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याद है ये बच्चा? जिसकी एक हंसी पर बनते हैं करोड़ों मीम्स, सालों बाद अरुण कुमार की कहानी सुनकर रह जाएंगे हैरान

अरुण कुमार की कहानी, केवल कहानी नहीं है बल्कि प्रेरणा है उन लोगों के लिए जो परिस्थिति से हार मान लेते हैं.

अरुण कुमार की कहानी
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 09 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 2:34 PM IST

आपने सोशल मीडिया पर एक क्लीप देखा होगा कि हर मीम में एक बच्चा हंसता हुआ नजर आता है. उसके हाथ में एक चाय का गिलास रहता है और उसकी हंसी इतनी मजेदार होती है कि सालों बाद भी वह बच्चा मीम पर नजर आ रहा है. एक मुस्कुराता हुआ चेहरा, जिसने कभी इंटरनेट पर लोगों को खूब हंसाया था, अब फिर से चर्चा में है. लेकिन इस बार वजह सिर्फ उसकी हंसी नहीं, बल्कि अपनी जिंदगी की एक अनकही कहानी के चलते. 

वायरल मुस्कान के पीछे छिपा संघर्ष
जिस मुसकुराते चेहरे को देखकर लोग इंटरनेट पर हंस रहे हैं, उसके पीछे एक बेहद मुश्किल भरा बचपन छीपा हुआ है. अरुण को बहुत छोटी उम्र में ही स्कूल छोड़ना पड़ा था. परिवार की आर्थिक हालत ठीक नहीं थी, इसलिए पढ़ाई जारी रखना उसके लिए संभव नहीं था. हालांकि, उसकी जिंदगी में एक ऐसा इंसान आया जिसने धीरे-धीरे उसकी जिंदगी की दिशा बदल दी.

गरीबी की वजह से छूटी पढ़ाई
अरुण उस समय सिर्फ 10 साल का और चौथी कक्षा में था जब उसे मजबूरी में स्कूल छोड़ना पड़ा. परिवार की गरीबी इतनी ज्यादा थी कि उसे पढ़ाई की जगह काम करना पड़ा. इसी दौरान नेहरू नाम के एक व्यक्ति ने उसे ट्रक क्लीनर के रूप में काम पर रख लिया. अरुण ट्रक के साथ दूर के यात्राओं पर जाने लगा और रास्ते में रोजमर्रा के कामों में मदद करता था. उसकी जिंदगी सड़क पर काम करने वाले एक छोटे हेल्पर की तरह गुजरने लगी.

वायरल हुआ वीडियो, लेकिन पढ़ नहीं पाया तारीफ
इंटरनेट पर जब अरुण का वीडियो वायरल हुआ, तो लाखों लोग उसकी मुस्कान की तारीफ करने लगे. सोशल मीडिया पर उसके बारे में कई कमेंट्स और मीम्स बन रहे थे. लेकिन विडंबना यह थी कि अरुण खुद उन कमेंट्स को पढ़ भी नहीं सकता था. जिस बच्चे की मुस्कान लाखों लोगों को खुश कर रही थी, वह खुद पढ़ना-लिखना नहीं जानता था और लोगों की तारीफ को समझ भी नहीं पा रहा था.

ट्रक ड्राइवर ने बदलने की ठानी किस्मत
नेहरू की अपनी जिंदगी भी संघर्षों से भरी रही थी. उन्हें भी कभी परिवार की जिम्मेदारियों की वजह से कॉलेज छोड़ना पड़ा था. जब उन्होंने देखा कि लोग अरुण की तारीफ कर रहे हैं, तो उन्होंने उसके भविष्य के बारे में गंभीरता से सोचना शुरू किया. उन्होंने तय किया कि अरुण की जिंदगी भी उनकी तरह अधूरी पढ़ाई के साथ नहीं रुकनी चाहिए.

मालिक नहीं, बने मार्गदर्शक
इसके बाद नेहरू सिर्फ अरुण के मालिक नहीं रहे, बल्कि उसके मार्गदर्शक और शिक्षक भी बन गए. उन्होंने अरुण के लिए किताबें खरीदीं, उसकी परीक्षा फीस भरी और उसे 10वीं की बोर्ड परीक्षा के लिए प्राइवेट उम्मीदवार के तौर पर रजिस्टर कराया. धीरे-धीरे ट्रक की यात्राएं ही अरुण के लिए एक छोटे से स्कूल में बदल गईं.

ट्रक बना चलता-फिरता क्लासरूम
लंबी यात्राओं के दौरान और रास्ते में चाय के लिए रुकने पर नेहरू अरुण को पढ़ाने लगे. वह उसे अंग्रेजी के अक्षर और गणित की बुनियादी बातें सिखाते थे. इस तरह सड़क पर दौड़ता ट्रक ही धीरे-धीरे एक चलता-फिरता क्लासरूम बन गया, जहां एक बच्चे की जिंदगी नई दिशा ले रही थी. 

साल 2026 नया दौर 
2026 में वह वक्त आया जब नेहरू की मेहनत और अरुण के लगन का फाल मिला. इस साल ही अरुण ने 10वीं की परीक्षा पास कर ली है. उसके लिए यह बहुत बड़ा अचीवमेंट है, यहां तक कि किसी वीडियो पर मिलियन व्यूज से भी ज्यादा.

 

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