साल 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से महीनों पहले अपने चुनावी गणित को दुरुस्त करने के लिए समाजवादी पार्टी ने एक नया फॉर्मूला अपना रही है. सूत्रों के मुताबिक पार्टी अपने बूथ स्तरीय एजेंटों (BLAs) को हर बूथ पर 5 नए मतदाताओं को जोड़ने का निर्देश दिया है. यह एक ऐसा चुनाव होने जा रहा है, जिसमें हर बूथ पर कड़ी टक्कर होगी और प्रत्येक वोट मायने रखेगा.
बूथ पर मजबूत होने की रणनीति-
अधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में राज्य भर में लगभग 1.77 लाख बूथ हैं. सपा की बूथ रणनीति 2024 के लोकसभा चुनावों के आंकड़ों पर आधारित है, जब सपा-कांग्रेस गठबंधन राज्य के 403 विधानसभा क्षेत्रों में से 224 पर आगे रहा था.
सपा का मुकाबला भाजपा से है, जिसने अतीत में "बूथ पालकों" की नियुक्ति और "पन्ना प्रमुखों" को तैनात करके अपनी रणनीति को मजबूत किया है.
इसके बावजूद, सपा नेताओं का दावा है कि राम मंदिर में चंदे की चोरी और NEET विरोध का मुद्दा लोगों के दिलों में अभी भी ताजा होने के कारण वे बढ़त में हैं.
2022 में कैसा था प्रदर्शन?
2022 के यूपी विधानसभा चुनावों में भाजपा ने लगभग 41.29% वोट हासिल किए और 255 सीटें जीतीं. सपा को 32.06% वोट मिले और उसने 111 सीटें जीतीं. 2024 के लोकसभा चुनावों में, भाजपा को 41.37% वोट मिले और उसने 33 सीटें जीतीं. सपा को 33.59% वोट मिले और उसने 37 सीटें हासिल की. सपा की गठबंधन सहयोगी कांग्रेस को छह सीटें मिलीं.
अखिलेश यादव का बूथ पर है फोकस-
संसदीय चुनावों के दो साल से अधिक समय बाद, सपा नेता निजी तौर पर स्वीकार करते हैं कि 2024 की बढ़त को बनाए रखने के लिए लगातार जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की प्रेरणा और सतर्क संदेश की आवश्यकता है.
सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बार-बार कार्यकर्ताओं से यही कहा है. हाल ही में पार्टी मुख्यालय में हुई बैठकों में उन्होंने कार्यकर्ताओं से बूथ-स्तरीय प्रबंधन, मतदाता सूची सत्यापन और विश्वसनीय BLAs नियुक्त करने को प्राथमिकता देने का आग्रह किया.
हर बूथ पर 5 नए वोटर जोड़ने का फॉर्मूला-
पार्टी सूत्रों ने कहा कि हमारे बूथ प्रभारियों को कम से कम पांच नए मतदाताओं को जोड़ने के लिए कहा गया है, हालांकि वे हर बूथ पर इससे अधिक जोड़ रहे हैं. हमारे बूथ स्तर के कार्यकर्ता घरों तक पहुंच रहे हैं, उन्हें सपा शासन के दौरान हुए विकास के बारे में बता रहे हैं. आज युवा पेपर लीक को लेकर भाजपा से नाराज हैं और लोग राम मंदिर में चंदे की चोरी से परेशान हैं.
एजेंसियां कर रही जिताऊ उम्मीदवारों की पहचान-
समाजवादी पार्टी सूत्रों के अनुसार, कई एजेंसियों और पार्टी के युवा संगठनों के माध्यम से सभी 403 सीटों को कवर करने वाले आंतरिक सर्वेक्षण चल रहे हैं. ये अभ्यास बूथ-वार जाति-वार वोटों का नक्शा तैयार करते हैं और "जिताऊ" उम्मीदवारों की पहचान करते हैं.
5 को जोड़ना, 25 पर फोकस का फॉर्मूला-
पार्टी का सोचना है कि पांच नए लोगों को जोड़ने के पीछे का गणित केवल पांच लोगों तक ही सीमित नहीं है. सपा सूत्रों के मुताबिक पार्टी को लगता है कि एक नए व्यक्ति को जोड़ने का मतलब है कि आप उनके पूरे परिवार को अपने पाले में ला रहे हैं. औसतन, इसका मतलब पांच लोग हैं. अब, जब आप पांच नए लोगों को जोड़ते हैं, तो इसका मतलब है कि आप प्रति बूथ 25 लोगों को जोड़ रहे हैं.
सपा के अभियान का कोई असर नहीं- बीजेपी
भाजपा ने कहा है कि सपा के इस अभियान का 2027 के राज्य विधानसभा चुनावों पर कोई असर नहीं पड़ेगा. बीजेपी प्रवक्ताओं का कहना है कि हर बूथ में पांच मतदाताओं को जोड़ने के समाजवादी पार्टी के अभियान से भाजपा को कोई फर्क नहीं पड़ेगा. पूरे राज्य में भाजपा के कार्यकर्ता सभी बूथों पर सक्रिय हैं. भाजपा का बूथ-स्तरीय संगठनात्मक ढांचा बेहद मजबूत है. सपा केवल हमारी नकल करने की कोशिश कर रही है.
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