अगर आप मेडिकल स्टोर से कफ सिरप या दूसरी अल्कोहल वाली ओरल दवा बिना डॉक्टर की पर्ची के खरीद लेते हैं, तो आने वाले समय में ऐसा करना आसान नहीं होगा. केंद्र सरकार ने Drugs Rules, 1945 में संशोधन किया है. नए नियमों के तहत 30 ml से बड़ी पैकिंग और 12% से ज्यादा एथिल अल्कोहल (Ethyl Alcohol) वाली सभी ओरल दवाओं को Schedule H1 में शामिल कर दिया गया है. यह नियम गजट नोटिफिकेशन पब्लिश होने के 6 महीने बाद, यानी संभावित तौर पर जनवरी 2027 से लागू होगा.
अब डॉक्टर की पर्ची के बिना नहीं मिलेगी दवा
Schedule H1 में शामिल होने के बाद इन दवाओं की बिक्री पर पहले से ज्यादा सख्ती रहेगी. इसका मतलब है कि अब ऐसी दवाएं बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के नहीं बेची जा सकेंगी. मेडिकल स्टोर संचालकों को हर बिक्री का रिकॉर्ड रखना होगा. साथ ही दवा की पैकिंग पर जरूरी चेतावनी भी लिखनी होगी. इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि दवा किसे और कितनी मात्रा में बेची गई.
किन दवाओं पर लागू होगा नया नियम?
पैकिंग 30 ml से ज्यादा हो.
एथिल अल्कोहल की मात्रा 12% से अधिक हो.
इनमें कुछ कफ सिरप, टॉनिक और दूसरी लिक्विड दवाएं शामिल हो सकती हैं. हालांकि हर अल्कोहल वाली दवा इस नियम के दायरे में नहीं आएगी. केवल तय सीमा से ज्यादा अल्कोहल और बड़ी पैकिंग वाली दवाओं पर यह नियम लागू होगा.
Schedule K में भी किया गया बदलाव
सरकार ने Schedule K में भी संशोधन किया है. पहले कुछ दवाओं को बिक्री के नियमों में छूट मिलती थी, लेकिन अब 30 ml से बड़ी और 12% से ज्यादा अल्कोहल वाली ओरल दवाओं को यह छूट नहीं मिलेगी. यानी इन दवाओं की बिक्री भी तय नियमों के तहत ही होगी.
सरकार ने यह फैसला क्यों लिया?
सरकार का कहना है कि कुछ लोग ज्यादा अल्कोहल वाले कफ सिरप और टॉनिक का नशे के लिए गलत इस्तेमाल करते हैं. ऐसे मामलों को रोकने और दवाओं के दुरुपयोग पर लगाम लगाने के लिए यह कदम उठाया गया है. सरकार का मानना है कि डॉक्टर की पर्ची अनिवार्य होने और बिक्री का रिकॉर्ड रखने से ऐसी दवाओं के गलत इस्तेमाल पर नजर रखना आसान होगा.
पहले ड्राफ्ट जारी हुआ, फिर बना नियम
इस बदलाव का मसौदा अक्टूबर 2025 में सार्वजनिक किया गया था. लोगों और संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां मांगने के लिए 30 दिन का समय दिया गया था, लेकिन कोई आपत्ति नहीं मिली. इसके बाद सरकार ने ड्रग टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड से चर्चा की और अब इसे अंतिम रूप देकर अधिसूचित कर दिया है.
दवा कंपनियों और दुकानदारों को मिलेगा समय
नया नियम तुरंत लागू नहीं होगा. सरकार ने गजट नोटिफिकेशन के बाद 6 महीने का समय दिया है, ताकि दवा कंपनियां अपनी पैकेजिंग और लेबलिंग में जरूरी बदलाव कर सकें. वहीं मेडिकल स्टोर भी नए रिकॉर्ड रखने और बिक्री से जुड़े नियमों की तैयारी कर सकेंगे. जनवरी 2027 से इन नियमों का पूरी तरह पालन करना जरूरी होगा.
ये भी पढ़ें