिठारी रोज करीब 5 किलोमीटर का जंगल का रास्ता पैदल तय करते हैं. रास्ते में जंगली जानवरों का खतरा रहता है, लेकिन शिक्षक अपने फर्ज से पीछे नहीं हटते. उनकी मेहनत देखकर छात्रा स्वरा बोडके भी आगे चलकर डॉक्टर बनने का सपना देख रही है.
1974 में शुरू हुआ था स्कूल
कोल्हापुर जिले की गगनबावडा तहसील के धनगरवाडा गांव में जिला परिषद प्राथमिक विद्या मंदिर स्कूल साल 1974 में शुरू हुआ था. कभी इस स्कूल में 50 से 70 बच्चे पढ़ते थे. साल 2001 से 2024 के बीच भी यहां 15 से 20 छात्र-छात्राएं पढ़ते रहे, लेकिन अब स्कूल में सिर्फ एक छात्रा स्वरा बोडके रह गई है. गांव में सुविधाओं की कमी और रोजगार के लिए कई परिवार शहरों की ओर चले गए. अब यहां सिर्फ 2-3 परिवार ही रहते हैं. इसके बावजूद स्कूल को बंद नहीं किया गया है, ताकि स्वरा की पढ़ाई जारी रह सके.
रोज 50 किमी फसर
स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षक जीवन मिठारी, कोल्हापुर से रोज करीब 50 किलोमीटर की यात्रा करके पहुंचते हैं. मोटर मार्ग से स्कूल करीब 2.5 किलोमीटर दूर है. इसके बाद उन्हें घने जंगल और पहाड़ी रास्ते से करीब 2.5 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है. आने-जाने में उनका रोज करीब 5 किलोमीटर पैदल सफर होता है.
रास्ते में जंगली जानवरों का खतरा
इस जंगल के रास्ते में गवे यानी बायसन और तेंदुए जैसे जंगली जानवर दिखाई दे सकते हैं. वन विभाग ने यहां ट्रैप कैमरे भी लगाए हैं. शिक्षक को सलाह दी गई है कि जंगल के रास्ते में कहीं रुकें या बैठें नहीं. जीवन मिठारी कहते हैं, 'मुझे भी डर लगता है, लेकिन अब आदत हो गई है.' रोज की यह पैदल यात्रा अब उनकी दिनचर्या और व्यायाम का हिस्सा बन चुकी है.
छोटी छात्रा का बड़ा सपना
गांव के सरपंच धुंदवडे के मुताबिक, स्कूल तक रास्ता, बिजली और दूसरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई है. पास का स्कूल धुंदवडे में है, लेकिन छोटे बच्चों के लिए रोज 11 किलोमीटर का जंगल वाला सफर करना मुश्किल है.
जीवन मिठारी पहले कोल्हापुर जिला प्राथमिक शिक्षक सहकारी बैंक के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. उन्होंने इस चुनौतीपूर्ण स्कूल में पढ़ाने की जिम्मेदारी स्वीकार की. मई 2029 में उनकी सेवानिवृत्ति होनी है. फिलहाल उनकी मेहनत से स्वरा की पढ़ाई जारी है और वह डॉक्टर बनने का सपना देख रही है.
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