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St. Stephen's को मिली पहली महिला प्रिंसिपल.. जानें कौन हैं प्रोफेसर Susan Elias

सुसान एलियास प्रोफेसर और अकादमिक प्रशासक हैं जिन्हें सेंट स्टीफंस कॉलेज, दिल्ली यूनिवर्सिटी की 14वीं प्रिंसिपल और संस्थान के 145 साल के इतिहास की पहली महिला प्रिंसिपल के रूप में नियुक्त किया गया है.

St Stephen’s College first woman principal St Stephen’s College first woman principal

1881 में स्थापित हुआ दिल्ली यूनिवर्सिटी का सेंट स्टीफंस कॉलेज देश के सबसे पुराने और पॉपुलर कॉलेजों में शामिल है. अब तक इस  कॉलेज में कभी किसी महिला को प्रिंसिपल नहीं बनाया गया था. ऐसे में प्रोफेसर सुसान एलियास बतौर प्रिंसिपल अपॉइंट करना एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है. सुसान एलियास कॉलेज की 14वीं प्रिंसिपल होंगी. वे एक्स प्रिंसिपल जॉन वर्गीज की जगह लेंगी, जिनका टेन्योर इसी साल समाप्त हुआ है. 

दिल्ली यूनिवर्सिटी ने क्यों जताई आपत्ति?
सुसान एलियास को अपॉइंट करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी ने उनके अपॉइंटमेंट प्रोसेस पर सवाल उठाए हैं. यूनिवर्सिटी का कहना है कि प्रिंसिपल चयन समिति में यूजीसी के नियमों के अनुसार विश्वविद्यालय की ओर से नामित विशेषज्ञ और कुलपति के प्रतिनिधि शामिल होने चाहिए थे. दिल्ली यूनिवर्सिटी ने कॉलेज को नियुक्ति प्रक्रिया आगे न बढ़ाने की सलाह दी है और इस मामले में यूजीसी से भी हस्तक्षेप की मांग की है. यूनिवर्सिटी का कहना है कि चयन प्रक्रिया तय नियमों के अनुरूप नहीं हुई.

माइनॉरिटी स्टेटस की बात
सेंट स्टीफंस कॉलेज ने अपनी प्रक्रिया का बचाव किया है. कॉलेज का कहना है कि वह संविधान के आर्टिकल 30(1) के तहत एक अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान है, इसलिए उसे प्रशासनिक और नियुक्ति संबंधी मामलों में विशेष स्वायत्तता प्राप्त है. कॉलेज से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि तमाम विवादों के बावजूद सुसान एलियास तय समय पर अपना कार्यभार संभालेंगी.

कौन हैं प्रोफेसर सुसान एलियास?
सेंट स्टीफंस कॉलेज के 145 साल के इतिहास में पहली बार किसी महिला को प्रिंसिपल बनाया गया है. प्रोफेसर सुसान एलियास कॉलेज की 14वीं प्रिंसिपल बनी हैं. उनकी नियुक्ति को कॉलेज के इतिहास में ऐतिहासिक बदलाव माना जा रहा है. वह कंप्यूटर साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की एक्सपर्ट हैं. उन्हें शिक्षा क्षेत्र में 30 साल से ज्यादा का अनुभव है. सुसान एलियास पहले चंडीगढ यूनिवर्सिटी  और वीआईटी चेन्नी जैसे संस्थानों में अहम जिम्मेदारियां संभाल चुकी हैं. उनकी नियुक्ति को शिक्षा संस्थानों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी के रूप में देखा जा रहा है.