उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों पर अगले साल यानी 2027 में चुनाव होने हैं. अभी से चुनाव की सियासी बिसात सजने लगी है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) जहां इस बार जीत की हैट्रिक लगाने के लिए जी-जान से जुट गई है तो वहीं अखिलेश यादव की समाज वादी पार्टी (सपा), राहुल गांधी की कांग्रेस पार्टी, मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बसपा) व अन्य क्षेत्रीय दल भी मतदाताओं को लुभाने में जुट गए हैं.
इस बार सभी पार्टियों की नजरें एक नए और प्रभावशाली वोट बैंक पर है. जी हां, हम बात कर रहे हैं Gen-Z (जेन-जी) यानी युवा मतदाताओं की. यूपी में Gen-Z मतदाताओं की हिस्सेदारी लगभग 15% है. ऐसे में माना जा रहा है कि Gen-Z कई सीटों पर जीत-हार का अंतर तय करने की क्षमता रखता है. ऐसे में बीजेपी, कांग्रेस, सपा से लेकर बसपा तक ने युवाओं को लुभाने की कोशिशें शुरू कर दी हैं. मायावती के भतीजे आकाश आनंद ने तो राहुल गांधी और अखिलेश यादव को अंकल बोलकर, यूपी में नई बहस छेड़ दी है. वह अखिलेश और राहुल को अंकल बताकर Gen-Z वोटरों को टारगेट कर रहे हैं. यहां आप जान सकते हैं Gen Z को अपनी तरफ करने के लिए किस दल ने क्या रणनीति बनाई है?
आखिर क्यों अहम हैं Gen-Z मतदाता
यूपी विधानसभा चुनाव का इतिहास देखें तो यहां जीत-हार का मुकाबला बेहद करीबी रहा है. यहां कई सीटों पर तो उम्मीदवारों को कुछ सौ या हजार वोटों के अंतर से जीत नसीब होती है. ऐसे में सभी पार्टियां जानती हैं कि कुछ फीसदी वोटों का बदलाव भी सीटों के आंकड़ों में बड़ा उलटफेर कर सकता है. करीबी मुकाबले वाली सीटों पर Gen-Z मतदाता चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं.
ऐसे में सभी पार्टियां Gen-Z मतदाताओं को अपनी ओर करने की रणनीति पर काम कर रहीं हैं. यदि किसी भी दल को युवा मतदाताओं का समर्थन मिलता है तो इसका सीधा असर विधानसभा सीटों के समीकरण पर पड़ सकता है. इसी के चलते बीजेपी, सपा, कांग्रेस, बसपा समेत सभी दल युवाओं तक पहुंच बनाने और उन्हें अपने पक्ष में जोड़ने की रणनीति तैयार कर रहे हैं. यूपी विधानसभा चुनाव 2027 में युवाओं के बीच रोजगार, शिक्षा, पेपर लीक, प्रतियोगी परीक्षाएं, डिजिटल अवसर, स्टार्टअप, महंगाई, विकास और सामाजिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दे अहम हो सकते हैं.
वोट शेयर का अंतर रहा था बेहद कम
यूपी विधानसभा चुनाव 2012 में सपा और बसपा के बीच वोट शेयर का अंतर बेहद कम था. सपा को जहां 29.15 फीसदी वोट मिले थे, वहीं बसपा का वोट शेयर 25.91 फीसदी रहा था. ऐसे दोनों पार्टियों के बीच अंतर सिर्फ 3.24 प्रतिशत का रहा था लेकिन सीटों के नतीजों में ये अंतर काफी बड़ा दिखाई दिया. सपा ने 224 सीटों पर जीत दर्ज कर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी, उधर, बहुजन समाप पार्टी को 80 सीटों पर संतोष करना पड़ा था. 2012 में भारतीय जनता पार्टी 15 फीसदी वोट शेयर के साथ 47 सीटें जीतने में सफल रही थी.
यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में भी वोट शेयर और सीटों के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला था. बीजेपी नेतृत्व वाले NDA गठबंधन को 43.82 फीसदी वोट मिले था. एनडीए को 273 सीटों पर जीत मिली थी. उधर, अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी और उससे जुड़े दलों को 36.60 फीसदी वोट मिले थे और 125 सीटों पर जीत मिली थी. इस तरह से करीब 7 फीसदी वोट शेयर का अंतर सीटों में 148 सीटों के बड़े फासले में बदल गया था. ऐसे में विधानसभा चुनाव 2027 में युवा वोटर सबसे बड़ा फैक्टर बन सकता है. इसी को देखते हुए विधानसभा चुनाव 2027 से पहले उत्तर प्रदेश में एक तरह का जेन जी वॉर शुरू हो गया है.
युवा मतदाताओं के लिए किस पार्टी ने क्या बनाई है रणनीति
1. बीजेपी ने Gen-Z वोटरों के लिए बनाई हैं ऐसी रणनीति
बीजेपी और योगी सरकार ने Gen-Z मतदाताओं को अपनी ओर करने के लिए तैयारी शुरू कर दी है. जेन-जी को साधने के लिए बीजेपी जमीनी स्तर पर काम करनी शुरू दी है. योगी सरकार ने युवा नीति और युवा आयोग की दिशा में काम करनी शुरू कर दी है. योगी सरकार की कोशिश है कि युवाओं से जुड़े मुद्दों को संस्थागत तरीके से सुना जाए और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए अलग तंत्र तैयार किया जाए. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसके अलावा अलग-अलग विश्वविद्यालयों में छात्र-छात्राओं से सीधे संवाद करने का प्लान भी तैयार किया है. आपको मालूम हो कि इस विद्यार्थियों के साथ इस संवाद में सीएम योगी सिर्फ भाषण नहीं देंगे, बल्कि वह स्टूडेंट्स के सवाल सुनेंगे और उनके जवाब भी देंगे.
इसका मतलब है कि योगी सरकार की कोशिश वन-वे कम्युनिकेशन के बजाय टू-वे संवाद को बढ़ावा देने की है. इतना ही नहीं, युवाओं पर पकड़ मजबूत करने के लिए भाजपा की युवा टोली स्कूल-कॉलेजों तक पहुंचकर उनसे सीधा संवाद करेगी. इसमें भाजयुमो के पदाधिकारियों और जिला स्तरीय टीम की भूमिका महत्वपूर्ण होगी. यह अभियान प्रदेश के मुख्य संगठन और भाजयुमो के प्रदेश संगठन के गठन के बाद शुरू होगी. सूत्रों के मुताबिक इस अभियान के तहत विधानसभावार 10-10 युवाओं की टीमें तैयार की जाएंगी. टीम के सदस्य स्कूल-कॉलेजों के युवाओं से बातचीत कर उनकी समस्याओं, अपेक्षाओं और सरकार को लेकर उनकी राय जानेंगे. टीम सरकार की ओर से युवाओं के लिए शुरू की गई योजनाओं, रोजगार कार्यक्रम आदि की जानकारी देगी. इतना ही नहीं स्कूल-कॉलेज परिसरों में युवाओं से बातचीत के अलावा छोटे समूहों से चर्चा, युवा सम्पर्क अभियान और सरकार की योजनाओं से संबंधित जानकारी साझा करने की गतिविधियां भी की जा सकती हैं.
यूपी सरकार के कई मंत्री भी अपने-अपने क्षेत्रों में युवाओं से सम्पर्क करना शुरू कर चुके हैं. युवाओं के साथ चौपाल कर रहे हैं. यदि कहीं नाराजगी है तो उसे दूर करने की कोशिश की जा रही है. आपको मालूम हो कि युवा आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों को स्कूलों में जाकर करियर, स्टार्टअप और टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों पर संवाद करने की योजना भी इस रणनीति का हिस्सा है. इस तरह से योगी सरकार की रणनीति सिर्फ चुनावी भाषणों तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं के लिए एक ऐसा नेटवर्क तैयार करने की है, जिसके जरिए उनकी समस्याओं की जानकारी संगठन और सरकार तक पहुंचती रहे. पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि युवाओं का बड़ा हिस्सा सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय है. ऐसे में भाजपा अपने जनप्रतिनिधियों को सोशल मीडिया, रील्स, ट्रेंडिंग मुद्दों, X और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर सक्रिय होने की ट्रेनिंग दे रही है ताकि बीजेपी नेता सोशल मीडिया पर भी युवाओं के सवालों और मुद्दों से सीधे जुड़ें.
बीजेपी के साथ RSS की सक्रियता भी महत्वपूर्ण
युवा मतदाताओं को लेकर भारतीय जनता पार्टी के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की सक्रियता भी महत्वपूर्ण है. संघ ने यूपी को पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में बांटकर विश्वविद्यालयों और कैंपसों में युवाओं के बीच पहुंच बनाने की रणनीति तैयार की है. क्षेत्र प्रचारकों को छात्रों की भावनाओं और उनके मुद्दों को समझने और इसकी रिपोर्ट संगठन तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत मुंबई में Gen Z से बातचीत के बाद अब 15 अगस्त 2026 को नागपुर में छात्रों और युवाओं से संवाद करेंगे.
सपा की युवा मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश
युवा मतदाताओं को लुभाने के लिए अखिलेश यादव की पार्टी सपा ने भी अपनी पारंपरिक चुनावी रणनीति में खास बदलाव किया है. सपा अब यूपी विधानसभा चुनाव 2027 में सिर्फ बड़ी रैलियों और राजनीतिक सभाओं के भरोसे नहीं रहना चाहती. इसके बजाय यह पार्टी सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म को युवा मतदाताओं तक पहुंचने का बड़ा माध्यम बना रही है. इसी कड़ी में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की ओर से 200 से ज्यादा डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स और इन्फ्लुएंसर्स के साथ बैठक किए जाने की बात सामने आई है.
इन बैठकों का उद्देश्य युवाओं के बीच सीधे डिजिटल संवाद और राजनीतिक मुद्दों की पहुंच बढ़ाना है. सपा इस बार चुनाव में बेरोजगारी, पेपर लीक और युवाओं के रोजगार जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से उठाएगी. सपा इन मुद्दों से जुड़े कंटेंट को अभी से यूट्यूब, इंस्टाग्राम और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए ग्रामीण और कस्बाई इलाकों के युवाओं तक पहुंचाने की कोशिश कर रही है. इतना ही नहीं सपा अपने युवा सांसदों के संसद में दिए भाषणों और राजनीतिक गतिविधियों को भी सोशल मीडिया पर प्रमोट कर रही है. इस अभियान का नेतृत्व स्वंय डिंपल यादव कर रही हैं. इस तरह से समाजवादी पार्टी का संदेश साफ है कि युवा वोटर से जुड़ना है तो उसकी भाषा और उसके प्लेटफॉर्म पर पहुंचना होगा.
कांग्रेस भी युवा वोटरों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटी
कांग्रेस भी यूपी के युवा मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए जुट गई है. आपको मालूम हो कि राहुल गांधी की ओर से प्रयागराज में छात्रों की गूंज कार्यक्रम के जरिए युवाओं से संवाद की शुरुआत को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. इतना ही नहीं, कांग्रेस एनएसयूआई के जरिए विश्वविद्यालयों और कैंपसों में सदस्यता अभियान चलाने की तैयारी में है. कांग्रेस की कोशिश है कि छात्र राजनीति के जरिए युवाओं के बीच अपना संगठनात्मक आधार मजबूत किया जाए. कांग्रेस पार्टी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों, रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं और उच्च शिक्षा से जुड़े मुद्दों को अपने अभियान का हिस्सा बना रही है.
बसपा का अंकल पॉलिटिक्स
मायावती की बहुजन समाज पार्टी भी युवाओं को लुभाने में जुट गई है. मायावती ने अपनी पार्टी की तरफ से आकाश आनंद को युवा चेहरे के तौर पर आगे किया है. मायावती के भतीजे और बीएसपी के नेशनल कॉर्डिनेटर आकाश आनंद ने राहुल गांधी और अखिलेश यादव को अंकल बोलकर, यूपी में नई बहस छेड़ दी है. आकाश आनंद अब अखिलेश यादव को अंकल बताकर Gen Z वोटरों को टारगेट कर रहे हैं. आकाश आनंद ने हाथरस से रैलियों के जरिए युवाओं और खासकर दलित-पिछड़े वर्ग के युवा मतदाताओं को जोड़ने का अभियान शुरू किया है. मायावती ने भी युवाओं और Gen-Z के साथ खड़े होने की बात कही है.
चंद्रशेखर आजाद भी युवाओं के बीच सक्रिय
आजाद समाज पार्टी के नेता चंद्रशेखर आजाद भी इस समय युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर लगातार सक्रिय दिखाई दे रहे हैं. वह युवाओं के रोजगार, शिक्षा और सामाजिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को उठा रहे हैं. चंद्रशेखर आजाद सड़क के आंदोलन के जरिए युवाओं को जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे में अब युवा चुनावी राजनीति के केंद्र में है. अब देखना है कि 2027 में किसका युवा कार्ड चलता है.