चूल्हा-चौका छोड़ हाथों में थामा ड्रोन... बनी पहली ड्रोन पायलट... स्प्रे करके आज कमा रही हैं 350 रुपए प्रति एकड़

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नमो ड्रोन दीदी नाम मिलने के बाद करनाल की पहली महिला ड्रोन दीदी सीता का जीवन भी बदल गया, करनाल के कतलेहड़ी गांव की महिला सीता देवी ने ड्रोन पायलट बनी और जिसके बाद अब देश भर में उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बना ली है.

karnal drone didi seeta devi
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 03 जून 2026,
  • अपडेटेड 7:39 PM IST

करनाल के ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाली नमो ड्रोन दीदी, ड्रोन पायलट सीता, आज की नारी पुरुषों से किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है. ऐसा ही कुछ कर दिखाया है ड्रोन दीदी ने. ड्रोन दीदी खुद किसानों के खेतों में जाकर स्प्रे कर न सिर्फ आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि ड्रोन सीखने के बाद उन्होंने देशभर में अपनी एक अलग पहचान बना ली है. ड्रोन दीदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से भी मुलाकात कर चुकी हैं. सभी नेताओं ने उनकी जमकर सराहना की है. आइए आपको भी मिलवाते हैं ड्रोन दीदी सीता से, जिनसे प्रेरित होकर अब ग्रामीण क्षेत्रों की कई महिलाएं ड्रोन सीख रही हैं. 

फ्री ट्रेनिंग और ड्रोन ने बदली जिंदगी
महिला को गुरुग्राम के ट्रेनिंग सेंटर में 15 दिन की फ्री ट्रेनिंग दी गई. ट्रेनिंग पूरी होने के बाद उन्हें इफको की तरफ से एक ड्रोन और एक ऑटो भी दिया गया. अब वह किसानों के खेतों में जाकर खुद स्प्रे करती हैं और उन्हें 350 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से भुगतान मिलता है. ड्रोन पायलट के क्षेत्र में महिलाएं अपना करियर बना सकती हैं और अच्छी आय भी अर्जित कर सकती हैं. इसी सोच के साथ लखपति दीदी योजना की शुरुआत की गई थी. उनका कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में केंद्र सरकार ने महिलाओं के लिए कई ऐसी योजनाएं शुरू की हैं जो उनके लिए बेहद लाभकारी साबित हो रही हैं. उन्होंने महिलाओं से भी इन योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की है.

ग्रामीण आजीविका मिशन से ड्रोन पायलट बनने तक का सफर
ड्रोन दीदी सीता ने बताया कि पहले वह ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी हुई थीं. इसी दौरान उन्हें पता चला कि सरकार महिलाओं को फ्री में ड्रोन उड़ाने की ट्रेनिंग दे रही है और ट्रेनिंग पूरी होने के बाद ड्रोन भी उपलब्ध कराया जाएगा. इसके बाद उन्होंने पासपोर्ट के लिए आवेदन किया और तत्काल प्रक्रिया के तहत पासपोर्ट बनवाया. इंटरव्यू में सफल होने के बाद उन्हें 15 दिन की ट्रेनिंग के लिए गुरुग्राम भेजा गया, जहां उन्होंने ड्रोन पायलट बनने का प्रशिक्षण हासिल किया. उन्होंने कहा कि इसके लिए वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री का विशेष धन्यवाद करना चाहती हैं, जिन्होंने 'नमो ड्रोन दीदी' जैसी पहल के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाया और उन्हें घर से बाहर निकलकर आगे बढ़ने का अवसर दिया.

मुश्किलों के बावजूद नहीं छोड़ा हौसला
ड्रोन दीदी ने बताया कि शुरुआत में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा. बच्चों को छोड़कर 15 दिन के लिए ट्रेनिंग लेने जाना आसान नहीं था, लेकिन उनके पति ने पूरा सहयोग दिया और उन्हें गुरुग्राम भेजा. काफी मेहनत और संघर्ष के बाद उन्होंने प्रशिक्षण पूरा किया. ड्रोन सीखने के बाद उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया. इसी वजह से उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय कृषि मंत्री समेत कई मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्रियों से मिलने का अवसर भी मिला. सभी ने उनका हौसला बढ़ाया.

आज खुद कमा रही हैं, दूसरों को भी दे रही हैं प्रेरणा
सीता का कहना है कि ड्रोन सीखने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है. अब वह अपनी आजीविका खुद चला रही हैं और परिवार का गुजारा भी पहले से बेहतर तरीके से हो रहा है. खेतों में स्प्रे करने के लिए उन्हें 350 रुपये प्रति एकड़ मिलते हैं. वह अन्य महिलाओं को भी गुरुग्राम जाकर ड्रोन प्रशिक्षण लेने की सलाह देती हैं. उनकी प्रेरणा से कई महिलाएं अब ट्रेनिंग लेकर खेतों में ड्रोन उड़ाती नजर आ रही हैं.

देशभर की महिलाओं को दिया खास संदेश
ड्रोन दीदी सीता अन्य महिलाओं से अपील करते हुए कहती हैं कि जब सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के इतने अवसर दे रही है, तो उनका लाभ जरूर उठाना चाहिए. उन्होंने कहा कि उनके परिवार में पति-पत्नी और दो बच्चे हैं. आज घर का गुजारा पहले से कहीं बेहतर तरीके से हो रहा है. बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं और परिवार का पूरा सहयोग उन्हें मिल रहा है. सीता का मानना है कि महिलाओं को घरों से बाहर निकलकर अपने पैरों पर खड़ा होना चाहिए और अपनी आजीविका शुरू करनी चाहिए. उन्होंने देशभर की महिलाओं के नाम संदेश देते हुए कहा कि अगर अवसर मिले तो उसे अपनाने में कभी पीछे नहीं हटना चाहिए.

(रिपोर्ट- कमलदीप)

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