फिल्मों को सिनेमाघरों में रिलीज करने से पहले उन्हें केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड यानी CBFC की जांच से गुजरना पड़ता है. अब फिल्म सर्टिफिकेशन से जुड़े नियमों में बदलाव किया गया है. नई गाइडलाइंस में हिंसा, ड्रग्स, महिलाओं और बच्चों से जुड़े संवेदनशील दृश्य, फिल्म के टाइटल और दूसरे देशों के साथ भारत के रिश्तों जैसे मुद्दों पर ध्यान दिया गया है.
नई गाइडलाइंस में कहा गया है कि फिल्मों की वजह से भारत के दूसरे देशों के साथ अच्छे रिश्तों पर असर नहीं पड़ना चाहिए. इसका मतलब यह है कि ऐसी फिल्मों की जांच ज्यादा ध्यान से हो सकती है, जिनमें भारत और किसी दूसरे देश के बीच युद्ध या तनाव दिखाया गया हो.
फिल्मों में हिंसा दिखाने पर पूरी तरह रोक नहीं है. लेकिन हिंसा को बढ़ावा देने से बचना होगा. अपराध करने का तरीका भी इस तरह नहीं दिखाया जाना चाहिए, जिससे दर्शकों को अपराध करने की प्रक्रिया सीखने या उसे बढ़ावा देने का मौका मिले. कहानी के लिए जरूरी नहीं होने वाली हिंसा को भी कम करने पर जोर दिया गया है.
नई गाइडलाइंस में ड्रग्स को लेकर एक अहम बदलाव किया गया है. अगर फिल्म में नशीली दवाओं या साइकोट्रॉपिक पदार्थों के इस्तेमाल, सेवन या तस्करी का दृश्य दिखाया जाता है, तो उसके साथ वैधानिक चेतावनी देना जरूरी होगा. इसमें 'Say No To Drugs' का संदेश भी शामिल है.
महिलाओं के खिलाफ अपराध, यौन हिंसा और बच्चों के साथ दुर्व्यवहार जैसे विषयों को लेकर भी नियम स्पष्ट किए गए हैं. ऐसे सीन अगर कहानी के लिए जरूरी हों, तो उन्हें कम से कम और बिना गैर जरूरी डिटेल के दिखाने की बात कही गई है. बच्चों को हिंसा का शिकार या उसका हिस्सा दिखाने से भी बचने को कहा गया है.
अब फिल्म के नाम पर भी CBFC की नजर रहेगी. गाइडलाइंस के अनुसार टाइटल भड़काऊ, अश्लील, आपत्तिजनक या नियमों के खिलाफ नहीं होना चाहिए. यानी फिल्म की जांच केवल उसके अंदर दिखाए गए कंटेंट तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उसके नाम को भी देखा जाएगा.
फिल्मों के लिए U, UA, UA 7+, UA 13+, UA 16+ और A जैसी श्रेणियां लागू हैं. इससे माता-पिता को यह समझने में मदद मिलती है कि फिल्म किस उम्र के बच्चों के लिए उपयुक्त हो सकती है.