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70% युवाओं में विटामिन D की कमी, 50% वर्किंग प्रोफेशनल्स प्रीडायबिटिक के शिकार

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि करीब 70% युवा विटामिन D की कमी से जूझ रहे हैं. यह विटामिन हड्डियों को मजबूत रखने और इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाता है. इसकी कमी से थकान, कमजोरी और हड्डियों से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं.

20% Young Indians Prediabetic
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 09 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 5:54 PM IST
  • हर 10 में से 7 युवाओं में विटामिन D की कमी
  • 50% वर्किंग प्रोफेशनल्स प्रीडायबिटिक के शिकार

देश के युवाओं की सेहत को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है. एक ताजा स्टडी के मुताबिक, 20 की उम्र के करीब 20% युवा प्रीडायबिटिक हैं. यानी उनके ब्लड शुगर लेवल सामान्य से ज्यादा हैं, लेकिन अभी डायबिटीज की स्थिति तक नहीं पहुंचे हैं. यह आने वाले समय में बड़ी बीमारी का संकेत हो सकता है.

हर 10 में से 7 युवाओं में विटामिन D की कमी
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि करीब 70% युवा विटामिन D की कमी से जूझ रहे हैं. यह विटामिन हड्डियों को मजबूत रखने और इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाता है. इसकी कमी से थकान, कमजोरी और हड्डियों से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं. स्टडी के अनुसार, 30 साल से कम उम्र के करीब दो-तिहाई लोगों में फ्लेक्सिबिलिटी, ताकत और बैलेंस की कमी पाई गई. इसका सीधा असर दिल की बीमारियों, गिरने के खतरे और कम उम्र में हेल्थ प्रॉब्लम्स के रूप में सामने आ सकता है.

स्टूडेंट्स और युवाओं में भी बढ़ रहा खतरा
करीब 20 हजार से ज्यादा कॉलेज स्टूडेंट्स (17-25 साल) पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि हर 3 में से 2 युवाओं में कोई न कोई हेल्थ रिस्क मौजूद है. यानी कम उम्र में ही शरीर अंदर से कमजोर हो रहा है, लेकिन ज्यादातर मामलों में इसके लक्षण नजर नहीं आते.

वर्किंग प्रोफेशनल्स भी नहीं हैं सुरक्षित
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 30-40 साल के कामकाजी लोगों में करीब 50% लोग या तो प्रीडायबिटिक हैं या डायबिटीज के शिकार. वहीं 80% लोग ओवरवेट कैटेगरी में आते हैं. यह आंकड़े खराब लाइफस्टाइल और खानपान की ओर इशारा करते हैं.

महिलाओं की सेहत पर भी बढ़ती चिंता
40 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं में एनीमिया और मोटापे के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. रिपोर्ट में ब्रेस्ट कैंसर के केस भी सामने आए, जिनमें सभी मरीजों को पहले कोई लक्षण नहीं था. इससे साफ है कि नियमित जांच बेहद जरूरी है. रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ हेल्थ चेकअप कराना ही काफी नहीं है. असली फर्क तब पड़ता है जब समय पर इलाज और लाइफस्टाइल में बदलाव किया जाए. खासकर हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी बीमारियों में लगातार निगरानी जरूरी है.

 

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