ICICI लोम्बार्ड इंडिया वेलनेस इंडेक्स 2025 के मुताबिक देश की सेहत काफी चिंताजनक है. रिपोर्ट के मुताबिक 17 फीसदी भारतीय डायबिटीज से प्रभावित हैं. इस सर्वे में मिलेनियल्स, कॉर्पोरेट कर्मचारियों और युवा पीढ़ियों के बीच स्वास्थ्य में तेज गिरावट के संकेत मिले हैं. इतना ही नहीं, तनाव और थकान का लेवल भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है. यह स्टडी 19 शहरों में 2 हजार से अधिक लोगों पर की गई है. इसमें पाया गया है कि हर 3 में से एक भारतीय हाई डेली स्ट्रेस से जूझ रहा है. जबकि 41 फीसदी लगातार थकान की शिकायत करते हैं. ज्वाइंट पेन और हाई ब्लड प्रेशर के बाद तनाव सबसे बड़ी आम बीमारी बन गई है.
मिलेनियल्स और कॉर्पोरेट कर्मचारियों में सबसे बड़ा बदलाव-
रिपोर्ट के मुताबिक डायबिटीज पहले बुजुर्गों की बीमारी माना जाता था. लेकिन अब ये मिलेनियल्स और कॉर्पोरेट कर्मचारियों में भी बढ़ रहा है. मिलेनियन्स में लंबे वर्किंग आवर्स, डेडलाइन्स, अनियमित खानपान और फिजिकल एक्टिविटी में कमी के चलते ये समस्या आ रही है. कॉर्पोरेट कर्मचारियों में नींद, एक्सरसाइड और डाइट डिसिप्लिन के मामले में स्थिति खराब है.
Gen Z की सेहत सबसे खराब-
रिपोर्ट में हैरान करने वाला पहलू है कि Gen Z की वेलनेस स्कोर में सबसे तेज गिरावट दर्ज की गई है. युवा पीढ़ी में फिजिकल, मेंटल, फाइनेंशियल, फैमिली, सोशल और वर्कप्लेस में Gen Z की सेहत का लेवल कम हुआ है. खासतौर पर टियर-1 शहरों में काम करने वाले युवाओं की स्थिति और भी खराब है.
Gen X और महिलाओं में हो रहा सुधार-
रिपोर्ट के मुताबिक साल 2025 में Gen X और महिलाओं के स्वास्थ्य लेवल में सुधार हुआ है. Gen X ने फिजिकल फिटनेस, वर्क-लाइफ बैलेंस और वित्तीय योजना में सुधार किया है. महिलाओं की सेहत पर हर क्षेत्र में सुधार हुआ है. इसमें फिटनेस आदतों में सुधार, स्वास्थ्य जागरूकता, परिवार में सहभागिता, बीमा कवरेज के प्रति जागरूकता की वजह से उनकी वेलनेस रेटिंग मजबूत हुई है.
मेंटल हेल्थ हर वर्ग के लिए चिंताजनक-
औसतन भारतीय 1.3 डिप्रेशन से जुड़े लक्षण महसूस करते हैं. इसमें थकान और निराशा सबसे आम हैं. मिलेनियल्स और कॉर्पोरेट महिलाएं सबसे ज्यादा संवेदनशील पाई गई हैं. रिपोर्ट के मुताबिक 40 फीसदी भारतीय हार्ट या डायबिटीज के शुरुआत लक्षण को तनाव समझ लेते हैं और उसे इग्नोर करते हैं. जिससे भविष्य में इसके खतरे बढ़ जाते हैं.
संतुलित डाइट के दावे का सच-
रिपोर्ट के मुताबिक 66 फीसदी भारतीयों संतुलित आहार लेने का दावा करते हैं. लेकिन ज्यादातर शुगर, नमक और फैट कम नहीं कर पाते हैं. जो लोग सच में संतुलित आहार लेते हैं, उनका वेलनेस स्कोर बेहतर पाया गया है.
स्टडी में पाया गया है कि बीमा लेने वाले लोग आर्थिक और पारिवारिक सेहत में बेहतर स्कोर करते हैं. डायबिटिज मरीज इसमें सबसे आगे हैं. उधर, फिटनेस ट्रैकर इस्तेमाल करने वाले इसका इस्तेमाल ना करने वालों के मुकाबले 20 अंक अधिक वेलनेस स्कोर हासिल करते हैं.
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