तेलंगाना के गांव में बेटियों के जन्म पर दिए जा रहे हैं 10 हजार रुपये, अच्छे से होगी परवरिश

सरपंच ने कहा कि एक बार जब वह बेटी 18 साल पूरी कर लेती है, तो ये जमा राशि बढ़ जाएगी, तब तक यह 1 लाख रुपये तक हो जाएगी. इसका इस्तेमाल उसकी आगे की पढ़ाई या शादी के लिए किया जा सकता है.

प्रतीकात्मक तस्वीर
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 19 नवंबर 2021,
  • अपडेटेड 12:24 PM IST
  • गांव सरपंच का कहना है ये पैसा बेटियों की पढ़ाई और शादी पर खर्च किया जा सकेगा
  • सरपंच ने अपने गांव में बेटियों के जन्म पर 10 हजार रुपये देने का वादा किया है
  • सुकन्या समृद्धि योजना 2015 में शुरू की गयी थी

तेलंगाना के मरियापुरम गांव में बेटी के जन्म पर 10 हजार रुपये देने की घोषणा की गयी है. जी हां, वरंगल जिले के गीसुकोंडा ग्राम पंचायत के सरपंच ने अपने गांव में बेटियों के जन्म पर 10 हजार रुपये देने का वादा किया है. गांव सरपंच का कहना है ये पैसा बेटियों की पढ़ाई और शादी पर खर्च किया जा सकेगा. इससं माता-पिता को बेटियों के लालन-पालन में आसानी होगी और बेहतर तरीके से उनकी परवरिश हो पाएगी.

ये राशि आएगी बच्चियों की पढ़ाई काम

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, गांव के सरपंच अल्लम बाल रेड्डी ने बताया कि यह एक छोटी बचत योजना के जैसी होगी, जो बच्चियों को आगे जाकर मदद करेगी. सरपंच ने कहा, “मैं नवजात बेटियों के नाम पर 10,000 रुपये जमा करने जा रहा हूं. एक बार जब वह 18 साल पूरी कर लेती है, तो ये जमा राशि बढ़ जाएगी, तब तक यह 1 लाख रुपये तक हो जाएगी. इसका इस्तेमाल उसकी आगे की पढ़ाई या शादी के लिए किया जा सकता है."

उन्होंने आगे कहा कि सुकन्या समृद्धि योजना बालिकाओं के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही योजना है. यह एक तरह से छोटी बचत योजना है. सुकन्या समृद्धि खाते की अवधि 21 साल या 18 साल की आयु के बाद लड़की की शादी होने तक होती है. हालांकि बीपीएल श्रेणी के तहत परिवारों को 10,000 रुपये जमा करने में मुश्किल होती है. इसलिए मैं यह योजना लेकर आया हूं.

क्या है सुकन्या समृद्धि योजना? 

दरअसल, सरकार द्वारा चलाई जा रही सुकन्या समृद्धि योजना 2015 में शुरू की गयी थी. यह माता-पिता को बच्चियों की पढ़ाई और शादी पर खर्च के लिए निवेश करने और पैसे बनाने के लिए एक योजना है.  इसमें पहले माता-पिता को 250 रुपये का निवेश करना होता है और उसके बाद 150 रुपये के गुणकों में निवेश करना होता है, जिससे सालाना निवेश मिलाकर 1.5 लाख रुपये हो जाता है. यह प्रक्रिया अगले 15 साल तक जारी रहती है, जिसके बाद इसे निकाला जा सकता है.

लेकिन, कई बार माता-पिता ये निवेश करने में सक्षम नहीं होते हैं, या वे आर्थिक रूप से इतने भी संपन्न नहीं होते हैं कि वह हर महीने ये राशि जमा कर पाएं. ऐसे में सरपंच द्वारा दी जाने वाली राशि को एक ही बार में निवेश किया जा सकेगा, जिससे बेटियों की पढ़ाई और शादी में यह पैसा खर्च किया जा सकेगा. 

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