अब पानी-केमिकल नहीं 'आवाज' से बुझेगी आग! छात्रों का जुगाड़ बना फ्यूचर का स्मार्ट फायर फाइटर

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला के राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज सुंदरनगर के प्रक्षिशुओं ने एक ऐसा डिवाइस तैयार है जो चंद सेकंडों में आवाज के सहारे ही ऑटोमेटिक तरीके से आग बुझाने पर समक्ष है.

automatic fire extinguisher
gnttv.com
  • मंडी,
  • 02 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 4:06 PM IST

अक्सर हम देखते हैं कि जब आग भंयकर रूप धारण कर लेती है तो उसे बुझाना नामुमकिन सा हो जाता है. दुनिया भर में ऐसी घटनाओं पर नजर दौड़ाएं तो इससे जहां लाखों मासूम जिंदगियां तबाह हो जाती हैं, वहीं अरबों रुपये की संपदा भी राख हो जाती है. चंद सेंकडों में ही सबकुछ तबाह करने वाली इस आग के आगे कई बार वैज्ञानियों द्वारा करोड़ों रूपये की लागत से बनाने गए यंत्र भी विफल साबित हो जाते है. लेकिन हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला के राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज सुंदरनगर के प्रक्षिशुओं ने एक ऐसा डिवाइस तैयार है जो चंद सेकंडों में आवाज के सहारे ही ऑटोमेटिक तरीके से आग बुझाने पर समक्ष है.

दरअसल, कॉलेज के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के अंतिम वर्ष के प्रक्षिशुओं ने यह यंत्र तैयार किया है जिसका नाम सोनिक वेव फायर एक्सटिंग्विशर रखा गया है. इन प्रशिक्षुओं का दावा है कि यह डिवाइस बिना पानी, झाग और बिना किसी रसायन के मात्र ध्वनि तरंगों के प्रहार से आग को पल भर में बुझाने में सहायक है. इन प्रशिक्षुओं का यह कहना है कि उनके द्वारा बनाया गया यह यंत्र बाजार में मिलने वाले फायर अग्निशमन यंत्रों से काफी सस्ता होने वाला है.

7 से 8 हजार रुपये है लागत
उन्होंने विशिष्ट कोड और डिजाइन के आधार पर उन्होंने इस डिवाइस को स्वचालित बनाने की दिशा में बड़ी सफलता हासिल कर ली है. प्रोजेक्ट लीडर व प्रक्षिशु राज सिंह ने बताया कि सोनिक वेव फायर एक्सटिंग्विशर डिवाइस उन्होंने माइक्रो-कंट्रोलर का उपयोग किया गया है. साथ ही इस यंत्र में उनके द्वारा फीड किए गए विशेष सेंसर कोड की मदद से फ्रीक्वेंसी की ध्वनि उत्पन्न होती है, जिससे आग बुझ जाती है. उनकी यह डिवाइस पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल है. उन्होंने दावा किया कि इस डिवाइस के निमार्ण में किसी भी तरह का केमिकल इस्तेमाल नहीं किया है. इसकी लागत भी मात्र 7 से 8 हजार रुपये के बीच रहने वाली है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे बार-बार रिफिल नहीं करना पड़ता और कम वजन होने के कारण इसे पहाड़ों या जंगलों में लगी आग बुझाने के लिए भी आसानी से ले जाया जा सकता है.

कॉलेज करेगा आर्थिक मदद
विभागाध्यक्ष राजेश चौधरी ने कहा कि विभाग की ओर से इस प्रोजेक्ट को बनाने में इन प्रक्षिशु छात्रों की सहायता की जा रही है. उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि इस शोध कार्य में आगे जो भी आर्थिक सहायता की आवश्यकता होगी, उसे कॉलेज के स्टूडेंट वेलफेयर फंड के माध्यम से पूरा किया जाएगा.  संस्थान का लक्ष्य इस नवाचार को एक सफल व्यावसायिक मॉडल के रूप में विकसित करना है, ताकि इसे समाज के व्यापक हित में उपयोग किया जा सके.

कुछ ही सेकंड में आग पर काबू
वहीं, प्रोजेक्ट के मार्गदर्शक अवनीश पॉल ने इस प्रोजेक्ट उनकी टीम ने सोशल मीडिया पर भी पोस्ट किया है, जिसे अभी तक करोड़ों लोग देख चुके हैं. इसकी लोकप्रियता को देखते हुए देश के बड़े संस्थान उनसे संपर्क साध जा रहे है. साथ ही वन विभाग के अधिकारियों ने भी इस प्रोजेक्ट में गहरी रुचि दिखाई है. क्योंकि वर्तमान में जंगलों की आग बुझाने के लिए कोई प्रभावी और पोर्टेबल उपकरण उपलब्ध नहीं है. पेटेंट के संदर्भ में उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्ष 2015 में एक विदेशी विश्वविद्यालय ने मैनुअल सोनिक एक्सटिंग्विशर का पेटेंट लिया है, लेकिन वे ऑटोमैटिक सोनिक फायर एक्सटिंग्विशर के लिए पेटेंट फाइल करने की दिशा में काम कर रहे हैं. उनका यह डिवाइस सेंसरों की सहायता से स्वतः आग की पहचान कर कुछ ही सेकंड में आग पर काबू पाने में सक्षम है.

बता दें कि, छात्रों द्वारा बनाया गया है यह डिवाइस यदि भविष्य में कामयाब होता है तो सरकारी संस्थान के डिप्लोमा धारकों की यह सबसे बड़ी उपलब्धि होगी. क्योंकि अब तक इस तरह के उन्नत शोध केवल चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय कंपनियों और उच्च शिक्षण संस्थानों तक ही सीमित रहे हैं.  इस तकनीक की सबसे बड़ी खूबी इसका स्वदेशी होना व ऑटोमेटिक सिस्टम है. जो आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भी सफल कदम साबित हो सकता है.

(रिपोर्टर: धरम वीर)

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