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Bagaha Police Initiative: गुड टच-बैड टच, साइबर क्राइम और सुरक्षा पाठ, बगहा पुलिस छात्रहित में उठा रही बड़ा कदम,  छात्राओं को मिल रहा आत्मनिर्भरता का गुरुमंत्र

बिहार के बगहा में पुलिस अधिकारियों ने स्कूलों को गोद लेकर बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा की कमान संभाली है. इस पहल के तहत विद्यार्थियों को गुड टच-बैड टच, साइबर सुरक्षा, नशे से दूरी और इमरजेंसी हेल्पलाइन (112 व 1098) की जानकारी देकर जागरूक और सशक्त बनाया जा रहा है. ताकि भविष्य में बगहा का कोई भी बच्चा, किसी भी दबाव में आकर किसी साजिश का शिकार न हो जाएं.

Bagaha Police Initiative
अभिषेक पाण्डेय
  • बगहा,
  • 21 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 4:26 PM IST

बिहार के बगहा में पुलिस की एक ऐसी पहल सामने आई है, जहां खाकी की भूमिका अपराधियों पर कार्रवाई करने तक सीमित नहीं है. यहां पुलिस बच्चों की पढ़ाई, सुरक्षा और जागरूकता पर भी ध्यान दे रही है. पुलिस अधिकारी स्कूलों में पहुंचकर विद्यार्थियों को पढ़ाई का महत्व समझा रहे हैं. साथ ही बच्चों को गुड टच-बैड टच, साइबर अपराध से बचाव और अपनी सुरक्षा से जुड़ी जरूरी बातें भी बता रहे हैं. खासकर बच्चियों को समझाया जा रहा है कि अगर कोई उन्हें परेशान करता है, पीछा करता है या गलत व्यवहार करता है, तो वे चुप न रहें. अपनी परेशानी परिवार, शिक्षकों या पुलिस को बताएं. बगहा एसपी राजेश कुमार, एसडीपीओ निहार भूषण और अलग-अलग थानों के थानाध्यक्ष इस पहल के जरिए बच्चों को सही दिशा दिखाने और उनके भीतर सुरक्षा का भरोसा मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं.

जब खाकी ने थामी किताब, बच्चों को पढ़ाने पहुंचे पुलिस अधिकारी
आमतौर पर पुलिस की पहचान अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाली संस्था के रूप में होती है. लेकिन बगहा में पुलिस बच्चों की शिक्षा और उनके बेहतर भविष्य के लिए भी अपनी भूमिका निभा रही है. इस पहल के तहत सभी थानों के थानाध्यक्षों को अपने-अपने क्षेत्र के एक विद्यालय से जोड़ा गया है. वे स्कूलों में पहुंचकर विद्यार्थियों से बातचीत करते हैं, उन्हें पढ़ाई का महत्व समझाते हैं और अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए मेहनत करने की सीख देते हैं. पुलिस अधिकारी बच्चों को बताते हैं कि शिक्षा के जरिए वे अपने सपनों को पूरा कर सकते हैं. इसके साथ ही अनुशासन बनाए रखना, समय का सही इस्तेमाल करना और गलत आदतों से दूर रहना भी जरूरी है.

एसपी राजेश कुमार खुद स्कूल पहुंचकर कर रहे बच्चों को प्रेरित
बगहा के पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार भी इस पहल में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. वे खुद विद्यालयों में जाकर विद्यार्थियों को पढ़ाई के प्रति प्रेरित करते हैं और जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हैं. पटखौली थाना क्षेत्र के 10+2 सहकारिता प्रोजेक्ट बालिका उच्च विद्यालय में भी छात्राओं को शिक्षा और सुरक्षा से जुड़े विषयों पर जागरूक किया जा रहा है.

एसपी बच्चों को पढ़ाई का महत्व समझाने के साथ मेहनत करने, अनुशासन बनाए रखने और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने की सीख देते हैं. वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को अपने बीच देखकर बच्चों को यह समझने का अवसर मिलता है कि पुलिस की जिम्मेदारी केवल कार्रवाई करने तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों को सही दिशा दिखाने में भी उसकी भूमिका हो सकती है.

थानाध्यक्ष शैलेश कुमार ने संभाली छात्राओं की पढ़ाई और सुरक्षा की जिम्मेदारी
बगहा थाना क्षेत्र के 10+2 प्रोजेक्ट बालिका उच्च विद्यालय को थानाध्यक्ष शैलेश कुमार ने गोद लिया है. यहां छात्राओं की पढ़ाई के साथ उनकी सुरक्षा और जागरूकता पर भी ध्यान दिया जा रहा है. विद्यालय में छात्राओं से बातचीत कर उन्हें अपनी समस्याएं खुलकर बताने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है. उन्हें समझाया जाता है कि पढ़ाई के साथ अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक रहना भी जरूरी है.

अगर कोई रास्ते में परेशान करता है, पीछा करता है या गलत व्यवहार करता है, तो छात्राओं को चुप रहने की जरूरत नहीं है. वे अपने अभिभावकों, शिक्षकों या पुलिस से मदद मांग सकती हैं. इस पहल का उद्देश्य छात्राओं का आत्मविश्वास बढ़ाना और उन्हें यह भरोसा दिलाना है कि परेशानी के समय वे अकेली नहीं हैं.

4. गुड टच-बैड टच के जरिए बच्चों को समझाया जा रहा सुरक्षा का महत्व
बच्चों की सुरक्षा इस पहल का अहम हिस्सा है. विद्यालयों में महिला पुलिसकर्मियों के माध्यम से बच्चों को गुड टच और बैड टच के बारे में जानकारी दी जा रही है. आसान भाषा में उन्हें समझाया जाता है कि कौन-सा व्यवहार सही है और किस तरह का व्यवहार उन्हें असहज महसूस करा सकता है. साथ ही यह भी बताया जाता है कि अगर कोई उनके साथ गलत हरकत करता है या उन्हें असुरक्षित महसूस कराता है, तो अपनी बात किसी भरोसेमंद व्यक्ति तक पहुंचाना जरूरी है. खासकर बच्चियों को बताया जा रहा है कि उन्हें किसी भी गलत व्यवहार को चुपचाप सहने की जरूरत नहीं है. वे अपने माता-पिता, शिक्षकों या पुलिस से मदद मांग सकती हैं.

5. 'पुलिस दीदी' से बातचीत कर अपनी समस्याएं बता सकती हैं छात्राएं
बच्चियों को सुरक्षा के प्रति जागरूक करने में महिला पुलिसकर्मियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है. 'पुलिस दीदी' के रूप में उनसे संवाद करने से छात्राओं को अपनी समस्याएं साझा करने का अवसर मिलता है. विद्यालयों में छात्राओं को बताया जा रहा है कि अगर उन्हें किसी तरह की परेशानी, धमकी या गलत व्यवहार का सामना करना पड़ता है, तो वे पुलिस से संपर्क कर सकती हैं. महिला पुलिसकर्मियों से बातचीत के दौरान वे सुरक्षा से जुड़े सवाल पूछ सकती हैं और अपनी समस्याओं के बारे में जानकारी दे सकती हैं. स्कूल आने-जाने के दौरान अगर कोई उनका पीछा करता है या परेशान करता है, तो ऐसी बात छिपाने के बजाय परिवार, शिक्षक या पुलिस को बताना चाहिए.

6. मोबाइल और इंटरनेट के इस्तेमाल में सतर्क रहने की सलाह
आज के डिजिटल दौर में मोबाइल और इंटरनेट बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं. ऐसे में ऑनलाइन दुनिया में सुरक्षित रहना भी जरूरी है. बगहा पुलिस की इस पहल के तहत बच्चों को साइबर अपराध के प्रति जागरूक किया जा रहा है. उन्हें बताया जा रहा है कि इंटरनेट इस्तेमाल करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और अनजान लोगों से बातचीत में सावधानी बरतना क्यों जरूरी है. बच्चों को अपनी निजी जानकारी और पासवर्ड अनजान लोगों के साथ साझा नहीं करने की सलाह दी जा रही है. साथ ही संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने और ऑनलाइन किसी पर आंख मूंदकर भरोसा करने से बचने के लिए भी समझाया जा रहा है. अगर कोई ऑनलाइन धमकी देता है, ब्लैकमेल करता है या साइबर ठगी का सामना करना पड़ता है, तो डरकर चुप रहने के बजाय अभिभावकों और पुलिस को इसकी जानकारी देनी चाहिए.

7. नशे और गलत संगत से दूर रहने का संदेश
बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए पढ़ाई के साथ अच्छी आदतें और सही दिशा भी जरूरी हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस अधिकारी विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने, गलत संगत से बचने और अपने लक्ष्य पर ध्यान देने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. बच्चों को समझाया जा रहा है कि मेहनत, अनुशासन और समय का सही इस्तेमाल उन्हें जीवन में आगे बढ़ने में मदद कर सकता है. इसके साथ ही खेलकूद, रचनात्मक गतिविधियों और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाए रखने का महत्व भी बताया जा रहा है. उन्हें संदेश दिया जा रहा है कि अपने सपनों को पहचानें, उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत करें और किसी परेशानी में गलत रास्ता अपनाने के बजाय परिवार, शिक्षकों या भरोसेमंद लोगों से मार्गदर्शन लें.

8. बाल विवाह और बाल श्रम के खिलाफ भी जागरूकता
बच्चों के अधिकारों और सुरक्षित बचपन के बारे में जानकारी देना भी इस पहल का हिस्सा है. बाल विवाह और बाल श्रम जैसी सामाजिक समस्याएं बच्चों की शिक्षा और उनके विकास को प्रभावित करती हैं. ऐसे में बच्चों को पढ़ाई के महत्व और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करना जरूरी है. हर बच्चे को स्कूल जाने, अपनी प्रतिभा निखारने और सुरक्षित माहौल में आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए. इसके लिए अभिभावकों और समाज को भी समझने की जरूरत है कि कम उम्र में शादी और बच्चों से श्रम कराना उनके भविष्य पर असर डाल सकता है. विद्यालयों में पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी इन मुद्दों पर बच्चों को जानकारी देने और उनके सवालों का जवाब देने का अवसर भी प्रदान करती है.

9. आपात स्थिति में 112 और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 से मिल सकती है मदद
बच्चों को सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के साथ यह बताना भी जरूरी है कि परेशानी के समय मदद कैसे ली जा सकती है. बच्चों को आपातकालीन सहायता नंबर 112 और संकट में बच्चों की मदद के लिए चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की जानकारी दी जा सकती है. उन्हें समझाया जा रहा है कि किसी गंभीर परेशानी, धमकी या असुरक्षित स्थिति का सामना करने पर चुप रहने के बजाय किसी भरोसेमंद व्यक्ति को बताएं. जरूरत पड़ने पर सहायता भी मांगें. समय पर मदद मांगने से बच्चों को परेशानी से बाहर निकलने और उचित सहायता प्राप्त करने में मदद मिल सकती है.

10. पुलिस, शिक्षक और अभिभावक मिलकर संवारेंगे बच्चों का भविष्य
बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं है. इसमें पुलिस, शिक्षक, अभिभावक और पूरे समाज की भूमिका महत्वपूर्ण है.     बगहा पुलिस की इस पहल के तहत सभी थानों के थानाध्यक्ष अपने-अपने क्षेत्र के एक विद्यालय से जुड़कर विद्यार्थियों के बीच शिक्षा और सुरक्षा का संदेश पहुंचा रहे हैं. पुलिस अधिकारी बच्चों को पढ़ाई के प्रति प्रेरित करने के साथ गुड टच-बैड टच, साइबर सुरक्षा, बाल अधिकार और आपात स्थिति में मदद मांगने जैसी जरूरी बातों की जानकारी भी दे रहे हैं.

विद्यालय बच्चों को शिक्षा देता है, परिवार उन्हें मार्गदर्शन देता है और पुलिस सुरक्षा के प्रति जागरूक करने में अपनी भूमिका निभाती है. जब ये सभी मिलकर बच्चों के भविष्य के लिए काम करते हैं, तो उनके लिए सुरक्षित और बेहतर माहौल बनाने की दिशा में मजबूत कदम उठाया जा सकता है.
 

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