FD vs RD
FD vs RD
बचत और सेफ निवेश की बात आते ही ज्यादातर लोगों के दिमाग में सबसे पहले फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और रेकरिंग डिपॉजिट (RD) का नाम आता है. दोनों ही बैंकिंग निवेश के पॉपुलर ऑप्शन हैं और इनमें जोखिम भी काफी कम माना जाता है. लेकिन कई लोग यह मान लेते हैं कि जब दोनों पर इंटरेस्ट रेट लगभग बराबर होती है तो रिटर्न भी बराबर मिलेगा. लेकिन असलियत इससे थोड़ी अलग है. आइए समझते हैं कि FD और RD में क्या फर्क है और कौनसा ऑप्शन ज्यादा फायदेमंद हो सकता है.
FD और RD के बीच सबसे बड़ा अंतर निवेश के तरीके में होता है. फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेशक एकमुश्त रकम बैंक में जमा करता है और उस पूरी राशि पर तय समय के लिए ब्याज मिलता रहता है. वहीं, रेकरिंग डिपॉजिट में हर महीने एक तय रकम जमा की जाती है. यह ठीक वैसे ही होता है जैसे आप हर महीने कोई किस्त जमा कर रहे हों.
FD में पूरी राशि शुरुआत से ही बैंक के पास जमा होती है, इसलिए उस रकम पर पूरे समय के लिए ब्याज मिलता है. दूसरी तरफ RD में हर महीने जमा होने वाली राशि अलग-अलग समय के लिए ब्याज कमाती है. पहली किस्त को सबसे ज्यादा समय का ब्याज मिलता है, जबकि आखिरी किस्त को सबसे कम. यही वजह है कि समान ब्याज दर होने के बावजूद FD का कुल रिटर्न अक्सर RD से अधिक होता है.
मान लीजिए बैंक 7 प्रतिशत सालाना ब्याज दे रहा है. यदि आप 1 लाख रुपए की FD पांच साल के लिए करवाते हैं, तो मैच्योरिटी पर आपको लगभग 1.40 लाख रुपए मिल सकते हैं. वहीं, अगर आप RD में पांच साल तक हर महीने लगभग 1,667 रुपए जमा करते हैं, तो कुल निवेश 1 लाख रुपए होगा, लेकिन मैच्योरिटी राशि करीब 1.19 लाख रुपये के आसपास पहुंच सकती है. यानी इस उदाहरण में FD आपको लगभग 20 हजार रुपए से ज्यादा रिटर्न दे सकती है.
यदि आपके पास पहले से एकमुश्त रकम उपलब्ध है, तो FD बेहतर ऑप्शन साबित हो सकती है क्योंकि इसमें ब्याज का लाभ ज्यादा मिलता है. वहीं, अगर आप नियमित रूप से हर महीने बचत करना चाहते हैं और एक साथ बड़ी रकम निवेश नहीं कर सकते, तो RD आपके लिए अच्छा ऑप्शन रहेगा.