भट्ठे की मिट्टी में सने हाथों में थमाई कलम, स्कूल के बाद इन 25 मासूमों का भविष्य संवारने पहुंच जाती हैं सुमन मैडम

शिक्षा पर सबका हक है. इस बात को संकल्प बना कर हरियाणा की ये शिक्षिका उन बच्चों में शिक्षा बाट रही है, जो खाने-खाने तक को मजबूर हैं. प्राध्यापक सुमन मलिक की अनूठी और प्रेरणादायक पहल के कारण ईंट भट्ठे के 25 गरीब बच्चों शिक्षा से जुड़ पाए हैं. वह न सिर्फ बच्चों को अक्षर ज्ञान और कॉपियां-पेंसिल देती हैं, बल्कि रोज अपने घर से इन बच्चों के लिए 12 टिफिन खाना भी पैक करके लाती हैं.

Hisaar Teacher Suman Malik
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 09 जून 2026,
  • अपडेटेड 9:48 AM IST

हरियाणा के हिसार की महिला सुमन मलिक एक अनूठे अभियान के तहत ईंट भट्टों पर काम करने वाले मजदूरों के बच्चों में शिक्षा की ज्योत जलाने का काम कर रही हैं. इस महिला की खासियत यह है कि वह आठ विषयों में एमए पास हैं और उन्होंने 12 एमए करने का लक्ष्य बनाया है, जिसके लिए वह हर साल खुद भी परीक्षा देती हैं. वह पेशे से सीनियर सेकेंडरी स्कूल में प्राध्यापक के पद पर कार्यरत हैं और आज भी बिना किसी झिझक के अपने पति के साथ खेती में काम कर लेती हैं. पिछले सात महीनों से सरसौद-बालक गांव के रास्ते पर स्थित एक ईंट भट्ठे के पास वह 25 बच्चों की तकदीर संवारने का काम कर रही हैं.

वह अपनी स्कूल की ड्यूटी के बाद समय निकालकर बच्चों को पढ़ाने जाती हैं. इतना ही नहीं, इन बच्चों के लिए 12 टिफिन पैक करके अपने घर से खाना भी लाती हैं और उन्हें खिलाती हैं. वह छोटे बच्चों को पढ़ाती हैं और मजदूर परिवारों के बच्चों का भविष्य बनाने के लिए अनूठी पहल कर रही हैं. इसके साथ ही सरकारी स्कूल में बच्चों को स्कूली शिक्षा के अलावा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी करवाती हैं, ताकि बच्चे पढ़-लिखकर आगे बढ़ सकें.

किस प्रकार बच्चों को पढ़ाती हैं 
सुमन मलिक ने बताया कि एक दिन वह बस में सफर कर रही थीं. इसी दौरान ईंट भट्ठे पर काम करने वाला एक परिवार बस में सवार हुआ. जिस स्टेशन पर उस परिवार को उतरना था, वहां वे उतर नहीं पाए. इस पर बस चालक ने उस परिवार और उनके बच्चों को भला-बुरा कहना शुरू कर दिया. बाद में कंडक्टर ने भी उन्हें रास्ते में उतार दिया. यह देखकर सुमन ने महसूस किया कि इन परिवारों के बच्चों को शिक्षा की सबसे ज्यादा जरूरत है. तभी से उन्होंने सरसौद-बिचपड़ी के एक भट्ठे पर बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया.

शुरुआत में मजदूरों ने कहा कि वे अपने बच्चों को नहीं पढ़ाना चाहते, लेकिन सुमन ने अपने प्रयास जारी रखे. पहले वह बरवाला से बच्चों के लिए टिफिन खरीदकर लाती थीं और बाद में अपने घर से खाना बनाकर लाने लगीं. वह स्कूल की ड्यूटी के बाद रोजाना बच्चों को पढ़ाती हैं, उनके लिए कॉपी-पेंसिल लेकर आती हैं और उन्हें अक्षर ज्ञान सिखाती हैं. उनका सपना है कि ये बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ें और शिक्षा के बल पर अपने सपनों को पूरा करें. वर्तमान में वह लगभग 25 बच्चों को पढ़ा रही हैं.

गर्मियों में भी नहीं रुकता सुमन का कारवां
तेज गर्मियों में भी सुमन का यह कारवां नहीं रुकता. स्कूल की छुट्टी के बाद वह रोज एक से डेढ़ घंटा इन बच्चों को देती हैं. अब डीपीसी कार्यालय से एपीसी सुधीर वर्मा ने भी इस जगह का दौरा किया है और उनकी इस पहल को देखते हुए बच्चों को पढ़ाने के लिए एक कमरे की व्यवस्था करवाई है. 

सुमन बताती हैं कि वह रोज सुबह 4 बजे उठती हैं. घर के सारे काम निपटाने के साथ-साथ भट्ठा मजदूरों के बच्चों के लिए खाना भी बनाती हैं. वह रोज 12 टिफिन पैक करके लाती हैं ताकि पढ़ाई के साथ बच्चों को पोषण भी मिल सके और वे खुशी-खुशी सीख सकें.

लोग भी मदद के लिए आगे आए
सुमन मलिक लगातार बच्चों को पढ़ा रही हैं. ऐसे में कई लोग उनकी मदद के लिए आगे आए हैं. सुमन के अनुसार सुधीर वर्मा, सुनीता, मयंक वर्मा सहित कई लोग बच्चों के लिए बैग, कॉपी, पेंसिल और अन्य शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध करवाते हैं. सुमन ने बताया कि उनके पति सुभाष सहारण और परिवार के सभी सदस्य उनके इस कार्य की सराहना करते हैं और बच्चों को पढ़ाने में पूरा सहयोग देते हैं.

प्राध्यापक के पद पर कार्यरत हैं सुमन
सुमन हांसी के उमरा गांव की रहने वाली हैं. उनके परिवार में तीन बहनें और एक भाई हैं. सुमन का विवाह 17 वर्ष की उम्र में हो गया था. उनके पति खेड़ड़ गांव में खेती का काम करते हैं. विवाह के बाद उन्होंने अपने पति के साथ खेती में भी हाथ बंटाया. इसके साथ ही उन्होंने बीए और एमए की पढ़ाई पूरी की तथा आंगनवाड़ी में नौकरी शुरू की. लगातार पढ़ाई जारी रखने के बाद उन्हें हरियाणा के एक सीनियर सेकेंडरी स्कूल में नौकरी मिली. उन्होंने 2011 में एचटेट पास किया और 2024 में नौकरी जॉइन की. उनका बेटा अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है.

सुमन मलिक का लक्ष्य
सुमन मलिक ने बताया कि बीए करने के बाद से उन्होंने पढ़ाई कभी नहीं छोड़ी. उन्होंने कहीं पढ़ा था कि हिसार के एक व्यक्ति ने अपने जीवन में कई डिग्रियां हासिल की हैं. तभी उन्होंने भी निश्चय किया कि वह 12 एमए की डिग्री हासिल करेंगी. अब तक वह इतिहास, राजनीति विज्ञान, मनोविज्ञान, अर्थशास्त्र, अंग्रेजी, हिंदी और शिक्षा सहित कुल आठ विषयों में एमए कर चुकी हैं और 12 एमए का लक्ष्य पूरा करने के लिए लगातार पढ़ाई कर रही हैं.
(रिपोर्ट- प्रवीण कुमार)

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