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संजय लीला भंसाली के सीरीज से लेकर अब BRICS के मंच तक गूंजी शांतनु नरेंद्र मयी के तबले की धुन

महाराष्ट्र के अकोला जिले के उभरते तबला वादक शांतनु नरेंद्र मयी ने अपनी कला से वैश्विक स्तर पर सुर्खियां बटोरी हैं. संजय लीला भंसाली की वेब सीरीज 'हीरामंडी' में अपनी संगत देने से लेकर रूस में आयोजित BRICS मेलोडी फेस्टिवल तक, शांतनु ने भारतीय शास्त्रीय संगीत का लोहा मनवाया है.

शांतनु नरेंद्र मयी
gnttv.com
  • अकोला,
  • 06 मई 2026,
  • अपडेटेड 8:01 AM IST

कहते हैं अगर मेहनत और जुनून सच्चा हो, तो कोई भी सपना दूर नहीं होता. अकोला के युवा तबला वादक शांतनु नरेंद्र मयी ने इस बात को सच कर दिखाया है. एक छोटे शहर से निकलकर उन्होंने अपनी मेहनत और साधना के दम पर देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी भारतीय शास्त्रीय संगीत की पहचान बनाई है.

गुरु के मार्गदर्शन में निखरा हुनर
शांतनु ने अपने संगीत सफर की शुरुआत मजबूत गुरुओं के साथ की. वे विवेक देशपांडे और प्रसिद्ध तबला वादक पंडित योगेश समसी के निर्देशन में प्रशिक्षण ले रहे हैं. कम उम्र में ही उन्होंने कई बड़ी उपलब्धियां हासिल कर ली हैं. उन्हें एनसीपीए और सीसीआरटी जैसी प्रतिष्ठित स्कॉलरशिप मिल चुकी है, साथ ही मुंबई में पंडित वी. डी. पलुस्कर पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है. आज वे ऑल इंडिया रेडियो के 'ए' ग्रेड कलाकार हैं, जो उनकी प्रतिभा को साबित करता है.

'हीरामंडी' से मिली खास पहचान
शांतनु की कला सिर्फ मंच तक सीमित नहीं रही. उन्होंने संजय लीला भंसाली की चर्चित वेव सीरीज हीरामंडी जैसी चर्चित वेब सीरीज में तबला वादन कर अपनी खास पहचान बनाई. इस प्रोजेक्ट के जरिए उनके संगीत को एक नए और बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचने का मौका मिला.

22 जनवरी 2024 को राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान भी शांतनु ने देश के बड़े कलाकारों के साथ मंच साझा किया था. इस मौके पर उन्होंने सोनू निगम, शंकर महादेवन, कैलाश खेर, अनुराधा पौडवाल और हरिहरन जैसे दिग्गजों के साथ परफॉर्म किया. यह उनके करियर का एक बड़ा और यादगार पल रहा.

BRICS मंच पर भारत की छाप
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी शांतनु ने भारत का नाम रोशन किया. BRICS Melody Festival में उन्होंने अपने बैंड 'संगम एन्सेंबल' के साथ रूस के उल्यानोव्स्क और मॉस्को में शानदार प्रस्तुतियां दीं. इस कार्यक्रम में 35 देशों के कलाकार शामिल हुए थे, लेकिन कड़ी चयन प्रक्रिया के बाद ही कुछ कलाकारों को मौका मिला, जिसमें उनकी टीम भी शामिल रही.

जुगलबंदी ने जीता दर्शकों का दिल
जहां अन्य देशों के कलाकार लिखित संगीत परफॉर्म कर रहे थे, वहीं भारतीय टीम ने तबला, सारंगी, बांसुरी और संतूर के साथ लाइव जुगलबंदी पेश की. तीनताल और रागों की खुली प्रस्तुति ने वहां मौजूद लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया. भारतीय संगीत की यह जीवंत शैली रूस के दर्शकों को काफी पसंद आई.

संगीत के साथ ज्ञान का प्रसार
शांतनु ने सिर्फ परफॉर्मेंस तक खुद को सीमित नहीं रखा. उन्होंने अपनी टीम के साथ रूस के स्कूलों और कॉलेजों में वर्कशॉप भी की, जहां छात्रों को भारतीय शास्त्रीय संगीत की बारीकियां सिखाईं. इस तरह वे संगीत के साथ-साथ संस्कृति को भी आगे बढ़ा रहे हैं.

(रिपोर्ट- धनंजय साबले)

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