बिहार के गोपालगंज की शिक्षिका पुष्पा प्रसाद ने सरकारी स्कूल में शिक्षा को लेकर ऐसा काम किया है, जो दूसरे शिक्षकों के लिए भी मिसाल बन गया है. राजकीय कन्या मध्य विद्यालय, कुचायकोट की शिक्षिका पुष्पा प्रसाद का चयन राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए किया गया है. उनका नाम देशभर से चुने गए 48 स्कूली शिक्षकों में शामिल है.
शिक्षिका पुष्पा प्रसाद बताती है कि जैसे ही मेरा नाम आया मैं शब्दों में बयान नही कर सकती. यह एक स्वर्णिम पल है, जो मुझे मिलने जा रहा है, ये मेरे पूरे बिहार के लिए है. उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में बहुत सारी चुनौतियों का सामना किया है, क्योंकि लोगों की मानसिकता होती है कि ग्रामीण परिवेश के बच्चें कुछ नहीं कर सकते हैं, लेकिन मेरा मानना है कि ऐसा क्यों? आखिर ऐसा क्यों सोचा जा रहा है?
समावेशी शिक्षा को भी पुष्पा प्रसाद ने अपने काम का हिस्सा बनाया. विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए ब्रेल लिपि में शिक्षण सामग्री तैयार की गई. अतिरिक्त सहयोग की जरूरत वाले बच्चों पर अलग से ध्यान दिया गया, ताकि वे नियमित रूप से स्कूल आएं और पढ़ाई में रुचि बनाए रखें. ऐसे में राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए पुष्पा प्रसाद का चयन यह बताता है कि सीमित संसाधनों वाले सरकारी स्कूल में भी नवाचार, संवेदनशीलता और निरंतर प्रयास से बच्चों की शिक्षा में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है.
पुष्पा प्रसाद को उनके काम के लिए इससे पहले भी राज्य और जिला स्तर पर सम्मान मिल चुका है. उन्हें राजकीय शिक्षक सम्मान-2024, ‘टीचर ऑफ द मंथ’, निपुण शिक्षक सम्मान और जिला स्तर पर उत्कृष्ट सेवा सम्मान मिल चुका है. बिहार दिवस 2026 के ‘अप्पन बिहार, निपुण बिहार’ स्टॉल में बेहतर प्रदर्शन के लिए भी उन्हें प्रशस्ति-पत्र मिल चुका है.
गोपालगंज की शिक्षिका पुष्पा प्रसाद को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के रूप में बड़ी पहचान मिलने जा रही है. देशभर से चयनित शिक्षकों के साथ पुष्पा प्रसाद को भी 5 सितंबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के द्वारा सम्मानित किया जाएगा.