उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों पर चुनाव में समाजवादी पार्टी और बीजेपी में जबरदस्त टक्कर मानी जा रही है. अब ये देखने को भी मिल रहा है. जिस तरीके से भाजपा समर्थित राज्यसभा सांसद परिमल नाथवानी के बेटे धनराज नाथवानी को समाजवादी पार्टी ने मैदान में उतार दिया है. उसके बाद अब बीजेपी के लिए अपने 8वें उम्मीदवार के लिए जरूरी विधायक जुटाना लगभग नामुमकिन हो सकता है, क्योंकि संख्या बल के हिसाब से समाजवादी पार्टी को अपने तीसरे उम्मीदवार को जिताने के लिए जितने विधायकों की जरूरत होगी, उससे ज्यादा विधायकों की जरूरत बीजेपी को होगी. ऐसे में अगर क्रॉस वोटिंग के लिए विधायकों का जुगाड़ नहीं हुआ तो क्या बीजेपी 8वां विधायक उतार पाएगी, यह बड़ा सवाल है?
बीजेपी के लिए क्रॉस वोटिंग मुश्किल-
दरअसल समाजवादी पार्टी के भीतर से क्रॉस वोटिंग करना अब बीजेपी के लिए बहुत टेढ़ी खीर है. पिछले चुनाव में जिन लोगों ने क्रॉस वोटिंग की, बहुत मुमकिन है, उसमें से 3 विधायक वापस इस बार समाजवादी पार्टी के लिए वोट कर दें. पल्लवी पटेल, आशुतोष मौर्या और विनोद चतुर्वेदी यह तीनों विधायक असंबद्ध जरूर हैं, लेकिन बीजेपी से बंधे नहीं है. ऐसे में इन तीनों विधायकों के सपा की तरफ लौटने की संभावना है.
बीजेपी के सहयोगियों पर नाथवानी की नजर-
क्रॉस वोटिंग का डर समाजवादी पार्टी नहीं, बल्कि बीजेपी के सहयोगी दलों में सबसे ज्यादा है. ओमप्रकाश राजभर की पार्टी, अनुप्रिया पटेल की पार्टी और संजय निषाद की पार्टी धनराज परिमल नाथवानी के निशाने पर होंगे. यही नहीं, राजा भैया बेशक भाजपा के साथ दिखाई देते हैं. लेकिन उनके विधायक भी वोट देने को स्वतंत्र हैं. ऐसे में बीजेपी के लिए 8वीं सीट अब लगभग नामुमकिन बनता जा रहा है.
समझिए राज्यसभा चुनाव में वोटों का गणित-
यूपी में सपा 111 विधायक 2022 में जीतकर आए थे, जिसमें से चार विधायक निष्कासित हैं, मनोज पांडेय, राकेश प्रताप सिंह, पूजा पाल, अभय सिंह. इसके अलावा 2024 में सपा के चार विधायक सांसद बने, जिनमें से एक ही सीट सपा जीत सकी है. तीन सीट हार गई. इसके अलावा दो सीटें आजम खान और अब्दुल्ला आजम की 2 सीटें भी अपना दल ने जीत ली.
इस तरह सपा की सीटें घटकर 102 विधायक हर गई हैं. जिसमें सुधाकर सिंह का निधन हो गया, इसके बाद 101 विधायक बचे, सपा के तीन विधायक बागी भी है. जिसमें विनोद चतुर्वेदी, आशुतोष मौर्य, राकेश कुमार पाण्डेय. इसके अलावा गायत्री प्रजापित की पत्नी महाराजी देवी ने पिछले राज्यसभा चुनाव में वोट डालने नहीं आईं थी. इस तरह सपा के पास 98 विधायक बचते हैं.
गायत्री की पत्नी और पल्लवी पटेल का वोट सपा के साथ रहता है तो यह आंकड़ा 98 सपा का रहेगा. जिसमें कांग्रेस के 2 विधायकों को जोड़ लेते हैं तो यह संख्या बढ़कर 100 हो जाती है.
सपा के पास फिलहाल 100 विधायक-
एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 38 विधायकों का वोट चाहिए होगा, जिसके लिहाज सपा दो सीटें 76 विधायकों के आधार पर जीत लेगी. इसके बाद सपा के पास मौजूदा समय में 24 विधायक बच रहे हैं, तीसरी सीट जीतने के लिए उसे 14 वोट अतरिक्त चाहिए होंगे.
सपा ने धनराज नथवानी को उतारकर बीजेपी की टेंशन बढ़ा दी है. सपा की नजर अपने बागी विधायकों को साधने के साथ-साथ बीजेपी के सहयोगी दलों के विधायकों पर नजर है. सुभासपा के 6 में से 4 विधायक सपा के बैकग्राउंड वाले हैं, जिनमें से तीन विधायक तो सपा का झंडा भी लगाकर घूम रहे हैं. सपा अगर सुभासपा के तीन विधायक को अपने साथ जोड़ लेती है तो यह संख्या बढ़कर 27 पर पहुंच जाएगी.
आरएलडी विधायकों पर होगी सपा की नजर-
इसके बाद सपा की नजर आरएलडी के विधायकों पर होगी. जिसमें तीन विधायक सपा के बैकग्राउंड वाले हैं. जिसमें दो मुस्लिम और एक गुर्जर समाज से हैं. सपा की कोशिश है कि इन दोनों मुस्लिम विधायकों को भी अपने साथ जोड़ लिया जाए. अगर सपा उन्हें अपने साथ ले लेती है तो यह आंकड़ा 29 विधायकों पर पहुंच जाएगा. इसके बाद भी सपा को 9 अतरिक्त वोट चाहिए होंगे.
बीजेपी के पास 255 विधायक-
वहीं, बीजेपी के पास फिलहाल 255 विधायक हैं. इसके अलावा 13 विधायक अपना दल (एस), सुभासपा के 6, निषाद पार्टी के 5 और आरएलडी के 9 विधायक हैं. इन सभी को जोड़ लेते हैं हैं तो यह आंकड़ा 288 विधायकों पर पहुंचता है. इसमें से तीन विधायक सुभासपा के हटा देते हैं तो एनडीए के पास 285 विधायक बचते हैं. 7 राज्यसभा सीटों को जीतने के लिए 266 विधायक चाहिए होंगे. इस लिहाज से बीजेपी के पास 19 विधायक अतिरिक्त बचते हैं. जिसमें सपा से निष्कासित 4 विधायकों को जोड़ते हैं यह आंकड़ा 23 पर पहुंच जाता है. इसके अलावा सपा के बाकी तीन विधायकों को जोड़ने पर 26 पहुंच जाता है, उसके बाद भी उसे 12 अतरिक्त वोट चाहिए होंगे. जिसमें अगर राजा भैया की पार्टी के दो विधायकों का समर्थन जुटा लेती है तो फिर भी उसे 10 वोट चाहिए होंगे.
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