'जीरो मैदा' और 'ऑर्गेनिक' के नाम का नहीं चलेगा खेल, 'हेल्दी' लिख देने से प्रोडक्ट हेल्दी नहीं होगा, FSSAI ने कसा शिकंजा

FSSAI ने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के तहत कई फूड बिजनेस ऑपरेटर्स (FBOs) की जांच की. जांच में सामने आया कि कई कंपनियां अपने ब्रांड नाम, ट्रेड नेम और पैकेजिंग पर ऐसे दावे कर रही थीं, जो या तो नियमों के अनुसार मान्य नहीं हैं या फिर उपभोक्ताओं को गलत धारणा दे सकते हैं.

Misleading Healthy Organic Food
gnttv.com
  • नई दिल्ली ,
  • 15 जून 2026,
  • अपडेटेड 12:28 PM IST
  • FSSAI ने भ्रामक दावों पर शुरू की कार्रवाई
  • हेल्दी, ऑर्गेनिक और जीरो मैदा जैसे दावों पर FSSAI का एक्शन

आजकल बाजार में पैक्ड फूड खरीदते समय लोग अक्सर हेल्दी, ऑर्गेनिक या जीरो मैदा जैसे शब्द देखकर प्रोडक्ट को बेहतर समझ लेते हैं लेकिन क्या ये दावे हमेशा सच होते हैं? फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) की ताजा कार्रवाई ने इसी सवाल को बड़ा बना दिया है. FSSAI ने कई नामी फूड कंपनियों को नोटिस जारी किया है, क्योंकि उनके प्रोडक्ट्स पर लगाए गए दावे कस्टमर्स को गुमराह करने वाले पाए गए हैं.

क्या है पूरा मामला?
FSSAI ने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के तहत कई फूड बिजनेस ऑपरेटर्स (FBOs) की जांच की. जांच में सामने आया कि कई कंपनियां अपने ब्रांड नाम, ट्रेड नेम और पैकेजिंग पर ऐसे दावे कर रही थीं, जो या तो नियमों के अनुसार मान्य नहीं हैं या फिर उपभोक्ताओं को गलत धारणा दे सकते हैं.

रेगुलेटर ने साफ कहा है कि किसी भी फूड प्रोडक्ट की ब्रांडिंग और लेबलिंग ऐसी नहीं होनी चाहिए, जिससे उपभोक्ता यह समझें कि उत्पाद स्वास्थ्य के लिए ज्यादा फायदेमंद है, जबकि वास्तविकता अलग हो.

हेल्दी और ट्रू विटामिन जैसे नामों पर सवाल
FSSAI ने हेल्दी मास्टर के Vision to Serve Healthy टैगलाइन को लेकर चिंता जताई है. अथॉरिटी का कहना है कि ऐसे शब्द उपभोक्ताओं को यह भ्रम दे सकते हैं कि प्रोडक्ट विशेष रूप से स्वास्थ्यवर्धक है, जबकि ऐसा जरूरी नहीं है.

इसी तरह Neuherbs के मल्टीविटामिन ब्रांड ट्रू विटामिन को भी जांच में शामिल किया गया. FSSAI ने कहा कि “True Vitamin” जैसा शब्द किसी नियम या मानक में परिभाषित नहीं है, जिससे उपभोक्ता गलत धारणा बना सकते हैं.

वीगन और जीरो मैदा दावों पर भी कार्रवाई
कई ब्रांड्स द्वारा वीगन टैग का इस्तेमाल भी नियमों के अनुसार नहीं पाया गया. Plan B Plant Based Vegan जैसे ब्रांड्स की जांच में पाया गया कि कुछ मामलों में आवश्यक FSSAI अप्रूवल और एंडोर्समेंट नहीं लिया गया था.

वहीं Health Factory के Zero Maida Whole Wheat Bread और Healthy Food Factory के Zero Maida Pizza Base पर भी सवाल उठे. FSSAI का कहना है कि जीरो मैदा जैसे दावे तब तक नहीं किए जा सकते जब तक उत्पाद की पूरी संरचना नियमों के अनुसार इस दावे को सही साबित न करे.

हेल्दी नाम से बिक रहे चिप्स और स्नैक्स
FSSAI की नजर सिर्फ बड़े ब्रांड्स पर नहीं बल्कि स्नैक्स और पैकेज्ड फूड पर भी पड़ी. Troovy के Healthy Mix Veggie Chips, Healthy Ragi Chips और Healthy Moong Dal Chips जैसे उत्पादों को भी लेकर सवाल उठाए गए. अथॉरिटी का कहना है कि इन उत्पादों में कई ऐसे तत्व होते हैं जो उन्हें पूरी तरह हेल्दी श्रेणी में रखने पर सवाल खड़े करते हैं. इसके अलावा Healthy Choice Healthy Food of Healthy Life Poha जैसे नामों को भी उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाला माना गया है.

तेल, जूस और ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स पर भी निगरानी
एफएसएसएआई ने Emami Healthy & Tasty और Health Aid जैसे खाने वाले तेल ब्रांड्स की भी जांच की है. इन पर आरोप है कि ये नाम उपभोक्ताओं को यह संकेत देते हैं कि उत्पाद अधिक स्वास्थ्यवर्धक है, जबकि ऐसा हमेशा प्रमाणित नहीं होता.

ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स के मामले में भी सख्ती दिखाई गई है. Organic Wisdom, Shine Organic, Two Brothers Organic Farms और World of Organic जैसे ब्रांड्स पर सवाल उठे हैं क्योंकि इनके पास जरूरी ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन और जैविक भारत लोगो की कमी पाई गई.

जूस और पैकेज्ड वॉटर पर भी सवाल
Storia Pomegranate Juice को लेकर भी FSSAI ने पाया कि इसमें केवल 4% अनार का जूस कंसन्ट्रेट है, लेकिन मार्केटिंग इसे मुख्य रूप से अनार जूस जैसा दिखाती है. इसी तरह Lota Water- Feel the Difference नामक पैकेज्ड वॉटर ब्रांड पर भी आपत्ति जताई गई है. FSSAI का कहना है कि पानी में मिनरल्स जोड़कर उन्हें हेल्थ बेनिफिट के रूप में दिखाना नियमों के खिलाफ है, खासकर जब वे प्रोसेसिंग लॉस की भरपाई के लिए जोड़े गए हों.

उपभोक्ताओं के लिए क्यों जरूरी है यह कार्रवाई?
FSSAI ने साफ कहा है कि आज उपभोक्ता अक्सर हेल्दी, ऑर्गेनिक और प्योर जैसे शब्दों के आधार पर खरीदारी करते हैं. लेकिन अगर ब्रांडिंग ही गलत या भ्रामक हो, तो यह सीधे उपभोक्ता के फैसले को प्रभावित कर सकता है.

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