आजकल फिटनेस और हेल्दी लाइफस्टाइल की बात हो और ग्रीन टी का नाम न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता. एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर ग्रीन टी को लोग वजन घटाने से लेकर शरीर को डिटॉक्स करने तक के लिए खूब इस्तेमाल कर रहे हैं.
लेकिन, क्या आप जानते हैं कि हर किसी के लिए ग्रीन टी फायदेमंद नहीं होती? आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों ही मानते हैं कि कुछ लोगों को इसे कंट्रोल्ड लिमिट में ही लेना चाहिए या पूरी तरह से बचना चाहिए. लेकिन ऐसा क्यों कहा जाता है और किनके लिए कहा जाता है, यह बात कईयों को नहीं पता है. तो चलिए इस बात का जवाब देते हैं.
प्रेग्नेंट और ब्रेस्फीड करवाने वाली महिलाएं
प्रेग्नेंसी के दौरान कैफीन का इनटेक कम करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इसका असर बच्चे के विकास पर पड़ सकता है. ग्रीन टी में कैफीन मौजूद होता है. इसे ज्यादा लेने पर जोखिम बढ़ा सकता है. वहीं, ब्रेस्टफीड कराने वाली महिलाओं के जरिए कैफीन बच्चे तक पहुंच सकता है, जिससे उसकी नींद पर असर पड़ सकता है.
आयरन की कमी से जूझ रहे लोग
अगर आप एनीमिया या आयरन की कमी से परेशान हैं, तो ग्रीन टी आपके लिए नुकसानदायक हो सकती है. इसमें मौजूद टैनिन शरीर में आयरन अब्जॉर्ब नहीं होने देता, जिससे खून की कमी और बढ़ सकती है. ऐसे में ग्रीन टी से दूरी बनाना बेहतर होता है.
बढ़ सकती है पेट की समस्या
जिन लोगों को एसिडिटी, अल्सर या बार-बार पेट दर्द की शिकायत रहती है, उन्हें ग्रीन टी खासतौर पर खाली पेट नहीं पीनी चाहिए. इसमें मौजूद तत्व पेट में एसिडिटी को बढ़ा सकते हैं, जिससे जलन और दर्द की समस्या बढ़ सकती है.
माइंड नहीं कर पाता रिलैक्स
अगर आपको नींद नहीं आती, बेचैनी या एंग्जायटी अक्सर होती है, तो ग्रीन टी आपकी परेशानी को और बढ़ा सकती है. इसमें मौजूद कैफीन दिमाग को ज्यादा एक्टिव बना देता है, जिससे माइंड रिलैक्स नहीं कर पाता है.
हार्ट पेशेंट्स के लिए रिस्क
हाई ब्लड प्रेशर या दिल की बीमारियों से जूझ रहे लोगों को ग्रीन टी लिमिटिड क्वाटिटी में ही पीनी चाहिए. कैफीन दिल की धड़कन को तेज कर सकता है और ब्लड प्रेशर को प्रभावित कर सकता है, जो हार्ट पेशेंट्स के लिए जोखिम भरा हो सकता है.