आज के फैशन और ब्यूटी ट्रेंड में साफ़-सुथरे और खूबसूरत नाखूनों की अहम भूमिका है. नेल आर्ट अब सिर्फ सजावट नहीं बल्कि स्टाइल और पर्सनैलिटी को दर्शाने का तरीका बन चुका है. लड़कियां ही नहीं, बल्कि अब कई लोग अपने नाखूनों की खास देखभाल करते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिन नाखूनों को हम सजाते-संवारते हैं, वे असल में किस चीज़ से बने होते हैं और कैसे बढ़ते हैं?
चाहे इंसान हो या जानवर, नाखून स्वभाव से सख्त होते हैं. नाखून कैराटिन नामक एक खास प्रोटीन से बने होते हैं. यह वही प्रोटीन है जो बालों और त्वचा की ऊपरी परत में भी पाया जाता है. नाखून दरअसल मृत कोशिकाओं से बने होते हैं, जो आपस में जमकर एक कठोर संरचना बना लेते हैं. नाखून उंगलियों के ऊपरी सिरे पर मौजूद होते हैं और चोट, संक्रमण व बाहरी नुकसान से उंगलियों की रक्षा करते हैं. लेकिन हाथों के नाखून पैरों के नाखूनों से मुकाबले तेज़ी से क्यों बढ़ते हैं?
हाथ के नाखून पैरों से तेज़ क्यों बढ़ते हैं?
हाथों के नाखून पैरों की तुलना में अधिक तेज़ी से बढ़ते हैं. औसतन हाथों के नाखून लगभग 3 मिमी प्रति माह, जबकि पैरों के नाखून करीब 1.5 से 2 मिमी प्रति माह बढ़ते हैं. इसका मुख्य कारण यह है कि हम हाथों का इस्तेमाल पैरों की तुलना में ज्यादा करते हैं. ज्यादा गतिविधि और बेहतर ब्लड सर्कुलेशन नाखूनों की ग्रोथ को तेज़ कर देता है.
नए नाखून पूरी तरह बढ़ने में कितना समय लगता है?
हाथ और पैरों के नाखूनों को पूरी तरह से दोबारा बढ़ने में लगभग 6 महीने का समय लग सकता है. खासतौर पर अंगूठे का नाखून बाकी उंगलियों की तुलना में धीरे बढ़ता है.
क्या नाखूनों में जान होती है?
अक्सर लोग सोचते हैं कि नाखून काटने पर दर्द क्यों नहीं होता. इसकी वजह यह है कि नाखून डेड सेल्स से बना होता है. नाखून की जड़ को मैट्रिक्स कहा जाता है, जहां नई कोशिकाएं बनती हैं. ये नई कोशिकाएं धीरे-धीरे आगे बढ़ती हैं और पुरानी कोशिकाओं को बाहर की ओर धकेल देती हैं. जैसे-जैसे ये कोशिकाएं आगे आती हैं, वे सख्त होती जाती हैं और नाखून का रूप ले लेती हैं.