मध्य प्रदेश के जंगलों में एक खास अभियान छेड़ा गया है. यहां 150 साल पहले विलुप्त हो चुकी जंगली भैंसे की प्रजाति को फिर से बसाने की कोशिश की जा रही है. इसके तहत असम के काजीरंगा नेशनल पार्क से कान्हा टाइगर रिजर्व तक का जंगली भैंसों का सफल 'ट्रांसलोकेशन' किया गया है.
2 हजार किमी का सफर, पार्क के लिए खास पल-
कान्हा नेशनल पार्क के लिए ये बेहद खास पल है. 3 दिन का सफर करने के बाद, असम से करीब 2 हजार किमी की दूरी तय कर 4 जंगली भैंसे अपने नए घर यानी कान्हा नेशन पार्क पहुंचे हैं. मध्यप्रदेश के जंगलों में ये प्रजाति करीब 150 साल पहले खत्म हो चुकी थी. जिसकी अब घर वापसी हुई है. कान्हा पहुंचने के बाद इन जानवरों को सीधे जंगल में नहीं छोड़ा गया है. इन्हें विशेष रूप से तैयार किए गए 'बाड़ों' में रखा गया और फिर इनकी कुदरती रिहाइश में शिफ्ट किया गया.
50 जंगली भैंसों को किया जाएगा शिफ्ट-
कान्हा नेशनल पार्क यूं तो जैव विविधता के लिए जाना जाता है. लेकिन अब यहां कई और दुर्लभ जीवों को लाया जा रहा है. प्रशासन का दावा है कि ये देश के सबसे बड़े जमीनी वन्यजीव अभियानों में से एक है. जिसके तहत करीब 50 जंगली भैंसों को यहां शिफ्ट किया जाएगा. ये अभियान पर्यावरण संतुलन के लिए बेहद अहम है, क्योंकि जानकारों का मानना है कि जंगली भैंसों के चरने के तरीके से घास के मैदानों की विविधता बनी रहती है, जो मध्य भारत के प्राकृतिक संतुलन के लिए बेहद जरूरी है.
जंगली भैंसों के संरक्षण में मिलेगी मदद-
मौजूदा समय में जंगली भैंसों की कुदरती रिहाइश मुख्य रूप से असम में सीमित है. जबकि छत्तीसगढ़ में इनकी संख्या बहुत कम है. जाहिर है इस कदम से इस जीव के प्रजनन और संरक्षण में मदद मिलेगी. खास बात ये है कि ये अभियान मध्यप्रदेश और असम, इन दो राज्यों के बीच पर्यावरण सहयोग की भी मिसाल है. सहयोग की भावना दिखाते हुए मध्य प्रदेश ने असम को घड़ियाल उपलब्ध कराने की पेशकश की है, ताकि वहां भी इनके संरक्षण प्रयासों को मजबूती मिल सके.
इस कदम से ना सिर्फ कान्हा नेशनल पार्क की खूबूसरती बढ़ेगी. जंगली भैंसों को नई कुदरती रिहाइश मिलेगी. साथ ही यहां टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा.
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