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Supreme Court Decision: सुप्रीम कोर्ट ने दी बड़ी राहत! उत्तर प्रदेश के संविदा शिक्षकों का वेतन अब 7 हजार से 17000 रुपए होगा

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के संविदा शिक्षकों को बड़ी खुशखबरी दी है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि का वेतन अब 7 हजार रुपए से 17 हजार रुपए होगा. इन शिक्षकों को 2017 से अब तक के वेतन का अंतर का भुगतान भी राज्य सरकार को छह महीने में करना होगा.

Supreme Court
संजय शर्मा
  • नई दिल्ली,
  • 05 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:43 AM IST

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने उत्तर प्रदेश के संविदा शिक्षकों को बड़ी खुशखबरी दी है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यूपी के संविदा शिक्षकों का वेतन अब 7 हजार रुपए से 17 हजार रुपए होगा. इन शिक्षकों को 2017 से अब तक के वेतन का अंतर का भुगतान भी राज्य सरकार को छह महीने में करना होगा. यानी नौ साल के करीब सौ महीनों का बकाया भुगतान करना होगा. 10 हजार रुपए मासिक की दर से करीब सौ महीने का भुगतान. 

शिक्षकों के हक में सुनाया बड़ा निर्णय 
सुप्रीम कोर्ट ने संविदा शिक्षकों को बड़ी राहत देते हुए 17 हजार रुपए मासिक मानदेय देने का आदेश दिया है. अदालत ने 7 हजार रुपए पर लंबे समय तक काम कराने को बेगार यानी बंधुआ मजदूरी जैसा बताते हुए शिक्षकों के हक में बड़ा निर्णय सुनाया. जस्टिस पंकज मित्थल और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने अपने निर्णय में कहा कि एक दशक से भी अधिक समय से इन अनुबंधित शिक्षकों को मात्र 7 हजार रुपए वेतन दिया जा रहा है. यह सर्वथा अनुचित और बंधुआ मजदूरी या बेगार जैसा है. यह संविधान के अनुच्छेद 23 के तहत यह पूरी तरह से प्रतिबंधित है.

राज्य सरकार की अपील खारिज
कोर्ट ने राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए कहा कि संविदा शिक्षकों को वर्ष 2017-18 से 17 हजार रुपए मासिक मानदेय का अधिकार है. अदालत ने कहा कि 11 महीने के अनुबंध के नाम पर साल दर साल काम लेते रहना और वेतन न बढ़ाना गलत है. पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया कि राज्य सरकार 1 अप्रैल 2026 से 17 हजार रुपए प्रतिमाह के हिसाब से भुगतान शुरू करे. साथ ही बकाया राशि छह महीने के भीतर चुकाई जाए. 

...तो नहीं जाएगी नौकरी
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश केअंशकालिक शिक्षकों (अनुदेशकों) को खुशखबरी दी है.  वर्षों से नौकरी की स्थिरता की मांग कर रहे शिक्षकों के पक्ष में अदालत ने अहम फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उनकी सेवाएं समाप्त नहीं होंगी. कोर्ट ने साफ कर दिया है कि लंबी अवधि तक लगातार काम लेने के बाद उनकी नियुक्ति को सिर्फ संविदा नहीं माना जा सकता. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जो शिक्षक लगातार 10 साल से अधिक समय से काम कर रहे हैं, उन्हें व्यवहार में स्थायी माना जाएगा. आपको मालूम हो कि यह मामला पहले हाईकोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था. करीब दो साल की सुनवाई के बाद फैसला आया. शिक्षकों की ओर से वरिष्ठ वकीलों ने पक्ष रखा. अब इस निर्णय को अनुदेशकों के लंबे संघर्ष की सफलता के रूप में देखा जा रहा है.


 

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