डेंगू दुनिया में तेजी से फैलने वाली बीमारियों में से एक है. हर साल लाखों लोग इससे संक्रमित होते हैं. WHO के मुताबिक पिछले कुछ दशकों में डेंगू के मामले तेजी से बढ़े हैं और आज दुनिया की लगभग आधी आबादी इसके खतरे में है. ऐसे में वैज्ञानिक लगातार इस बीमारी से बचाव के नए इलाज और वैक्सीन खोजने में जुटे हैं.
ऊंट की एंटीबॉडी से डेंगू का इलाज
इसी बीच भारत के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (IISER) मोहाली के वैज्ञानिकों ने डेंगू से लड़ने का एक अनोखा तरीका खोजा है. उनकी रिसर्च के मुताबिक ऊंट के शरीर में बनने वाले खास तरह के एंटीबॉडी, जिन्हें नैनोबॉडी कहा जाता है, डेंगू वायरस को खत्म करने की क्षमता रखते हैं. भविष्य में इन्हें डेंगू के इलाज या वैक्सीन बनाने में इस्तेमाल किया जा सकता है.
क्या है IISER मोहाली की रिसर्च में
IISER मोहाली में इम्यूनोलॉजिस्ट डॉ. शर्वन सेहरावत की अगुवाई में वैज्ञानिकों की टीम ने ऊंट के इम्यून सिस्टम से बनने वाले नैनोबॉडी पर रिसर्च की. पाया गया कि ये छोटे एंटीबॉडी डेंगू वायरस के खिलाफ प्रभावी हो सकते हैं. खास बात यह है कि ये डेंगू के चारों मुख्य वायरस स्ट्रेन को टारगेट करने की क्षमता रखते हैं.
डेंगू के इलाज और वैक्सीन बनाने में यही सबसे बड़ी चुनौती रही है, क्योंकि एक स्ट्रेन से बचाव होने पर भी दूसरा स्ट्रेन संक्रमण कर सकता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि ऊंट से मिलने वाले ये नैनोबॉडी इस समस्या को हल करने में मदद कर सकते हैं.
ऊंट का एंटीबॉडी क्यों हैं खास
आम तौर पर इंसानों और ज्यादातर जानवरों के शरीर में जो एंटीबॉडी बनते हैं, उनकी संरचना अलग होती है. लेकिन ऊंट और उससे जुड़ी प्रजातियों में एक खास तरह के हेवी-चेन एंटीबॉडी पाई जाती है. इनका सबसे छोटा हिस्सा ही नैनोबॉडी कहलाता है.
इनकी कुछ खास खूबियां होती हैं-
इनका आकार बहुत छोटा होता है
ये शरीर के ऊतकों में आसानी से पहुंच सकते हैं
ज्यादा तापमान और अलग-अलग परिस्थितियों में भी स्थिर रहते हैं
वायरस के ऐसे हिस्सों को भी पकड़ सकते हैं जहां सामान्य एंटीबॉडी नहीं पहुंच पाते
इसी वजह से वैज्ञानिक इन्हें नई दवाओं और वैक्सीन के लिए काफी उपयोगी मान रहे हैं.
डेंगू के लिए बेहतर इलाज की क्यों है जरूरत
डेंगू मुख्य रूप से एडीज एजिप्टी प्रजाति के मच्छर से फैलता है. इसके लक्षण हल्के बुखार से लेकर गंभीर स्थिति तक हो सकते हैं. गंभीर मामलों में मरीज को डेंगू हेमरेजिक फीवर या डेंगू शॉक सिंड्रोम भी हो सकता है, जो जानलेवा साबित हो सकता है.
WHO के अनुसार हर साल दुनिया में लगभग 39 करोड़ लोग डेंगू से संक्रमित होते हैं, इनमें से करीब 10 करोड़ लोगों में लक्षण दिखाई देते हैं. फिलहाल डेंगू का कोई विशेष इलाज नहीं है. इलाज मुख्य रूप से बुखार, पानी की कमी और अन्य लक्षणों को नियंत्रित करने पर आधारित होता है. इसलिए वैज्ञानिक इस वायरस को सीधे रोकने के नए तरीके खोज रहे हैं.
वायरस से लड़ने में मदद कर सकते हैं नैनोबॉडी
वैज्ञानिकों का मानना है कि ऊंट के नैनोबॉडी वायरस के खास प्रोटीन से मजबूती से जुड़ सकते हैं और उसे मानव कोशिकाओं को संक्रमित करने से रोक सकते हैं. पहले की रिसर्च में यह भी पाया गया है कि ऊंट से मिलने वाले नैनोबॉडी कोविड-19 के वायरस SARS-CoV-2 को निष्क्रिय करने में भी मददगार साबित हो सकते हैं. इसी वजह से इन्हें नई पीढ़ी की एंटीवायरल दवाओं के रूप में देखा जा रहा है.
क्या इससे नई वैक्सीन बन सकती है?
IISER मोहाली की यह खोज भविष्य में डेंगू की नई दवा या वैक्सीन बनाने में मदद कर सकती है. हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि यह रिसर्च अभी शुरुआती चरण में है. इसे लोगों के इलाज में इस्तेमाल करने से पहले कई चरणों से गुजरना होगा.