हीटवेव के साथ बढ़ रहा UV रेडिएशन का खतरा, सिर्फ गर्मी ही नहीं, सूरज की किरणें भी बढ़ा रहीं खतरा, जानिए इनसे कैसे बच सकते हैं

तेज धूप के साथ सूरज से निकलने वाली UV किरणें भी लोगों की सेहत के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही हैं. कई शहरों में UV Index खतरनाक स्तर तक पहुंच चुका है.

Heatwave rising: Photo: PTI
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 19 मई 2026,
  • अपडेटेड 1:48 PM IST

देशभर में गर्मी लगातार रिकॉर्ड तोड़ रही है. कई राज्यों में तापमान 45 डिग्री के करीब पहुंच चुका है और हीटवेव ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है. लेकिन इस बार खतरा सिर्फ तेज गर्मी या लू का नहीं है. सूरज से निकलने वाली अल्ट्रावायलेट यानी UV किरणें भी लोगों के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही हैं.

हाल ही में केरल में स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को हाई UV रेडिएशन को लेकर चेतावनी जारी की थी. खास बात यह रही कि कई दिनों तक आसमान में बादल होने के बावजूद UV लेवल काफी ज्यादा रिकॉर्ड किया गया. वहीं दिल्ली, मुंबई और तिरुवनंतपुरम जैसे शहरों में भी UV इंडेक्स खतरनाक स्तर तक पहुंच गया.

आखिर क्या होता है UV रेडिएशन?
UV यानी अल्ट्रावायलेट रेडिएशन सूरज से निकलने वाली ऐसी ऊर्जा है, जिसे हम आंखों से देख नहीं सकते. यह सामान्य रोशनी से अलग होती है और सीधे शरीर पर असर डालती है.

UV radiation

UV रेडिएशन तीन प्रकार का होता है  UVA, UVB और UVC. इनमें से UVC पृथ्वी के वातावरण में ही रुक जाता है, लेकिन UVA और UVB धरती तक पहुंचते हैं.

इनमें UVB ज्यादा खतरनाक माना जाता है, क्योंकि यह त्वचा की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है और सनबर्न व स्किन कैंसर का कारण बन सकता है. वहीं UVA त्वचा के अंदर तक जाकर समय से पहले एजिंग और लंबे समय तक सेल डैमेज की वजह बनता है.

हीटवेव के साथ क्यों बढ़ जाता है खतरा?
भारत का ज्यादातर हिस्सा ट्रॉपिकल यानी उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में आता है. इसका मतलब है कि साल के कई महीनों तक सूरज सीधे सिर के ऊपर रहता है. ऐसे में UV किरणें कम दूरी तय करके सीधे जमीन तक पहुंचती हैं और ज्यादा असर डालती हैं.

गर्मी के दिनों में जब आसमान साफ होता है, तब UV रेडिएशन और ज्यादा बढ़ जाता है. हालांकि कई बार बादलों वाले दिन भी लोग सुरक्षित नहीं होते. बादल धूप और गर्मी को कुछ हद तक रोक लेते हैं, लेकिन UV किरणें फिर भी जमीन तक पहुंच जाती हैं. यही वजह है कि हल्की ठंडक या बादलों के बावजूद त्वचा को नुकसान हो सकता है.

UV Index क्या होता है?
UV रेडिएशन की तीव्रता को मापने के लिए UV Index का इस्तेमाल किया जाता है. यह स्केल 0 से 11+ तक होता है.

0 से 2 तक- कम खतरा
3 से 5- मध्यम
6 से 7- हाई
8 से 10-बहुत ज्यादा खतरा
11+-बेहद खतरनाक स्थिति

भारत के कई शहरों में गर्मियों के दौरान UV Index 10 से 13 तक पहुंच जाता है, जो बेहद गंभीर माना जाता है.

शरीर पर क्या असर डालता है UV रेडिएशन?
UV रेडिएशन का असर तुरंत भी दिख सकता है और लंबे समय बाद भी. ज्यादा देर धूप में रहने से त्वचा लाल पड़ना, जलन, खुजली और सनबर्न जैसी परेशानी हो सकती है. बार-बार UV एक्सपोजर से स्किन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है. इसके अलावा आंखों पर भी बुरा असर पड़ता है. डॉक्टरों के मुताबिक मोतियाबिंद यानी कैटरेक्ट के कई मामलों में UV रेडिएशन बड़ी वजह होता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO का मानना है कि दुनियाभर में करीब 20% मोतियाबिंद के मामले UV एक्सपोजर से जुड़े हो सकते हैं.

किन लोगों को सबसे ज्यादा खतरा?
किसान, मजदूर, ट्रैफिक पुलिस, रिक्शा चालक, स्ट्रीट वेंडर और निर्माण कार्य में लगे लोग सबसे ज्यादा जोखिम में रहते हैं, क्योंकि उन्हें घंटों धूप में काम करना पड़ता है. बच्चों और बुजुर्गों की त्वचा भी ज्यादा संवेदनशील होती है, इसलिए उन्हें अतिरिक्त सावधानी की जरूरत होती है.

कैसे करें बचाव?
डॉक्टरों के मुताबिक सुबह 11 बजे से दोपहर 4 बजे के बीच तेज धूप में निकलने से बचना चाहिए. बाहर निकलते समय फुल स्लीव कपड़े, टोपी, छाता और सनग्लास का इस्तेमाल करना जरूरी है. सनस्क्रीन लगाना भी काफी मददगार माना जाता है. साथ ही शरीर में पानी की कमी न होने दें और लगातार हाइड्रेटेड रहें.

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