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बिहार में राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस का डबल गेम, आरजेडी उम्मीदवार की हार, क्या होगा अंजाम?

बिहार में राज्यसभा चुनाव में आरजेडी उम्मीदवार की हार के बाद महागठबंधन में खलबली मची हुई है. वोटिंग से गैरहाजिर रहे कांग्रेस विधायकों का कहना है कि चुनाव से पहले ही राजद के उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह के चयन को लेकर कांग्रेस के अंदर एक राय नहीं थी. कांग्रेस के तीनों विधायकों ने RJD पर आरोप लगाया है कि तेजस्वी यादव ने सहयोगी दलों से बिना कोई बात किए महागठबंधन से अमरेंद्र धारी सिंह को उम्मीदवार बना दिया.

Mahagathbandhan
रोहित कुमार सिंह
  • पटना,
  • 18 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 12:46 PM IST

राज्यसभा चुनाव के बाद बिहार की सियासत में खलबली मची हुई है. राज्यसभा चुनाव में RJD की हार के बाद महागठबंधन के भीतर गहरे राजनीतिक मतभेद सतह पर आ गए हैं. कांग्रेस के तीन विधायकों की वोटिंग से गैरहाजिरी को अब महज असंतोष नहीं, बल्कि एक सुनियोजित राजनीतिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, जिसने चुनाव के नतीजे को निर्णायक रूप से प्रभावित किया.

अमरेंद्र धारी सिंह को लेकर कांग्रेस में एक राय नहीं-
राज्यसभा चुनाव को नतीजे आने के बाद अब आरजेडी को लेकर कांग्रेस विधायकों का गुस्सा सामने देखने को मिल रहा है. जिन तीन कांग्रेस विधायकों ने राज्यसभा चुनाव में वोटिंग से दूरी बनाई. उनका कहना है कि चुनाव से पहले ही राजद के उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह के चयन को लेकर कांग्रेस के अंदर एक राय नहीं थी.

कांग्रेस के तीनों विधायकों ने RJD पर आरोप लगाया है कि तेजस्वी यादव ने सहयोगी दलों से बिना कोई बात किए महागठबंधन से अमरेंद्र धारी सिंह को उम्मीदवार बना दिया. बताया जा रहा है कि यही असहमति मतदान के दिन 'रणनीतिक दूरी' के रूप में सामने आई, जब कांग्रेस के तीन विधायक वोटिंग से दूर रहे.

आरजेडी ने सलाह-मशविरा नहीं किया- कांग्रेस MLA
कांग्रेस विधायक मनोज शिमास ने खुलकर नाराजगी जताते हुए कहा कि RJD ने हमारे प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम से कोई सलाह-मशविरा नहीं किया. जब सहयोगी दलों को विश्वास में ही नहीं लिया जाएगा, तो इस तरह की स्थिति बनेगी. हमें अपने स्तर पर निर्णय लेने की छूट दी गई थी.

उन्होंने उम्मीदवार चयन पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस व्यक्ति को उम्मीदवार बनाया गया, उसका राजनीतिक आधार स्पष्ट नहीं था. ऐसे में मुझे लगा कि वोट न देना ही बेहतर विकल्प है.

कांग्रेस विधायक सुरेंद्र कुशवाहा ने भी अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि मैं NDA के साथ नहीं जा सकता, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आंख बंद करके हर फैसले का समर्थन किया जाए. जब उम्मीदवार चयन ही सवालों के घेरे में हो, तो मतदान से दूरी बनाना ही सही लगा.

कांग्रेस के एक अन्य विधायक मनोज बिस्वास ने भी पार्टी लाइन का हवाला देते हुए वोटिंग से दूरी बनाई. उन्होंने कहा कि हम प्रदेश नेतृत्व के निर्देशों का पालन करते हैं. जब हमें निर्णय लेने की छूट दी गई, तो हमने वही किया जो हमें राजनीतिक रूप से उचित लगा.

आरजेडी ने कांग्रेस से बात नहीं की थी- सूत्र
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस की नाराजगी सिर्फ उम्मीदवार तक सीमित नहीं थी. पार्टी इस बात से भी नाराज थी कि राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद या फिर तेजस्वी यादव ने राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के 6 विधायकों के समर्थन के लिए औपचारिक रूप से बिहार प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश राम या फिर बिहार कांग्रेस के प्रभारी कृष्ण अल्लावरु से कोई संपर्क नहीं किया और तेजस्वी डायरेक्ट कांग्रेस विधायकों से संपर्क बनाए हुए थे.

कांग्रेस का डबल गेम-
इसका नतीजा था कि वोटिंग के दिन कांग्रेस के तीन विधायकों सुरेंद्र कुशवाहा, मनोज बिस्वास और मनोहर प्रसाद सिंह की अनुपस्थिति ने विपक्ष के वोट गणित को सीधा नुकसान पहुंचाया. माना जा रहा है कि यदि ये वोट पड़ते, तो राज्यसभा चुनाव का नतीजा कुछ और हो सकता था.

हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस ने डबल गेम खेलते हुए राजद प्रत्याशी को हरा भी दिया और वोटिंग में हिस्सा नहीं लेने वाले और इनडायरेक्ट तरीके से एनडीए को मदद पहुंचाने वाले तीनों विधायकों पर कोई कार्रवाई भी नहीं करने के मूड में है.

गौरतलब है, राजद विधायक मोहम्मद फैसल रहमान ने भी राज्यसभा चुनाव में पार्टी के प्रत्याशी के लिए वोट करने नहीं पहुंचे थे और अपनी अनुपस्थिति को निजी कारण बताया कि मैं व्यक्तिगत कारणों से वोटिंग में शामिल नहीं हो सका. इसे राजनीतिक रूप से नहीं देखा जाना चाहिए. मेरी मां की तबीयत खराब थी और मैं दिल्ली में था उसे दिन.

माना जा रहा है कि कांग्रेस के तीनों विधायक भी यही दलील देंगे कि उन्होंने राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग नहीं किया है. जिसकी वजह से उन पर कोई कार्रवाई हो बल्कि निजी कारण से वह वोटिंग प्रक्रिया से दूर रहे. माना जा रहा है कि यह कांग्रेस की क्लासिक 'डबल पॉलिटिक्स' है. पार्टी ने आरजेडी से सीधे टकराव नहीं करते हुए आरजेडी का खेल भी बिगाड़ दिया और साथ ही वह यह भी नहीं चाहती कि मामला इतना बढ़े कि गठबंधन ही टूट जाए.

RJD खेमे में इस घटनाक्रम को लेकर नाराजगी साफ दिख रही है. पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि कांग्रेस ने जानबूझकर दूरी बनाकर चुनावी गणित बिगाड़ा. राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने महागठबंधन के भीतर मौजूद दरार को उजागर कर दिया है. फिलहाल, कांग्रेस का रुख साफ है- संदेश भी देना है और टकराव से भी बचना है. हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि तेजस्वी यादव इस पूरे घटनाक्रम पर क्या रुख अख्तियार करते हैं और क्या आने वाले दिनों में बिहार महागठबंधन में कांग्रेस को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है?

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