कांगड़ा जिला के दिव्यांग अब आम आदमियों के साथ चल सकते हैं, घूम सकते हैं और जो नहीं सुन सकते वह आसानी से सुन पाएंगे और जिनको देखने में परेशानी होती थी, वह आसानी से देख सकते कर सकते हैं. जी हां, जिला प्रशासन ने दिव्यांगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए आरबीआई (राष्ट्रीय व्योश्री योजना) के तहत विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया है. जिसमें दिव्यांगों को विशेष उपकरण मुहैया कर उन्हें एक सशक्त इंसान बनाने का प्रयास किया है.
दरअसल, जिला प्रशासन का कहना है कि जब कोई दिव्यांग व्यक्ति समाज की मुख्यधारा से जुड़ता है, तो उसके जीवन में सकारात्मक बदलावों की नई शुरुआत होती है. पहले जहां उसे उपेक्षा, भेदभाव या असहायता का अनुभव होता था, वहीं मुख्यधारा में शामिल होने के बाद आत्मसम्मान और आत्मविश्वास की भावना प्रबल होती है. उसे यह महसूस होता है कि वह भी समाज का उतना ही महत्वपूर्ण हिस्सा है जितना कोई अन्य व्यक्ति. शिक्षा, रोजगार और सामाजिक गतिविधियों में समान अवसर मिलने से दिव्यांग व्यक्ति के भीतर नई ऊर्जा और आशा का संचार होता है. समाज की स्वीकृति उसे मानसिक मजबूती प्रदान करती है और वह अपनी क्षमताओं को पहचानने लगता है. इतना ही नहीं मुख्यधारा से जोड़ने के बाद दिव्यांग व्यक्ति स्वयं को स्वतंत्र, सशक्त महसूस करता है. यह अनुभव न केवल उसके व्यक्तिगत विकास में सहायक होता है, बल्कि समाज को भी यह संदेश देता है कि समानता और समावेशन से ही एक सशक्त और संवेदनशील समाज का निर्माण संभव है.
दिव्यांगों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के प्रयास के दौरान डीसी कांगड़ा हेमराज बैरवा ने बताया कि सरकार की योजनाएं दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक सशक्त कदम हैं. सहायक उपकरणों के माध्यम से लाभार्थियों के दैनिक जीवन को सुगम बनाया जा रहा है, जिससे वे सम्मान पूर्वक जीवन व्यतीत कर सकें. उन्होंने कहा कि 9 दिसंबर 2024 से 16 दिसंबर 2024 तक दिव्यांगों का आकलन किया गया था. जिन्हें जो दिव्यांग चल नहीं सकते, सुन नहीं सकते वह देख नहीं सकते उनके लिए ट्राई साइकिल, व्हीलचेयर, कमोड चेयर, श्रवण यंत्र, बैसाखी, वाकिंग स्टिक, वॉकर, रोलैटर, नी-ब्रेस, एलएस बेल्ट, कुशन, कृत्रिम अंग एवं अन्य सहायक उपकरण वितरित किए गए. दिव्यांगों को 35.11 लाख रुपये की लागत से कुल 1158 सहायक उपकरण भेंट किए गए हैं, हालांकि इसमें से 806 वरिष्ठ दिव्यांग नागरिक भी शामिल हैं.
कांगड़ा जिला के दिव्यांग सुरजीत सिंह का कहना है कि उनका 1998 में एक बस हादसा हुआ था, जिसमें उन्होंने अपना पैर खो दिया था. तब से बिना व्हीलचेयर के केवल एक ही जगह तक सीमित रह गए थे. उन्होंने कहा कि वह सरकार रेड क्रॉस सोसाइटी और जिला प्रशासन का शुक्रगुजार करते हैं कि उन्होंने उन्हें इतने सालों के बाद व्हीलचेयर मुहैया करवाई है. अब वह इसके सहारे पार्क में भी घूम सकते हैं किसी कार्यक्रम में भी जा सकते हैं और अन्य जगहों पर आम आदमी की तरह भी जा सकते हैं.
(रिपोर्टर: पूजा शर्मा)
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