Expert Talk: क्या पुरुष भी हो सकते हैं ब्रेस्ट कैंसर के शिकार? जानिए सेल्फ-एग्ज़ामिनेशन से कैसे शुरुआती स्टेज में पकड़ी जा सकती है यह बीमारी, क्या हैं इसके लक्षण और किन लोगों को है सबसे ज्यादा खतरा

हाल ही में हॉलीवुड एक्टर और प्रोफेशनल रेसलर टायलर मेन (Tyler Mane) ने खुलासा किया था कि उन्हें ब्रेस्ट कैंसर हुआ है और इस वक्त उनका कीमोथेरेपी (Chemotherapy) ट्रीटमेंट चल रहा है. यह बहुत ही रेयर है. दुनिया में सिर्फ 1% ब्रेस्ट कैंसर के मामले पुरुषों में होते हैं.

Male Breast Cancer
अपूर्वा राय
  • नई दिल्ली ,
  • 16 जून 2026,
  • अपडेटेड 11:55 AM IST
  • दुनिया के कुल ब्रेस्ट कैंसर मामलों में सिर्फ 0.5-1% मरीज पुरुष होते हैं.
  • पुरुषों में भी ब्रेस्ट टिश्यू होता है, इसलिए उन्हें भी ब्रेस्ट कैंसर हो सकता है.

हाल ही में हॉलीवुड एक्टर और प्रोफेशनल रेसलर Tyler Mane ने खुलासा किया कि उन्हें ब्रेस्ट कैंसर हुआ है और उनका कीमोथेरेपी (Chemotherapy) ट्रीटमेंट चल रहा है. 59 वर्षीय अभिनेता ने अपनी बीमारी के बारे में सार्वजनिक रूप से इसलिए बताया ताकि पुरुषों में होने वाले इस दुर्लभ कैंसर को लेकर जागरूकता बढ़ाई जा सके. ब्रेस्ट कैंसर को आमतौर पर महिलाओं की बीमारी माना जाता है, लेकिन पुरुष भी इससे प्रभावित हो सकते हैं. World Health Organization के मुताबिक दुनिया में होने वाले कुल ब्रेस्ट कैंसर मामलों में लगभग 0.5% से 1% मामले पुरुषों में पाए जाते हैं. यानी हर 100 ब्रेस्ट कैंसर मरीजों में लगभग एक मरीज पुरुष होता है. इस रेयर बीमारी के बारे में विस्तार से जानने के लिए GNT ने बात की एंड्रोमेडा कैंसर हॉस्पिटल की रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. पर्ल आनंद से. 

क्या होता है मेल ब्रेस्ट कैंसर?
डॉ. आनंद के अनुसार पुरुषों के शरीर में भी थोड़ी मात्रा में ब्रेस्ट टिश्यू मौजूद होता है. जब इन कोशिकाओं में असामान्य वृद्धि होने लगती है और वे अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं, तब ब्रेस्ट कैंसर विकसित हो सकता है. अधिकांश मामलों में यह दूध ले जाने वाली नलिकाओं (Milk Ducts) से शुरू होता है, जिसे इनवेसिव डक्टल कार्सिनोमा कहा जाता है. हालांकि यह बीमारी दुर्लभ है, लेकिन समय पर पहचान न होने पर गंभीर रूप ले सकती है. पुरुषों में जागरूकता की कमी के कारण कई बार बीमारी का पता देर से चलता है, जिससे इलाज मुस्किल हो जाता है.

दुनिया में कितने पुरुष होते हैं प्रभावित?
डब्ल्यूएचओ के अनुसार दुनिया भर में होने वाले ब्रेस्ट कैंसर के केवल 0.5 से 1 प्रतिशत मामले पुरुषों में होते हैं. वहीं अमेरिकी आंकड़े बताते हैं कि हर साल हजारों पुरुष इस बीमारी से प्रभावित होते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है क्योंकि कई मामलों का पता देर से चलता है.

Male Breast Cancer

किन पुरुषों में ज्यादा होता है खतरा?
डॉ. पर्ल आनंद के अनुसार मेल ब्रेस्ट कैंसर का खतरा उम्र बढ़ने के साथ बढ़ता है. यह बीमारी सबसे अधिक 60 से 70 वर्ष की उम्र के पुरुषों में देखी जाती है. इसके अलावा कुछ अन्य कारण भी जोखिम बढ़ाते हैं-

  • परिवार में ब्रेस्ट कैंसर का इतिहास

  • BRCA2 जीन में बदलाव

  • मोटापा

  • लिवर की बीमारी

  • छाती पर पहले रेडिएशन थेरेपी होना

  • शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर बढ़ना

  • क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम जैसी आनुवंशिक स्थितियां

इन जोखिम कारकों वाले पुरुषों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है.

कौन से लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें?
मेल ब्रेस्ट कैंसर का सबसे सामान्य लक्षण निप्पल के नीचे या उसके आसपास बिना दर्द वाली गांठ का बनना है. इसके अलावा-

  • स्तन में मोटापन या सूजन

  • निप्पल का अंदर की ओर मुड़ जाना

  • निप्पल से खून या तरल पदार्थ निकलना

  • स्तन की त्वचा का लाल होना या सिकुड़ना

  • बगल में लिम्फ नोड्स का बढ़ जाना

  • निप्पल या स्तन में लगातार दर्द

विशेषज्ञों का कहना है कि पुरुष अक्सर इन लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे बीमारी का पता देर से चलता है.

क्या पुरुष खुद भी पहचान सकते हैं बीमारी?
डॉ कहती हैं, पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर की शुरुआती पहचान सेल्फ एग्जामिनेशन यानी स्वयं जांच से संभव है. नहाते समय या कपड़े बदलते समय यदि स्तन के आसपास कोई नई गांठ, सूजन, त्वचा में बदलाव या निप्पल से डिस्चार्ज दिखाई दे तो डॉक्टर से तुरंत सलाह लेनी चाहिए. हालांकि पुष्टि के लिए डॉक्टर क्लिनिकल जांच, मैमोग्राफी, अल्ट्रासाउंड और जरूरत पड़ने पर बायोप्सी कराते हैं.

इलाज कितना प्रभावी है?
यदि बीमारी शुरुआती चरण में पकड़ में आ जाए तो इलाज के अच्छे परिणाम मिल सकते हैं. उपचार मरीज की स्थिति और कैंसर के चरण पर निर्भर करता है. इसमें सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी, हार्मोन थेरेपी और टार्गेटेड थेरेपी शामिल हो सकती हैं.

टायलर मेन की कहानी क्यों है महत्वपूर्ण?
टायलर मेन ने अपनी बीमारी को सार्वजनिक करके एक ऐसे विषय पर चर्चा शुरू की है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. उन्होंने बताया कि शुरुआत में उन्हें भी इस बीमारी के बारे में खुलकर बात करने में झिझक थी, लेकिन बाद में उन्होंने जागरूकता फैलाने का फैसला किया. डॉक्टर्स मानते हैं कि पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर को लेकर जागरूकता बढ़ेगी तो बीमारी की पहचान जल्दी हो सकेगी और अधिक लोगों की जान बचाई जा सकेगी.

 

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