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बॉलीवुड के वह 4 गाने, जिनमें प्रकृति की सुंदरता और बसंत की विरासत का किया गया है बखान

चलिए थोड़ा Throw Back मोमेंट करते हैं, और चलते हैं बॉलीवुड की उस दुनिया में जहां फिल्मों के गानों में होता था प्रकृति के सुंदरता का बखान. आज भी लोग उन गानों को सुन कर झूम उठते हैं.

बसंत के गाने
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 23 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:17 PM IST

अगर आप नेचर और म्यूजिक लवर हैं तो ये आर्टिकल आपके लिए ही है. आज के दौर में हर रोज कोई न कोई नए गाने रिलीज होते रहते हैं, लेकिन शायद ही कोई गाना होगा जो नेचर पर बना होगा. लेकिन शुरू से ऐसा नहीं था.  बॉलीवुड ने कई ऐसे गाने भी दुनिया को दिए हैं, जिसमें शराब, प्यार और लड़कियों के जिक्र के अलावा कुछ अलग था. जिनमें पेड़, पहाड़ और आसमान का जिक्र किया गया था.  

1. वीर-जारा 
2004 के दौर में आई इस लव स्टोरी ने सब को रुलाया. क्या बच्चे क्या बूढ़े, सब को इस फिल्म ने एक भावना से जोड़ा था. उसी फिल्म में फिल्माया ये गाना 'धरती सुनहरी अंबर नीला' में जिस तरह से भारत की खूबसूरती का बखान किया गया है, वह सुरों में पिरोई किसी कविता से कम नहीं है.  

2. हीरामंडी 
GenZ's के जमाने में आई इस वेव सीरीज ने कई लोगों को पुराने दौर का दीवाना बना दिया. सोशल मीडिया पर इस फिल्म से जुड़े कई मीम बने और रील्स की बहार आ गई. इसी सीरीज का एक गाना भी खूब वायरल हुआ, जिसके बोल थे 'सकल बन फूल रही सरसों'. इस कविता को अमीर खुसरो ने लिखा है, जो बसंत पंचमी पर आधारित था. 

3. उपकार
1967 में आई फिल्म उपकार का गीत 'आई झूम के बसंत' भारतीय संस्कृति और ऋतु परिवर्तन को दर्शाता है. इस गीत में बसंत के आगमन के साथ खेतों की हरियाली और किसानों की उम्मीदें साफ दिखाई देती हैं. यह गीत सिर्फ सुनने के लिए नहीं, बल्कि महसूस करने के लिए है.


4. कोयल बिन बगिया ना सोहे राजा 
लोक संगीत की दुनिया में शारदा सिन्हा का यह गीत बसंत की आत्मा के झलक को दिखाता है. कोयल की कुहुक, बगिया की हरियाली और मौसम की मिठास यह गीत प्रकृति और लोकसंस्कृति का सुंदर मेल है. इसमें गायका कहती हैं कि जिस तरह कोयल के बिनी बाग नहीं शोभता है, उसी तरह पति के बीना  पत्नी का मन दुखी रहता है. प्रकृति और मनुष्य के मेल से बना ये गीत आत्मा तक जाता है.

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