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जानिए कौन हैं शाहजहांपुर सीट से दोबारा विधायक बने वीर विक्रम सिंह...मुलायम सिंह के खिलाफ पिता ने लड़ा था चुनाव

उत्तर प्रदेश में रूहेलखंड की शाहजहांपुर सीट से दोबारा बीजेपी के ट‍िकट पर जीतकर व‍िधायक बने वीर विक्रम सिंह प्रिंस प्रदेश की आगामी सरकार में मंत्री बन सकते हैं. प्रिंस को सियासत की तालीम विरासत में मिली है. प्रिंस के पिता वीरेंद्र प्रताप सिंह समाजवादी पार्टी के द‍िग्गज मुलायम सिंह यादव के खिलाफ चुनावी ताल ठोक चुके हैं. 1991 में मुख्यमंत्री रहते हुए मुलायम सिंह यादव जसवंतनगर और तिलहर दो सीटों से चुनाव लड़े थे.

Veer Vikram Singh
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 14 मार्च 2022,
  • अपडेटेड 5:06 PM IST
  • प्रिंस के नाम से भी जाने जाते हैं
  • विदेश में भी की पढ़ाई

उत्तर प्रदेश में रूहेलखंड की शाहजहांपुर सीट से दोबारा बीजेपी के ट‍िकट पर जीतकर व‍िधायक बने वीर विक्रम सिंह प्रिंस प्रदेश की आगामी सरकार में मंत्री बन सकते हैं. प्रिंस को सियासत की तालीम विरासत में मिली है. प्रिंस के पिता वीरेंद्र प्रताप सिंह समाजवादी पार्टी के द‍िग्गज मुलायम सिंह यादव के खिलाफ चुनावी ताल ठोक चुके हैं. 1991 में मुख्यमंत्री रहते हुए मुलायम सिंह यादव जसवंतनगर और तिलहर दो सीटों से चुनाव लड़े थे. तिलहर सीट पर कांग्रेस के प्रत्याशी वीरेंद्र प्रताप सिंह ने मुलायम स‍िंह को कांटे की टक्कर दी थी. मतगणना के दौरान पहले वीरेंद्र सिंह जीत गए थे, लेकिन दोबारा से मतगणना कराए जाने के बाद मुलायम सिंह यादव ने जीत हासिल की. उस वक्त वीरेंद्र सिंह करीब छह हजार वोटों से हारे थे. मुलायम सिंह दोनों सीट से विधायक बने थे, जिसके बाद उन्होंने तिलहर सीट छोड़ दी थी. ऐसे में उपचुनाव में तिलहर सीट से वीरेंद्र सिंह विधायक बने और फिर लगातार चार बार विधायक चुने गए.

विदेश में भी की पढ़ाई
33 साल के वीर विक्रम सिंह का जन्म शाहजहांपुर के ग्राम डभौरा में हुआ था. वीर विक्रम सिंह की शुरुआती पढ़ाई शाहजहांपुर के मुमुक्ष आश्रम में हुई. इसके बाद इन्होंने दून कॉलेज और ग्वालियर के सिंधिया स्कूल में भी पढ़ाई की. वीर व‍िक्रम स‍िंह ने दिल्ली विश्वविद्यालय से डिग्री ली और बिजनेस स्कूल से एमबीए क‍िया. उन्होंने आगे बेल्जियम और फ्रांस में भी अध्ययन किया. उन्होंने एसएस कॉलेज शाहजहांपुर से एलएलबी की डिग्री हासिल की.

प्रिंस के नाम से भी जाने जाते हैं
वीर व‍िक्रम स‍िंह ने राजनीति की शुरुआत भारतीय जनता पार्टी से की और स‍ियासत की दुन‍िया में ये 'प्रिंस' नाम से जाने जाने लगे. वीर व‍िक्रम स‍िंह 2008 से  2012 तक भारतीय सेंसर बोर्ड के सदस्य रहे. इसके अलावा  2014 से 2016 तक राष्ट्रीय उर्वरक निगम की राज्य सलाहकार समिति के सदस्य रहे.
 
आगामी सरकार में बन सकते हैं मंत्री
2017 में जब विधानसभा के चुनाव हुए तो वीर व‍िक्रम स‍िंह को भारतीय जनता पार्टी ने कटरा (शाहजहांपुर) निर्वाचन क्षेत्र से टिकट दिया गया और वो भारी मतों से विजयी हुए. उस वक्त प्र‍िंस उत्तर प्रदेश की 17वीं विधानसभा के सबसे युवा विधायकों में शुमार हुए. साल 2019 में वीर व‍िक्रम स‍िंह की शादी अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के वरिष्ठ राष्ट्रीय महामंत्री राघवेंद्र सिंह की पुत्री के साथ हुई. अक्टूबर 2021 में वीर व‍िक्रम के घर पुत्र रत्न की प्राप्त‍ि हुई. इस साल व‍िधानसभा चुनाव में वीर व‍िक्रम स‍िंह की दोबारा जीत के बाद रूहेलखंड की जनता को उम्मीद है क‍ि वीर व‍िक्रम स‍िंह को प्रदेश की आगामी सरकार में मंत्री बनने का मौका म‍िल सकता है.

 

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