गांव का पहला डॉक्टर बनेगा ये लड़का, बाड़मेर के रेगिस्तान से एम्स देवघर तक की कहानी

राजस्थान के बाड़मेर जिले के एक लड़का अपने गांव बेरीवाला तला का पहला डॉक्टर बनेगा. गोरधनराम गडरिया परिवार में पैदा हुए हैं. गरीबी के बाद भी उन्होंने अपना सपना नहीं छोड़ा. आज वो झारखंड के देवघर से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं और गांव का पहला डॉक्टर बनने वाले हैं.

Gordhanram with family
gnttv.com
  • कोटा,
  • 16 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:37 PM IST

राजस्थान के बाड़मेर जिले के सुदूर रेगिस्तानी गांव बेरीवाला तला से निकलकर गोरधनराम बाना ने वह कर दिखाया, जो कभी एक सपना भर लगता था. गडरिया परिवार में जन्मा यह युवक अब एम्स देवघर (झारखंड) से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है और अपने गांव का पहला डॉक्टर बनने जा रहा है.

गांव का पहला डॉक्टर बनेगा गोरधनराम-
नीट-2025 में ऑल इंडिया रैंक 4498 और ओबीसी कैटेगरी रैंक 1720 हासिल कर गोरधनराम ने न सिर्फ अपने परिवार, बल्कि पूरे गांव का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है. कोटा कोचिंग एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट, कोटा के रेगुलर क्लासरूम स्टूडेंट रहे गोरधनराम वर्तमान में एम्स देवघर में एमबीबीएस फर्स्ट ईयर के छात्र हैं.

जहां पानी भी बारिश पर निर्भर, वहां से बनेगा डॉक्टर-
बेरीवाला तला गांव में आज भी पीने का पानी बारिश के भरोसे है. मानसून में टांके भरते हैं, उन्हीं से सालभर काम चलता है. तीन साल पहले प्रधानमंत्री आवास योजना से पक्का मकान जरूर मिला, लेकिन भेड़-बकरियां चराने वाले माता-पिता आज भी अधिकतर समय झोपड़ी में ही रहते हैं.

इन्हीं सीमित संसाधनों के बीच गोरधनराम की पढ़ाई आगे बढ़ी. सरकारी स्कूल से 10वीं में 77.50% और 12वीं में 93.60% अंक लाकर उसने साबित कर दिया कि हालात कितने भी कठिन हों, इरादे मजबूत हों तो रास्ता निकल ही आता है.

भाई की मौत , फिर भी नहीं टूटा हौसला-
गोरधनराम के पिता कुंभाराम और माता कौशल देवी निरक्षर हैं, लेकिन बच्चों की शिक्षा को उन्होंने हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता दी. परिवार के चार भाइयों में सबसे बड़े बिशनाराम ने आरएएस प्री और मेंस दोनों क्लियर कर लिए थे और पोस्टिंग की तैयारी चल रही थी. लेकिन 2021 में एक सड़क हादसे ने परिवार से उसका सहारा छीन लिया.

आंखों में दिक्कत, फिर भी करता रहा पढ़ाई-
इसी सदमे के बीच गोरधनराम ने डॉक्टर बनने का संकल्प और मजबूत कर लिया. तैयारी के दौरान आंखों में लगातार दर्द, जलन और पानी बहने जैसी गंभीर समस्या हो गई. डॉक्टरों ने पढ़ाई से परहेज की सलाह दी, लेकिन हालात ऐसे थे कि पढ़ाई छोड़ना उसके लिए विकल्प ही नहीं था. दर्द सहते हुए भी उसने तैयारी जारी रखी.

चार अटेम्प्ट, हर बार बेहतर प्रदर्शन-
गोरधनराम की सफलता एक दिन की कहानी नहीं है, बल्कि लगातार संघर्ष की दास्तान है. उसने 4 अटेम्प्ट दिए. सबके बेहतर प्रदर्शन किया.

  • 2022: पहली बार नीट दिया, 328 अंक
  • 2023: सेल्फ स्टडी के साथ 465 अंक
  • 2024: कोटा आकर एलन में पढ़ाई, 600 अंक
  • 2025: 575 अंक, एम्स देवघर में चयन

उसकी प्रतिभा और पारिवारिक परिस्थितियों को देखते हुए एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट ने दो साल की पूरी फीस माफ कर दी, जिसने उसकी राह आसान की.

भाइयों ने भी किया कमाल-
गोरधनराम का दूसरा बड़ा भाई मानाराम आरएएस प्री क्लियर कर चुका है और मेन्स की तैयारी कर रहा है, जबकि तीसरा भाई चैनाराम बीएड के बाद एसआई बनने की तैयारी में जुटा है. यह पूरा परिवार शिक्षा को ही बदलाव का रास्ता मानता है.

निस्वार्थ सेवा करना चाहता हूं- गोरधनराम
गोरधनराम लोगों की निस्वार्थ सेवा करना चाहते हैं. उनका कहना है कि कोटा कोचिंग ने मेरी जिंदगी बदल दी. जहां उम्मीदें बहुत कम थीं, वहां मुझे आत्मविश्वास और दिशा मिली. मेरा सपना है कि एक अच्छा डॉक्टर बनकर अपने ज्ञान और सेवा भाव से लोगों की मदद कर सकूं.
एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट के निदेशक नवीन माहेश्वरी कहते हैं कि हमारा लक्ष्य है कि पैसों के अभाव में कोई प्रतिभाशाली विद्यार्थी पढ़ाई से वंचित न रहे. गोरधनराम जैसे छात्र पूरे समाज के लिए प्रेरणा हैं, यही असली सामाजिक बदलाव है.

(चेतन गुर्जर की रिपोर्ट)

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