Saharanpur: बेटे के लिए व्हीलचेयर पर बैठी मां बनी कोच, मेहनत से हुआ अंडर-14 में चयन.. विराट-रोहित हैं आइडल इमेज

आर्थिक तंगी और मुश्किल परिस्थितियों के बीच शहर के बेटे ने अपनी मेहनत के दम पर यूपी अंडर-14 क्रिकेट टीम में बनाई जगह.

अर्णव अपने परिवार के साथ
राहुल कुमार
  • सहारनपुर,
  • 20 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 6:48 PM IST

सहारनपुर में संघर्ष और हौसले की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो हर किसी की आंखें नम कर देती है. आर्थिक तंगी और मुश्किल परिस्थितियों के बीच शहर के बेटे अर्णव ने अपने जुनून और मेहनत के दम पर यूपी अंडर-14 क्रिकेट टीम में जगह बनाकर शानदार प्रदर्शन किया है. अर्णव की मां व्हीलचेयर पर हैं और उनके पिता पैरालिसिस से जूझ रहे हैं, लेकिन इन हालातों ने अर्णव के सपनों को कमजोर नहीं होने दिया. उसने हर मुश्किल को चुनौती मानकर पार किया और आज अपने प्रदर्शन से परिवार और जिले का नाम रोशन कर रहे हैं.

व्हीलचेयर पर बैठी मां, बनीं बेटे के लिए गेंदबाज
इस कहानी का सबसे भावुक पहलू वह है, जहां एक मां अपनी शारीरिक मजबूरी को ताकत बनाकर बेटे के सपनों को उड़ान दे रही है. अर्णव की मां कुसुम खुद व्हीलचेयर पर बैठकर उसे गेंदबाजी कराती हैं, ताकि वह बेहतर बल्लेबाजी की प्रैक्टिस कर सके. यह नजारा किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं, जहां मां का हौसला बेटे की सबसे बड़ी ताकत बन गया. घर की तंगी, पिता की बीमारी और सीमित संसाधनों के बावजूद इस परिवार ने हार नहीं मानी.

परिवार के मुश्किल हालात में अर्णव की दौड़
अर्णव का सफर आसान नहीं रहा. करीब चार साल पहले उसने अन्य बच्चों को खेलते देखा और तभी उसके मन में क्रिकेटर बनने का सपना जगा. उसने मां के सामने अपनी इच्छा रखी और मां ने भी हालातों को दरकिनार करते हुए उसे नालंदा क्रिकेट एकेडमी और सहारनपुर क्रिकेट एसोसिएशन में दाखिला दिलाया. इसके बाद शुरू हुआ संघर्ष का असली दौर सुबह 5 किलोमीटर साइकिल चलाकर स्कूल जाना, फिर घर लौटकर खाना और उसके बाद क्रिकेट प्रैक्टिस के लिए निकल जाना. कई बार यह सफर 20 किलोमीटर तक का हो जाता, लेकिन अर्णव का जुनून कभी कम नहीं हुआ.

कोहली-रोहित में दिखी तस्वीर
दिन-रात की इसी कड़ी मेहनत ने उसे उस मुकाम तक पहुंचाया, जहां उसका चयन यूपी अंडर-14 टीम में हुआ. अर्णव ने इस मौके को हाथ से नहीं जाने दिया और हर मैच में शानदार प्रदर्शन करते हुए टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई. उसकी बल्लेबाजी की तकनीक और कॉन्फिडेंस ने कोच और चयनकर्ताओं को प्रभावित किया. अर्णव बतातें हैं कि कोहली और रोहित उनके आदर्श हैं.

स्कूल और परिवार ने नहीं छोड़ा साथ
अर्णव की मां कुसुम कहती हैं कि बेटे के अंदर शुरू से ही कुछ अलग करने का जज्बा था. घर की खराब आर्थिक स्थिति के बावजूद उन्होंने कभी उसे रोका नहीं, बल्कि हर कदम पर उसका साथ दिया. उन्होंने सहारनपुर डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन और चेयरमैन मोहम्मद अकरम की सराहना करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन से ही अर्णव को सही प्लेटफॉर्म मिला. वहीं एसोसिएशन के सेक्रेटरी लतीफ-उर-रहमान का कहना है कि सहारनपुर में अब खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं, जिससे अर्णव जैसे टैलेंट आगे आ रहे हैं. साथ ही नालंदा वर्ल्ड स्कूल के एमडी मुकुल चौधरी ने अर्णव को अनुशासित और मेहनती छात्र बताया.

 

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