बिहार के सहरसा जिले के रौता गांव से एक प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जिसने यह साबित कर दिया है कि सफलता संसाधनों की नहीं बल्कि जुनून और मेहनत की मोहताज होती है. यहां के 10वीं कक्षा के छात्र मयंक ने अपने हौसले और लगन से एक अनोखी मिसाल कायम की है.
मयंक ने बिना किसी लैपटॉप या कंप्यूटर के, केवल अपने Samsung Galaxy A22 स्मार्टफोन के जरिए कोडिंग सीखी और कई सॉफ्टवेयर प्रोजेक्ट्स तैयार किए. सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने तकनीक की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई. उनकी इस उपलब्धि ने न सिर्फ उनके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन कर दिया है.
Samsung ने बनाया बिजनेस पार्टनर
मयंक की प्रतिभा और मेहनत को देखते हुए दुनिया की जानी-मानी कंपनी Samsung ने उन्हें आधिकारिक तौर पर अपना 'Business Partner' स्वीकार किया है. इतना ही नहीं, उन्हें 'Global Innovator 2026' के प्रतिष्ठित खिताब से भी सम्मानित किया गया है. यह उपलब्धि किसी भी छात्र के लिए बहुत बड़ी मानी जाती है, खासकर तब जब वह छोटे गांव से आता हो और संसाधनों की कमी से जूझ रहा हो.
प्राइवेट नौकरी करते हैं पिता
मयंक के पिता मुकेश सिंह एक प्राइवेट नौकरी करते हैं और परिवार का पालन-पोषण बड़ी मुश्किल से करते हैं. ऐसे हालात में मयंक की यह सफलता और भी खास बन जाती है. आज के समय में जहां कई लोग संसाधनों की कमी का बहाना बनाते हैं, वहीं मयंक ने यह साबित कर दिया कि अगर इरादा मजबूत हो तो एक साधारण स्मार्टफोन से भी वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है. उनकी कहानी देश के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो बड़े सपने देखते हैं लेकिन संसाधनों की कमी से पीछे हट जाते हैं.
रिपोर्टर: धीरज कुमार सिंह
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