लगन हो, मेहनत और दिल में मंजिल पाने की चाह हो तो शारीरिक अक्षमता भी आपको कामयाबी पाने से नहीं रोक सकती. ऐसी ही एक कहानी मुंबई में रहने वाली ममता वाणी की है, जिन्हें बचपन से ही एक पैर में पोलियो है. बावजूद इसके ममता ने एक डबिंग आर्टिस्ट के रूप में बड़ी पहचान के साथ साथ खूब शोहरत कमाई है. ममता ना केवल एक डबिंग आर्टिस्ट हैं, बल्कि एक कवित्री, गायक, एंकर भी हैं और बड़े-बड़े मंचों से लोगों को अपनी मधुर आवाज से दीवाना बनाया है. ममता उन दिव्यांग महिलाओं के लिए एक उदाहरण बनी हैं, जो इस समाज में खुद को कमजोर समझती हैं.
व्हील चेयर से डबिंग आर्टिस्ट तक का सफर-
दिल्ली में पली बढ़ी ममता साल 2015 से सपनों के शहर मुंबई में हैं और काफी हद तक मंजीर के करीब पहुँच चुकीं हैं. ममता जब आठ महीने की थीं, तब से उनके एक पैर में पोलियो पाया गया. लेकिन इनके माता-पिता के विश्वास और पालन पोषण ने ममता को इस काबिल बनाया कि आज देश के बड़े बड़े सेलिब्रिटी के साथ ममता मंच शेयर करती हैं.
कई फेमस फिल्मों में किया काम-
हालांकि डबिंग की दुनिया में ममता ने ज्यादा नाम कमाया है. बॉलीवुड की कई फिल्मों में अपनी आवाज दी है. जिनमें घोस्ट, राज़ी, हसीना पारकर, मॉम, मुन्ना माइकल, डैडी, काला, शादी में ज़रूर आना जैसी फ़िल्मों के नाम शामिल हैं. साथ ही साथ कई साउथ फ़िल्मों में भी डबिंग की है. दूरदर्शन पर आने वाले शो मेरी आवाज सुनो से ममता को काफी नाम मिला. इसके अलावा कई वेब सीरीज में ममता वाणी ने अपनी आवाज दी है और दिग्गज कलाकारों के हाथों कई अवार्ड और सम्मान अपने नाम किए हैं.
इतना ही नहीं, ममता खुद की फिटनेस का भी अच्छा खासा ख्याल रखती हैं. रोजाना ही एक घंटे की वॉकिंग, जिम और स्विमिंग रूटीन में शामिल है. ममता ने दिव्यांग महिलाओं की प्रेरित करते हुए एक प्यारी से कविता भी सुनाई.
(धर्मेंद्र दुबे की रिपोर्ट)
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