आज के समय में थायराइड की समस्या महिलाओं में तेजी से बढ़ रही है. यह एक हार्मोनल बीमारी है, जो थायराइड ग्रंथि के जरूरत से ज्यादा या कम सक्रिय होने के कारण होती है. खराब जीवनशैली, अनियमित खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी इसकी मुख्य वजह मानी जाती है. कई लोग थायराइड को सिर्फ दवाओं के सहारे कंट्रोल करने की कोशिश करते हैं, लेकिन खानपान और लाइफस्टाइल में बदलाव न करने के कारण उन्हें पूरी तरह फायदा नहीं मिल पाता. विशेषज्ञों के अनुसार अगर सही डाइट और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाई जाए तो थायराइड को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है. ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि थायराइड के मरीजों को क्या खाना चाहिए और किन चीजों से परहेज करना चाहिए.
थायराइड में क्या खाएं
थायराइड के मरीजों को हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन करना चाहिए. सब्जियों की बात करें तो लौकी, तोरी, परवल, कद्दू, गाजर, बीन्स और हरी पत्तेदार सब्जियां शरीर के लिए फायदेमंद मानी जाती हैं. ये सब्जियां पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं और पाचन में भी हल्की होती हैं. फलों में अनार, पपीता, सेब, नाशपाती और अमरूद का सेवन करना अच्छा माना जाता है. ये फल शरीर को जरूरी विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट देते हैं, जिससे शरीर की इम्यूनिटी मजबूत होती है.
इसके अलावा थायराइड के मरीजों को अपने खाने में सही तेल का इस्तेमाल करना चाहिए. देसी घी, नारियल का तेल और सरसों का तेल बेहतर विकल्प माने जाते हैं. दालों में मूंग दाल, मसूर दाल और कुल्थी की दाल को शामिल करना फायदेमंद होता है, क्योंकि ये आसानी से पच जाती हैं और शरीर को पर्याप्त प्रोटीन भी देती हैं.
थायराइड में किन चीजों से करें परहेज
कुछ खाद्य पदार्थ थायराइड की समस्या को बढ़ा सकते हैं, इसलिए उनसे दूरी बनाना जरूरी है. खासकर गांठ वाली सब्जियां और किसी भी तरह की गोभी का ज्यादा सेवन करने से बचने की सलाह दी जाती है. सोयाबीन भी थायराइड के मरीजों के लिए सही नहीं माना जाता, क्योंकि यह पाचन में भारी होता है. फलों में केला, आम, चीकू और अंगूर का सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए. इसके अलावा बार-बार गर्म किया हुआ तेल, मूंगफली का तेल और रिफाइंड तेल भी स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है.
ये चीजें होती हैं फायदेमंद
दालों में राजमा, छोले और सोया चंक्स जैसे भारी खाद्य पदार्थों से भी परहेज करने की सलाह दी जाती है. अगर थायराइड के मरीज संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ दिनचर्या अपनाते हैं, तो इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है.
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