कानपुर में आयोजित जनता दर्शन कार्यक्रम में उस समय भावुक माहौल बन गया, जब दो छोटी बच्चियां अपनी मां का हाथ पकड़कर अपनी शिकायत लेकर जिलाधिकारी के सामने पहुंचीं. यह मामला भले ही छोटा था, लेकिन इसकी संवेदनशीलता ने वहां मौजूद हर व्यक्ति को सोचने पर मजबूर कर दिया. कानपुर के जाजमऊ क्षेत्र की रहने वाली शन्नो अपनी बेटियों इस्वा खां और मरियम फातिमा के साथ कलेक्ट्रेट पहुंची थीं. मां की शिकायत घरेलू विवाद से जुड़ी थी, लेकिन बातचीत के दौरान एक ऐसी बात सामने आई जिसने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया. यह बात थी एक छोटी बच्ची की मिट्टी की गुल्लक की, जिसमें उसने अपने छोटे-छोटे सपने सहेज कर रखे थे.
गुल्लक तोड़कर उसमें जमा पैसे निकाल लिए
इस्वा खां पिछले काफी समय से अपनी गुल्लक में पैसे जमा कर रही थी. कभी रिश्तेदारों से मिले रुपये, कभी जेब खर्च से बचाए पैसे और कभी घर में मिले सिक्के, वह चुपचाप अपनी गुल्लक में डालती रहती थी. उसकी इच्छा थी कि जब गुल्लक भर जाएगी, तो वह अपने लिए स्कूल बैग या कोई जरूरी सामान खरीदेगी. लेकिन पारिवारिक विवाद के बीच उसकी यह मेहनत बेकार हो गई. आरोप है कि घर में ही किसी ने उसकी गुल्लक तोड़कर उसमें जमा पैसे निकाल लिए. बच्ची के लिए यह सिर्फ पैसे नहीं थे, बल्कि उसके सपनों का सहारा थे.
थाने से निराश होकर पहुंचीं डीएम के पास
परिवार ने पहले इस मामले की शिकायत थाने में की, लेकिन वहां इसे मामूली घरेलू मामला मानकर कोई कार्रवाई नहीं की गई. इसके बाद बच्चियां अपनी मां के साथ सीधे जनता दर्शन कार्यक्रम में पहुंच गईं. जब जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने बच्ची से पूछा कि वह गुल्लक में क्या रखती थी, तो उसने मासूमियत से बताया कि वह रोज थोड़ा-थोड़ा पैसा बचाती थी. यह सुनकर वहां मौजूद सभी अधिकारी और लोग भावुक हो गए.
डीएम ने मिट्टी की गुल्लक और स्कूल बैग भेंट किए
जिलाधिकारी ने तुरंत मामले की गंभीरता को समझा और थाना जाजमऊ प्रभारी को जांच के निर्देश दिए. लेकिन इसके साथ ही उन्होंने एक ऐसा कदम उठाया, जिसने इस घटना को खास बना दिया. उन्होंने दोनों बच्चियों को अपने पास बुलाया, उनसे प्यार से बात की और फिर उन्हें नई मिट्टी की गुल्लक और स्कूल बैग भेंट किए. इतना ही नहीं, उन्होंने अपनी जेब से दोनों गुल्लकों में 1000-1000 रुपये भी डाले और बच्चियों से कहा कि अब यह उनकी नई शुरुआत है.
खिल उठे मासूम चेहरे
जैसे ही बच्चियों को नया गुल्लक और बैग मिला, उनके चेहरे पर मुस्कान लौट आई. जो बच्चियां कुछ देर पहले उदास और सहमी हुई थीं, अब खुशी से चमक रही थीं. उन्होंने हाथ जोड़कर जिलाधिकारी का धन्यवाद किया.
रिपोर्टर: रंजय सिंह
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