बिहार विधान परिषद की एक सीट गंवाने के बाद अब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) पूरी तरह एक्टिव हो गई है. बिहार विधान परिषद के 9 सदस्यों का कार्यकाल 28 जून को समाप्त हो रहा है. इन 9 सीटों में 4 सीट वर्तमान में जनता दल यूनाइटेड के पास हैं. 2 सीट भारतीय जनता पार्टी और 2 सीट राष्ट्रीय जनता दल के पास है. 1 सीट कांग्रेस के पास है. इन 9 सीटों के अलावा 1 सीट जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने से खाली हुई है. नीतीश कुमार वाली सीट पर उपचुनाव भी होना है. खाली हो रही विधान परिषद की 9 सीटों में भाजपा को 4 सीट, जदयू को 3 और लोजपा (रामविलास) को 1 सीट मिलने की संभावना है. एक सीट विपक्ष के खाते में तेजस्वी यादव की पार्टी आरजेडी के खाते में जा सकती है. आपको मालूम हो कि 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में विधान परिषद के एक सदस्य को चुनने के लिए 25 विधायकों के समर्थन की जरूरत होती है.
अभी बीजेपी में सिर्फ नामों पर हुई है चर्चा
4 विधानसभा सीटों के लिए गत सोमवार को बीजेपी की कोर कमेटी की बैठक में 70 नामों पर चर्चा की गई. प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित इस बैठक में प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी के साथ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी मौजूद रहे. हालांकि किसी भी नाम पर अंतिम सहमति नहीं बन सकी. भारतीय जनता पार्टी की परंपरा के मुताबिक 1 सीट के लिए 3-3 उम्मीदवारों के नाम केंद्रीय नेतृत्व को भेजे जाएंगे. अंतिम फैसला पार्टी आलाकमान के स्तर पर लिया जाएगा.
जदयू की एक सीट पर निशांत का नाम तय
यह विधान परिषद चुनाव बिहार सरकार के दो मंत्रियों स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार और पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है. दरअसल, दोनों नेताओं को हाल ही में बिहार सरकार में मंत्री बनाया गया था, लेकिन वे न तो बिहार विधानसभा के सदस्य हैं और न ही विधान परिषद के. ऐसे में संवैधानिक प्रावधानों के तहत उन्हें 6 महीने के भीतर दोनों सदनों में किसी एक का सदस्य बनना जरूरी है. जदयू से भीष्म सहनी, गुलाम गौस, कुमुद वर्मा, और श्रीभगवान सिंह कुशवाहा का कार्यकाल 28 जून को समाप्त हो रहा है. निशांत को लेकर चर्चा है कि वह नीतीश कुमार की खाली हुई सीट से विधान परिषद भेजे जाएंगे. इस सीट का कार्यकाल 2030 में खत्म होगा. जदयू की तीन सीटों में से एक पर तो नाम लगभग तय हो चुका है, बाकी दो सीटों पर मंथन जारी है. किसको और क्या मिलेगा यह जदयू का हाईकमान तय करेगा.
दीपक प्रकाश किसकी सीट से जाएंगे विधान परिषद
रालोमो (RLM) सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश किस पार्टी की सीट से विधान परिषद जाएंगे. इस पर भी मंथन किया जा रहा है. अब चुंकि रालोमो के खाते में एमएलसी की एक भी सीट नहीं है तो ऐसे में दीपक प्रकाश के जदयू की खाली सीट से ही जाने की संभावना है. यदि जदयू ने बीजेपी को अपनी शर्त बताई तो दीपक प्रकाश को बीजेपी भी अपनी एक सीट से एडजस्ट कर सकती है. ऐसे में बीजेपी और जदयू दोनों के पास ही तीन-तीन सीटें बच जाएंगी, जिसे बराबर का माना जाएगा.
तेजस्वी यादव किसे बनाएंगे अपनी पार्टी का उम्मीदवार
राजद से सुनील कुमार सिंह और मो. फारूक की विधान परिषद की सदस्यता समाप्त हो रही है. राजद को इस विधान परिषद चुनाव में एक सीट का नुकसान होगा. विधानसभा में सीटों की संख्या कम होने के कारण राजद के पास केवल एक ही सीट बचेगी. अब एक सीट पर तेजस्वी यादव किसे चुनाव लड़वाते हैं? यह उनके लिए चुनौती होगी. आपको मालूम हो कि बिहार विधानसभा चुनाव में एआईएमआईएम ने विधान परिषद की एक सीट मिलने की चाह में ही महागठबंधन को वोट दिया था. सुनील सिंह राबड़ी देवी के मुंहबोले भाई भी हैं. वह लालू परिवार के काफी करीबी भी हैं. अब देखना यह होगा कि तेजस्वी यादव राजद से किसी को भेजते हैं या एआईएमआईएम के साथ अपना वादा निभाते हैं. उधर, कांग्रेस के डॉ. समीर कुमार सिंह का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है. कांग्रेस में भी एक सीट को लेकर मंथन चल रहा है. आपको मालूम हो कि विधान परिषद की एक सीट के लिए उपचुनाव हो चुका है, जिसमें जेडीयू प्रत्याशी कन्हैया प्रसाद को मात देने में आरजेडी उम्मीदवार सोनू राय सफल रहे. भोजपुर-बक्सर की एमलसी सीट पर अब आरजेडी का कब्जा हो गया है.