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कोल कंपनी ने जीता दिल... दुर्लभ बीमारी से जूझ रही कर्मचारी की बेटी के लिए दिए 16 करोड़

साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) ने छत्तीसगढ़ में अपने एक कर्मचारी की बेटी के इलाज के लिए 16 करोड़ रुपए का चेक दिया है. SECL, कोल इंडिया की सहयोगी कंपनी है. कंपनी में बतौर ओवरमैन नियुक्त सतीश कुमार रवि की दो साल की बेटी सृष्टि एक दुर्लभ बीमारी से जूझ रही है. 

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gnttv.com
  • नई दिल्ली ,
  • 21 नवंबर 2021,
  • अपडेटेड 10:39 AM IST
  • दिसंबर 2020 में पता चली थी सृष्टि की बीमारी
  • कोल इंडिया की सहयोगी कंपनी है SECL

साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) ने छत्तीसगढ़ में अपने एक कर्मचारी की बेटी के इलाज के लिए 16 करोड़ रुपए का चेक दिया है. SECL, कोल इंडिया की सहयोगी कंपनी है. कंपनी में बतौर ओवरमैन नियुक्त सतीश कुमार रवि की दो साल की बेटी सृष्टि एक दुर्लभ बीमारी से जूझ रही है. 

इस बीमारी के इलाज के लिए सृष्टि को एक खास इंजेक्शन की जरूरत है. बिडंवना यह है कि इंजेक्शन सिर्फ अमेरिका में उपलब्ध है और इसकी कीमत है 16 करोड़ रुपए. लेकिन कंपनी बच्ची के लिए इस इंजेक्शन की ज़िम्मेदारी लेते हुए शुक्रवार को 16 करोड़ रुपए की मंजूरी दी. 

दिसंबर 2020 में पता चली बीमारी: 

बताया जा रहा है कि छत्तीसगगढ़ के दीपका कोयला क्षेत्र में काम करने वाले सतीश को दिसंबर 2020 में पता चला कि उनकी मासूम बच्ची को एक दुर्लभ बीमारी है. जिसका नाम है स्पाइनल मस्क्यूलर एट्रॉफी. इस बीमारी में स्पाइनल कॉर्ड और ब्रेन स्टेम में नर्व सेल की कमी से मांसपेशियां सही तरीके से काम नहीं कर पातीं हैं. 

धीरे-धीरे यह बीमारी बढ़ती है और जानलेवा हो जाती है. सतीश ने पहले वेल्लोर के क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज अस्पताल में लेकर गए थे. वहां उन्हें इस बीमारी का पता चला और डॉक्टरों ने बताया कि इसके इलाज के लिए एक खास इंजेक्शन की जरूरत है. 

वेल्लोर के बाद, सतीश सृष्टि को अपोलो अस्पताल बिलासपुर और एम्स दिल्ली में सृष्टि का इलाज कराया।भी ले जा चुके हैं. फिलहाल बच्ची का इलाज घर पर ही चल रहा है, जहां वह पोर्टेबल वेंटिलेटर पर है. 

कंपनी ने दरियादिली दिखा पेश की मिसाल: 

सतीश और उनके परिवार के लिए किसी भी कीमत पर इतनी बड़ी रकम जुटा पाना संभव नहीं था. वह और उनकी पत्नी दिन-रात अपनी बेटी की चिंता में डूबे हुए थे. लेकिन ऐसे में SECL ने अपने कर्मचारी की मदद करने की ठानी.

SECL के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. सनीश चंद्र का कहना है कि सतीश की समस्या का पता लगने पर कंपनी ने मदद करने का फैसला किया. इसके लिए कोल इंडिया से अनुमति की जरूरत थी और पिछले दिनों कोल इंडिया के चेयरमेन ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर मंजूरी दे दी. 

अब सतीश और उनके परिवार को उम्मीद है कि उनकी बच्ची अपनी ज़िन्दगी जी पाएगी. इस बात में कोई दो राय नहीं है कि SECL कंपनी ने न सिर्फ एक बच्ची की जान बचाई है बल्कि सरकारी-प्राइवेट कंपनियों के लिए एक मिसाल भी पेश की है. 

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