Advertisement

UP Chunav: यूपी चुनाव 2027 को फतह करने के लिए BJP का मेगा प्लान! क्षेत्र और मोर्चा प्रभारियों की नई टीम का ऐलान, क्या होगा मास्टर स्ट्रोक?

Uttar Pradesh Assembly Elections 2027: यूपी में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. भारतीय जनता पार्टी अभी से एक बार फिर चुनाव फतह करने के लिए जुट गई है. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने क्षेत्रीय प्रभारियों और मोर्चा प्रभारियों की नई टीम का ऐलान किया है. 

UP BJP New Team
पीयूष मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 09 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 3:07 PM IST

अगले साल 2027 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं. इसे देखते हुए बीजेपी ने अभी से संगठन में बदलाव शुरू कर दिए हैं. पार्टी ने क्षेत्रीय प्रभारियों और मोर्चा प्रभारियों की नई टीम का ऐलान किया है. बीजेपी यूपी में चुनावी रणनीति को मजबूत करने में जुटी है. इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी लगातार दिल्ली जाकर शीर्ष नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं. कुछ दिन पहले उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से वन-टू-वन बैठक की थी. वहीं गत शनिवार को उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की. सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी के साथ करीब एक घंटे से ज्यादा चली बैठक में यूपी के विकास कार्यों, संगठन के विस्तार, बूथ स्तर की तैयारियों और आगामी चुनावी कार्यक्रमों पर चर्चा हुई. माना जा रहा है कि 2027 के चुनाव को देखते हुए यह बैठक काफी अहम है.

सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने का प्रयास
भाजपा ने जो बड़े बदलाव किए है, उसे पार्टी के भीतर एक बड़े सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है. पार्टी ने पश्चिम, ब्रज, कानपुर, अवध, काशी और गोरखपुर जैसे प्रमुख संगठनात्मक क्षेत्रों में अलग-अलग सामाजिक नेताओं को प्रतिनिधित्व देकर व्यापक संदेश देने की कोशिश की है. संगठन की नई टीम प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की अगुवाई में 2027 के चुनाव की तैयारी को मजबूत करेगी. 

संगठन और सरकार के बीच तालमेल पर ध्यान  
सबसे पहले प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की बात करते हैं. पंकज चौधरी एक अनुभवी और स्वीकार्य भाजपा चेहरा हैं. उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाकर पूर्वांचल, अवध और मध्य यूपी के सबसे खास कुर्मी वोट बैंक को साधने की कोशिश की गई है. भाजपा और अपना दल(S) का पहले से ही गठबंधन है, लेकिन पार्टी अपना स्वतंत्र कुर्मी नेतृत्व भी मजबूत रखना चाहती है. पंकज चौधरी 7 बार सांसद रह चुके हैं. वे वित्त राज्य मंत्री हैं और लंबे समय से संगठन से जुड़े नेता हैं. उनकी गिनती शांत, सुलभ और गैर विवादित नेताओं में की जाती हैं. वे लोकसभा में महाराजगंज का प्रतिनिधित्व करते हैं. पिछले लोकसभा चुनाव के बाद से ही भाजपा के सामने संगठन और सरकार के बीच समन्वय बनाने की बड़ी चुनौती है. पंकज चौधरी को एक ऐसा नेता माना जा रहा है जो क्रेंद, संगठन और सीएम योगी, तीनों के साथ संतुलन बनाकर काम करेंगे. 

धर्मपाल सिंह को अहम जिम्मेदारी
अब अगर धर्मपाल सिंह की बात करें तो वे संघ पृष्ठभूमि से आते हैं. वे संगठन केंद्रित चेहरा हैं. उन्हें संगठन में बहुत ही अहम जिम्मेदारी दी गई है. सुनील बंसल के राष्ट्रीय स्तर पर जाने के बाद धर्मपाल सिंह को संगठन का महामंत्री बनाया गया था. पार्टी उन्हें लो-प्रोफाइल, अनुभवी और संगठन-केंद्रित कार्यकर्ता के रूप में देखती है. माना जाता है कि वे गुटबाजी से दूर रहते हैं. उन्हें तटस्थ तरीके से संगठन चलाने वाला चेहरा माना जाता है. 

पार्टी के भीतर महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने की रणनीति 
भाजपा ने एक और बड़ा बदलाव करते हुए गीता शाक्य को ब्रज क्षेत्र का प्रभारी बनाया गया है. वे मौर्य-शाक्य-सैनी समुदाय से आती हैं. इसकी गिनती उत्तर प्रदेश की प्रभावशाली गैर यादव ओबीसी जातियों में होती है. ब्रज क्षेत्र में आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, एटा, मैनपुरी, कासगंज, हाथरस और अलीगढ़ जैसे जिले शामिल हैं, जहां शाक्य, मौर्य, कुशवाहा और सैनी समुदायों की मजबूत उपस्थिति है. भाजपा 2027 से पहले इन वर्गों को और मजबूती से अपने साथ जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है. पार्टी के भीतर महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने की रणनीति को भी ध्यान में रखकर शाक्य की नियुक्त की गई है. गीता शाक्य महिला, ओबीसी और संगठनात्मक अनुभव, तीनों का संयोजन पेश करती हैं.

लोधी राजपूत समुदाय को साधने की कोशिश
अगला नाम, राम प्रताप सिंह चौहान का है. इन्हें पश्चिम की जिम्मेदारी दी गई है. पश्चिम क्षेत्र के महामंत्री बने राम प्रताप सिंह चौहान आगरा क्षेत्र से आते हैं. इन्हें ब्रज और पश्चिमी यूपी की संगठनात्मक राजनीतिक का पुल माना जाता है. पश्चिमी यूपी में जाटों के साथ-साथ ठाकुर समुदाय भी कई जिलों में प्रभावशाली है. भाजपा संगठन में इस वर्ग को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश इस नियुक्ति में भी दिखाई देती है. भाजपा ने शंकर लोधी को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देकर लोधी (लोधी राजपूत) समुदाय को साधने की कोशिश की है. यह समुदाय खासकर कानपुर-बुंदेलखंड, हमीरपुर, महोबा, बांदा, झांसी, जालौन, फतेहपुर और उन्नाव क्षेत्र में शक्तिशाली माना जाता है. साल 2024 के बाद भाजपा गैर-यादव पिछड़ी जातियों को फिर से मजबूती से अपने साथ जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है.

युवा नेता को जिम्मेदारी 
अभिजात मिश्रा को गोरखपुर से प्रदेश महामंत्री बनाया गया है. भाजपा ने युवा नेता को जिम्मेदारी सौंपकर युवाओं को साधने की कोशिश की है. उन्हें युवा ब्राह्मण चेहरे के रूप में देखा जा रहा है. गोरखपुर सीएम योगी का राजनीतिक गढ़ होने के साथ ही बहुत ही अहम है. इस क्षेत्र से किसी नेता को प्रदेश महामंत्री बनाना पूर्वांचल और योगी क्षेत्र की संगठनात्मक पकड़ को मजबूत करने के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है. अभिजात मिश्रा लंबे समय से भाजपा संगठन, छात्र राजनीति और वैचारिक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं. पार्टी आमतौर पर ऐसे नेताओं को आगे बढ़ाती है जिनकी बूथ से लेकर जिला स्तर तक संगठन पर अच्छी पकड़ हो. 

काशी भाजपा के लिए बहुत अहम
रमेश सिंह को काशी क्षेत्र की जिम्मेदारी सौंपी गई है. काशी भाजपा के लिए बहुत ही अहम है. इसमें वाराणसी सहित पूर्वांचल के कई अहम हिस्से शामिल हैं. यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र भी है इसलिए संगठनात्मक लिहाज से इसे बहुत संवेदनशील माना जाता है. रमेश सिंह पहले से प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष हैं और उन्हें अनुभवी संगठनात्मक चेहरा माना जाता है. 

क्या है संदेश देने की कोशिश
दिलीप पटेल को अवध क्षेत्र से प्रदेश महामंत्री बनाया गया है. अवध राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है, जहां शहरी और ग्रामीण दोनों तरह की सीटें बड़ी संख्या में हैं. 2024 के बाद भाजपा उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दे रही है जहां उसे अपेक्षित बढ़त नहीं मिली या जहां संगठन को और मजबूत करने की जरूरत लगी. यतेंद्र शर्मा को प्रदेश मीडिया प्रभारी बनाया गया है. यतेंद्र विद्यार्थी परिषद और संघ से जुड़े रहे हैं. वे लगभग दो दशक तक राजनीतिक पत्रकारिता में सक्रिय रहे हैं.

उन्होंने टीवी, डिजिटल और राजनीतिक रिपोर्टिंग में लंबा अनुभव हासिल किया है और दिल्ली में भाजपा, आरएसएस, केंद्र सरकार और चुनावी राजनीति को करीब से कवर किया है. पार्टी 2027 से पहले सिर्फ संगठन नहीं, बल्कि नैरेटिव मैनेजमेंट, मीडिया रणनीति और डिजिटल संचार पर भी खास ध्यान दे रही है. इसलिए ऐसे व्यक्ति जो टीवी डिबेट, हेडलाइन, डिजिटल ट्रेंड और राजनीतिक संदेश की पैकेजिंग को समझते हों, भाजपा उन्हें संगठन में उपयोगी मान रही है. हाल ही में की गई इन नियुक्तियों को चुनावी तैयारी, सामाजिक विस्तार, क्षेत्रीय संतुलन और संगठनात्मक सक्रियता बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. नई टीम में ब्राह्मण, कुर्मी, लोधी, मौर्य-शाक्य, ठाकुर और अन्य सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व देकर भाजपा ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि 2027 की लड़ाई केवल सरकार के कामकाज पर नहीं, बल्कि संगठन, सामाजिक समीकरण, बूथ प्रबंधन और मीडिया नैरेटिव चारों मोर्चों पर लड़ी जाएगी. 

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Advertisement