Advertisement

कामकाजी माताओं को बड़ी राहत! टिहरी में 'पालना' संभाल रहा नौनिहालों की देखभाल, 15 केंद्रों का मिल रहा लाभ

कामकाजी और श्रमिक माताओं की सुविधा के लिए टिहरी में 15 क्रेच आंगनवाड़ी 'पालना' केंद्र संचालित किए जा रहे हैं. यहां 7 माह से 3 वर्ष तक के बच्चों को सुरक्षित वातावरण, पौष्टिक आहार, स्वच्छता और खेल-गतिविधियों की सुविधा मिल रही है.

Tehri Launches 15 Creche Anganwadi
पंकज भट्ट
  • टिहरी ,
  • 07 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 8:44 PM IST

टिहरी जनपद में कामकाजी और श्रमिक महिलाओं के लिए छोटे बच्चों की देखभाल अब पहले जैसी बड़ी परेशानी नहीं रही है. रोजगार और आजीविका के लिए घर से बाहर निकलने वाली माताओं के बच्चों की सुरक्षा और देखभाल के लिए जिले में संचालित क्रेच आंगनवाड़ी 'पालना' केंद्र मददगार साबित हो रहे हैं. इन केंद्रों में माताएं अपने छोटे बच्चों को सुरक्षित छोड़कर बिना किसी चिंता के अपने काम पर जा पा रही हैं.

मुख्यमंत्री की पहल के तहत बाल विकास विभाग की ओर से टिहरी जिले में फिलहाल 15 क्रेच आंगनवाड़ी 'पालना' केंद्र संचालित किए जा रहे हैं. विभाग का उद्देश्य इन केंद्रों की संख्या बढ़ाकर अधिक से अधिक कामकाजी और श्रमिक महिलाओं को सुविधा उपलब्ध कराना है.

7 माह से 3 साल तक के बच्चों की देखभाल
'पालना' केंद्रों में 7 माह से 3 वर्ष तक की उम्र के बच्चों की देखभाल की जाती है. यहां बच्चों को उनकी उम्र और जरूरत के अनुसार पौष्टिक आहार दिया जाता है. इसके साथ ही साफ-सफाई, आराम और सुरक्षित माहौल का भी विशेष ध्यान रखा जाता है. बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए खेल-खेल में सीखने की गतिविधियां भी कराई जाती हैं. केंद्रों पर बच्चों को कहानी और कविता सुनाने, चित्र पहचानने, खिलौनों के साथ गतिविधियां करने और आपस में बातचीत करने जैसे अवसर दिए जाते हैं. इससे बच्चों को सीखने के साथ सामाजिक व्यवहार विकसित करने में भी मदद मिलती है.

माताओं को रोजगार से जुड़े रहने में मदद
'पालना' केंद्रों में बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण पर भी नियमित नजर रखी जाती है. बच्चों को घर जैसा स्नेह और सुरक्षित वातावरण मिलने से माताएं भी अपने काम पर ध्यान दे पा रही हैं. खासतौर पर श्रमिक और रोजाना काम करने वाली महिलाओं के लिए यह सुविधा काफी उपयोगी साबित हो रही है. जिला कार्यक्रम अधिकारी बाल विकास संजय गौरव ने बताया कि जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल के निर्देशानुसार जिले में 15 क्रेच केंद्र शुरू किए गए हैं. इनका मुख्य उद्देश्य कामकाजी और श्रमिक महिलाओं के छोटे बच्चों को सुरक्षित देखभाल उपलब्ध कराना है. उन्होंने बताया कि भविष्य में इन केंद्रों की संख्या बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा परिवारों को इसका लाभ मिल सके.

ये भी पढ़ें: 

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Advertisement