ऑफिस डेस्क पर बैठे-बैठे करें ये 3 आसान स्ट्रेचिंग... गर्दन, कंधे और सर्वाइकल दर्द से पाएं तुरंत राहत

लगातार एक ही पोजीशन में बैठे रहने से शरीर की मांसपेशियां अकड़ जाती हैं और ब्लड सर्कुलेशन धीमा हो जाता है. इससे थकान, दर्द और सुस्ती महसूस होती है. डेस्क योगा इन समस्याओं को दूर करने का आसान और असरदार तरीका है. यह न सिर्फ शरीर को लचीला बनाता है, बल्कि मानसिक तनाव को भी कम करता है और काम में फोकस बढ़ाता है.

cervical pain yoga
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 19 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 8:34 AM IST

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में ऑफिस का काम हमारी दिनचर्या का अहम हिस्सा बन चुका है. घंटों तक एक ही जगह कुर्सी पर बैठकर काम करना अब आम बात है. लेकिन यह आदत धीरे-धीरे हमारी सेहत पर बुरा असर डालती है. गर्दन, कंधे और पीठ में दर्द के साथ-साथ कई बार यह समस्या बढ़कर सर्वाइकल और माइग्रेन जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन जाती है. ऐसे में जरूरी है कि हम अपने काम के बीच ही शरीर का ध्यान रखें. इसी का आसान समाधान है डेस्क योगा, जिसे आप अपनी कुर्सी पर बैठे-बैठे कर सकते है.

क्यों जरूरी है डेस्क योगा
लगातार एक ही पोजीशन में बैठे रहने से शरीर की मांसपेशियां अकड़ जाती हैं और ब्लड सर्कुलेशन धीमा हो जाता है. इससे थकान, दर्द और सुस्ती महसूस होती है. डेस्क योगा इन समस्याओं को दूर करने का आसान और असरदार तरीका है. यह न सिर्फ शरीर को लचीला बनाता है, बल्कि मानसिक तनाव को भी कम करता है और काम में फोकस बढ़ाता है.

1. गर्दन और कंधों के लिए नेक रोटेशन
यह स्ट्रेच गर्दन और कंधों की जकड़न को कम करता है.
कैसे करें: कुर्सी पर सीधा बैठें और धीरे-धीरे गर्दन को दाईं और फिर बाईं ओर घुमाएं. इसके बाद ऊपर-नीचे झुकाएं. कंधों को ऊपर-नीचे करें और गोल-गोल घुमाएं.
फायदा: इससे मांसपेशियों को आराम मिलता है और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है.

2. रीढ़ के लिए सीटेड स्पाइनल ट्विस्ट
यह एक्सरसाइज पीठ और रीढ़ को मजबूत और लचीला बनाती है.
कैसे करें: कुर्सी पर सीधे बैठें और शरीर को धीरे-धीरे एक तरफ मोड़ें. कुछ सेकंड रुकें और गहरी सांस लें. फिर दूसरी तरफ दोहराएं.
फायदा: पीठ दर्द में राहत मिलती है और पाचन भी बेहतर होता है.

3. कलाई और उंगलियों के लिए स्ट्रेच
लगातार टाइपिंग और माउस के इस्तेमाल से कलाई में दर्द हो सकता है.
कैसे करें: हाथ को सामने फैलाकर हथेली को नीचे और फिर ऊपर की ओर मोड़ें. दूसरी हाथ से हल्का दबाव दें और कुछ सेकंड तक रोकें.
फायदा: कलाई मजबूत होती है और कार्पल टनल जैसी समस्याओं का खतरा कम होता है.

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