Advertisement

गायों को नहलाने से निकला गंदा पानी अब नहीं होगा बर्बाद, सहारनपुर की गौशाला ने पौधों से शुरू किया अनोखा जल संरक्षण प्रयोग

सहारनपुर की मां शाकंभरी कान्हा गौशाला में पानी बचाने की अनोखी पहल शुरू हुई है. यहां जलीय पौधों की मदद से गंदे पानी को साफ कर दोबारा इस्तेमाल किया जा रहा है. 16 केएलडी क्षमता वाले इस प्लांट से पानी की बर्बादी रोकने और गौशाला को आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश की जा रही है.

Saharanpur Gaushala
राहुल कुमार
  • सहारनपुर,
  • 22 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 10:52 AM IST

सहारनपुर में पानी बचाने के लिए नगर निगम की ओर से संचालित मां शाकंभरी कान्हा गौशाला में अनोखी पहल की गई है. यहां गायों की साफ-सफाई और नहलाने के दौरान निकलने वाले गंदे पानी को अब बर्बाद नहीं किया जा रहा है. इसके लिए गौशाला में 16 केएलडी क्षमता का वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाया गया है. खास बात यह है कि इस प्लांट में पानी को साफ करने के लिए मशीनों के बजाय प्राकृतिक तरीके का इस्तेमाल किया जा रहा है. जलीय पौधों की मदद से पानी से अशुद्धियां कम की जाती हैं और फिर इसका दोबारा इस्तेमाल किया जाता है.

547 गोवंश की होती है देखभाल
मां शाकंभरी कान्हा गौशाला में फिलहाल 547 गोवंश संरक्षित हैं. इनकी साफ-सफाई और नहलाने के दौरान काफी मात्रा में पानी निकलता है. पहले इस पानी के बर्बाद होने की संभावना रहती थी, लेकिन अब इसे ट्रीटमेंट प्लांट के जरिए दोबारा उपयोग के लायक बनाया जा रहा है. इससे पानी की बचत के साथ गौशाला में स्वच्छता व्यवस्था को भी बेहतर बनाने में मदद मिल रही है.

11 चैंबर से होकर गुजरता है गंदा पानी
गायों को नहलाने और गौशाला की सफाई से निकलने वाले पानी को 11 अलग-अलग चैंबर से गुजारा जाता है. यहां फाइटो रेमेडिएशन तकनीक का इस्तेमाल होता है. इस प्रक्रिया में जलीय पौधों की जड़ें पानी में मौजूद अतिरिक्त पोषक तत्व और अशुद्धियों को कम करने में मदद करती हैं. इसके लिए पिस्टिया यानी वॉटर लेट्यूस जैसे तैरने वाले पौधे लगाए गए हैं. ये पौधे पानी में मौजूद अतिरिक्त नाइट्रोजन और फास्फोरस को सोखने में मदद करते हैं.

टॉयलेट फ्लश में हो रहा पानी का इस्तेमाल
नगर निगम के पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी संदीप मिश्रा के मुताबिक, गौशाला में गोबर और गोमूत्र को भी अलग-अलग तरीकों से उपयोग में लाया जा रहा है. इसी कड़ी में सफाई से निकलने वाले पानी को भी रीसायकल किया जा रहा है. ट्रीटमेंट के बाद तैयार पानी का इस्तेमाल फिलहाल गौशाला के टॉयलेट फ्लश में किया जा रहा है.

जल संरक्षण की दिशा में अनोखी पहल
गौशाला प्रशासन का लक्ष्य पानी की हर बूंद का बेहतर इस्तेमाल करना है. प्राकृतिक पौधों के जरिए पानी साफ करने का यह प्रयोग न केवल पानी की बर्बादी रोक रहा है, बल्कि गौशाला को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी मदद कर रहा है. जल संरक्षण पर बढ़ते जोर के बीच सहारनपुर की यह पहल स्थानीय स्तर पर पर्यावरण और पानी बचाने का एक अच्छा उदाहरण बन रही है.

ये भी पढ़ें: 

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Advertisement