Tamil Nadu Assembly Election: यूपी-बिहार से कितनी अलग है तमिलनाडु की सियासत? किन जातियों का है दबदबा, समझिए

तमिलनाडु की सियासत में असली मुकाबला डीएमके (DMK) एआईएडीएमके (AIADMK) के बीच है. जबकि कांग्रेस और बीजेपी सहयोगी पार्टियां हैं. इनके अलावा भी सूबे में कई सियासी दल सक्रिय हैं. तमिलनाडु की सियासत में ओबीसी जातियों का दबदबा है. इसमें थेवर, गौंडर, वन्नियार और नादर जैसी जातियां शामिल हैं.

M K Stalin
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 17 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 8:15 PM IST

उत्तर प्रदेश और बिहार के साथ उत्तर भारत की सियासत को आप बखूबी समझते हैं. इन राज्यों में जातिगत वोटिंग के समीकरण को भी समझते हैं. लेकिन क्या आप तमिलनाडु की सियासत को समझते हैं? इस सूबे में जातीय समीकरण क्या कहते हैं? तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है. तमिलनाडु की 234 विधानसभा सीटों के लिए 23 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि 4 मई को नतीजे आएंगे. सूबे में सियासी पारा चढ़ गया है. चलिए आपको बताते हैं कि तमिलनाडु की सियासत में जाति कैसे काम करती हैं? किस जाति के वर्चश्व कितना है?

60 सालों से ओबीसी समुदाय का दबदबा-
तमिलनाडु की सियासत में ओबीसी समुदाय का दबदबा है. ये दबदबा पिछले 60 सालों से चला आ रहा है. 60 के दशक में तमिलनाडु में द्रविड़ सियासत शुरू हुई थी. उसके बाद से आज तक इस सूबे की सियासत में इससे जुड़े मुद्दों की ही प्रमुखता है. सूबे की करीब 70 फीसदी आबादी ओबीसी समुदाय की है. ऐसे में इस समुदाय की सियासी ताकत सबसे ज्यादा है.

ओबीसी जातियों की कितनी ताकत?
तमिलनाडु में सबसे ज्यादा ओबीसी जातियां हैं. इसमें थेवर, पेरैयार, देवेंद्र कुल्ला वेल्लार, वन्नियार, गौंडर और नादर जैसे उप-समहू हैं, जो सियासी समीकरण को बनाते और बिगाड़ते हैं. ओबीसी में सबसे ज्यादा आबादी पेरैयार और वेन्नियार की है.

तमिलनाडु में वेन्नियार की आबादी 14 फीसदी है, जबकि थेवर की आबादी 6 से 7 फीसदी है. सूबे में नादर की आबादी 4 से 5 फीसदी है. देवेंद्र कुल्ला वेल्लार की आबादी 5 फीसदी है. जबकि गौंडर की आबादी 6 से 7 फीसदी है. इसके अलावा यादव की आबादी 4 से 5 फीसदी है.

दलित समुदाय की सियासी ताकत-
तमिलनाडु की सियासत में दलित समुदाय की आबादी करीब 20 फीसदी है. दलितों के लिए सूबे में वीसीके पार्टी है. इसका पूरा नाम विदुथलाई चिरुथिगल काची है. ये पार्टी डीएमके के साथ गठबंधन में है. इस पार्टी का उत्तरी जिलों में मजबूत आधार है.

तमिलनाडु में 6 फीसदी मुस्लिम आबादी है. जिसका समर्थन डीएमके को है. इसके अलावा चेट्टियार, पिल्लईमार और अनुसूचित जनजाति की आबादी है. चेट्टियार और पिल्लईमार की आबादी एक-एक फीसदी है. 

तमिलनाडु में मुदालियार की आबादी 2-3 फीसदी है. जबकि नायडु की आबादी 3 फीसदी है. बाकी जातियों की आबादी 32 फीसदी है.

किस जाति का समर्थन किस पार्टी को-
तमिलनाडु में मुसलमानों को डीएमके का समर्थक माना जाता है. इसके साथ ही डीएमके को परैयार, अरुंधतियार और दलित बिरादरी लालार का समर्थन है. डीएमके को गौंडर्स समुदाय का भी समर्थन है.

एआईएडीएमके को थेवर समुदाय की समर्थन मिलता है. इसके साथ ही इस पार्टी को वन्नियार, कौंडर और देवेंद्रकुल्ला वेलालर समुदाय का भी समर्थन मिलता है. तमिलनाडु में बीजेपी अपना समर्थन बढ़ाने के लिए लगातार कोशिश कर रही है. लेकिन अभी तक कोई खास असर नहीं हुआ है.

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