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तेजसिंह किले के पास बन रहा 63 करोड़ का भव्य सांस्कृतिक हब... शिल्प, संस्कृति और विरासत को मिलेगी वैश्विक पहचान

1857 की क्रांति की गूंज से गढ़ी मैनपुरी की धरती पर संस्कृति और विरासत को नई पहचान देने के लिए यहां लगभग 63 करोड़ रुपए से सांस्कृतिक केंद्र विकसित किया जा रहा है. ऐतिहासिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए मैनपुरी एक नए सांस्कृतिक केंद्र के जरिए अपनी पहचान को नया आयाम दिया जा रहा है. जहां अतीत की गौरव गाथा वर्तमान की रचनात्मकता और भविष्य की संभावनाएं एक साथ आकार लेंगी.

Mainpuri Maharaja Tez Singh Qila
समर्थ श्रीवास्तव
  • लखनऊ,
  • 07 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 3:58 PM IST

1857 की क्रांति की गूंज से गढ़ी मैनपुरी की धरती पर संस्कृति और विरासत को नई पहचान देने के लिए यहां लगभग 63 करोड़ रुपए से सांस्कृतिक केंद्र विकसित किया जा रहा है. यही वह भूमि है, जहां चौहान वंश के महाराजा तेज सिंह जूदेव ने अपने किले से अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती देकर पराक्रम की अमिट कहानी लिखी थी. अब उसी ऐतिहासिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए मैनपुरी एक नए सांस्कृतिक केंद्र के जरिए अपनी पहचान को नया आयाम दिया जा रहा है. जहां अतीत की गौरव गाथा वर्तमान की रचनात्मकता और भविष्य की संभावनाएं एक साथ आकार लेंगी.

तेज सिंह किले के पास बन रहा सांस्कृतिक केंद्र
इस परियोजना के लिए लगभग 25,544 वर्ग मीटर क्षेत्र आवंटित किया गया है, जो ऐतिहासिक तेज सिंह किले के पास स्थित है और सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है. इस स्थान का चयन इस तरह किया गया है कि यहां आने-जाने में लोगों को सुविधा हो और अधिक से अधिक लोग इस केंद्र से जुड़ सकें. भवन का डिजाइन भी ऐसा तैयार किया जा रहा है, जिसमें आवागमन सुगम हो, रखरखाव आसान हो और विभिन्न गतिविधियों के लिए अलग-अलग स्थान उपलब्ध हों.

800 सीटों वाला सभागार, गैलरियां और थिएटर बनेंगे आकर्षण
इस केंद्र में कई महत्वपूर्ण सुविधाएं विकसित की जा रही हैं, जिनमें संग्रहालय, प्रदर्शनी क्षेत्र, खुला रंगमंच (एम्फीथिएटर), प्रायोगिक थिएटर, पुस्तकालय, छात्रावास और कैफेटेरिया शामिल हैं. इसके अलावा 800 लोगों की क्षमता वाला आधुनिक सभागार भी बनाया जा रहा है, जिसमें सम्मेलन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और अन्य आयोजन हो सकेंगे. साथ ही शहर की कला, मूर्तियां और शिल्प को प्रदर्शित करने के लिए विशेष गैलरी भी तैयार की जा रही है.

म्यूजिकल फांउटेन और गैलरी से सजेगा सांस्कृतिक केंद्र
परियोजना में एक संग्रहालय ब्लॉक भी विकसित किया जा रहा है, जिसमें प्रदर्शनी गैलरी, कार्यशाला क्षेत्र, म्यूजिकल फांउटेन और मनोरंजन क्षेत्र शामिल होंगे. यहां आने वाले लोग न सिर्फ प्रदर्शनियों का आनंद ले सकेंगे, बल्कि विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों में भी भाग ले सकेंगे. इसके साथ ही खुदरा दुकानों और अन्य सुविधाओं के जरिए स्थानीय शिल्प और उत्पादों को भी बढ़ावा मिलेगा.

पर्यटन और आर्थिक विकास को भी गति
मैनपुरी का यह सांस्कृतिक केंद्र शहर की पहचान को नई ऊंचाई देने का काम करेगा. यह न केवल कला और संस्कृति का केंद्र बनेगा, बल्कि पर्यटन और आर्थिक विकास को भी गति देगा. आने वाले समय में यह स्थान लोगों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनने के साथ-साथ स्थानीय विरासत को सहेजने और आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा.

इस पर 'पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह' ने बताया कि, मैनपुरी में बन रहा सांस्कृतिक केंद्र हमारी समृद्ध विरासत को नई पहचान देने का एक महत्वपूर्ण कदम है. हमारा प्रयास है कि यह स्थान कला, संस्कृति और परंपराओं का जीवंत केंद्र बने, जहां स्थानीय प्रतिभाओं को मंच मिले और लोग अपनी जड़ों से जुड़ सकें. आने वाले समय में यह केंद्र न सिर्फ सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देगा, बल्कि देश-विदेश के पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनेगा.

अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमृत अभिजात ने बताया कि, मैनपुरी का यह सांस्कृतिक केंद्र हमारी समृद्ध ऐतिहासिक विरासत को आधुनिक स्वरूप में प्रस्तुत करने की एक महत्वपूर्ण पहल है. राज्य सरकार का उद्देश्य विशेष रूप से युवाओं को अपनी जड़ों और समृद्ध इतिहास से जोड़ते हुए उनमें सांस्कृतिक चेतना और गौरव की भावना को सशक्त करना है. वर्तमान समय में प्रदेश के विभिन्न जनपदों में इसी प्रकार के सांस्कृतिक केंद्र और संग्रहालयों की परिकल्पना को जमीन पर उतारा जा रहा है. यह केंद्र मैनपुरी को सांस्कृतिक मानचित्र पर एक नई और विशिष्ट पहचान दिलाने में मील का पत्थर साबित होगा.

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