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Expert Talk: बारिश में काम करने का मन नहीं करता, शरीर भारी और आंखों में नींद रहती है? जानिए क्यों होता है Monsoon Fatigue, डॉक्टर से समझें इससे बचने के आसान तरीके

मानसून के दौरान आसमान में लंबे समय तक बादल छाए रहते हैं. इसका सीधा असर हमें मिलने वाली प्राकृतिक रोशनी पर पड़ता है. आम दिनों की तुलना में धूप का संपर्क कम हो जाता है. शरीर की अपनी एक जैविक घड़ी होती है, जिसे सर्केडियन रिद्म कहा जाता है.

Monsoon Fatigue
अपूर्वा राय
  • नई दिल्ली ,
  • 19 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 2:32 PM IST
  • कम धूप से प्रभावित हो सकती है शरीर की जैविक घड़ी
  • उमस में शरीर को तापमान संभालने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है

सुबह अलार्म बजता है.. आंख खुलती हैं, लेकिन बिस्तर छोड़ने का मन नहीं करता. बाहर बारिश हो रही हो तो आलस और बढ़ जाता है. किसी तरह उठकर काम शुरू भी कर लें तो शरीर भारी-भारी लगता है, आंखों में नींद रहती है और थोड़ी देर काम करने के बाद ही थकान महसूस होने लगती है? क्या आपके साथ भी ये सबकुछ हो रहा है?

दरअसल, मानसून में मौसम बदलने के साथ हमारी दिनचर्या और शरीर की जैविक घड़ी पर भी असर पड़ सकता है. कम धूप, वातावरण में बढ़ी नमी, शारीरिक गतिविधि का कम होना और सोने-जागने के समय में बदलाव जैसी कई वजहें दिनभर सुस्ती, थकान और नींद बढ़ा सकती हैं. बारिश के मौसम में महसूस होने वाली इसी तरह की थकान को आम तौर पर Monsoon Fatigue कहा जाता है.

लेकिन सवाल यह है कि बारिश में आखिर शरीर इतना सुस्त क्यों महसूस करता है? क्या इसकी वजह सिर्फ मौसम है या हमारी बदलती दिनचर्या भी इसमें भूमिका निभाती है? और अगर पर्याप्त नींद लेने के बाद भी सुबह शरीर में एनर्जी नहीं रहती है तो इससे बचने के लिए क्या किया जा सकता है? इन्हीं सवालों के जवाब जानने के लिए GNT ने बात की सर गंगा राम अस्पताल के एमडी/डीएनबी (मेडिसिन) डॉ. बिभु आनंद.

बारिश में आखिर शरीर इतना सुस्त क्यों महसूस करता है?
डॉ. बिभु आनंद के अनुसार मानसून के दौरान आसमान में लंबे समय तक बादल छाए रहते हैं. इसका सीधा असर हमें मिलने वाली प्राकृतिक रोशनी पर पड़ता है. आम दिनों की तुलना में धूप का संपर्क कम हो जाता है. शरीर की अपनी एक जैविक घड़ी होती है, जिसे सर्केडियन रिद्म कहा जाता है. यह रोशनी और अंधेरे के चक्र से प्रभावित होती है और नींद-जागने के पैटर्न को कंट्रोल करने में भूमिका निभाती है. जब दिन में प्राकृतिक रोशनी कम मिलती है तो कुछ लोगों को उनींदापन और सुस्ती ज्यादा महसूस हो सकती है. बारिश के कारण देर तक सोना या रोज की दिनचर्या बदल जाना भी इसे बढ़ा सकता है.

डॉ. बिभु आनंद बताते हैं, 'मानसून में वातावरण में नमी बढ़ने और धूप कम मिलने से कई लोगों की नींद और दिनचर्या प्रभावित हो सकती है. लगातार बादल छाए रहने से शरीर की आंतरिक जैविक घड़ी प्रभावित होती है, जिसके कारण दिन में सुस्ती और नींद महसूस हो सकती है. अगर थकान लगातार बनी रहती है या इसका असर रोजमर्रा के काम पर पड़ने लगा है, तो इसे केवल मौसम का असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.'

Monsoon Fatigue: Photo: https://unsplash.com/@silverkblack

बारिश के दिनों में तापमान कम हो सकता है, लेकिन वातावरण में नमी यानी ह्यूमिडिटी बढ़ जाती है. ज्यादा नमी में शरीर का पसीना आसानी से सोख नहीं पाता. ऐसे में शरीर को अपना तापमान नियंत्रित रखने के लिए एक्स्ट्रा मेहनत करनी पड़ सकती है. इसका असर कुछ लोगों में शरीर के भारीपन, कमजोरी या जल्दी थकान के रूप में महसूस हो सकता है. एक और समस्या यह है कि ठंडे या बादल वाले मौसम में प्यास कम लगती है. इसके बावजूद शरीर को पर्याप्त पानी की जरूरत होती है. इसलिए बारिश के मौसम में सिर्फ इसलिए पानी पीना कम न करें कि प्यास कम लग रही है. दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी लेते रहना जरूरी है.

बारिश के कारण कम हो जाती है फिजिकल एक्टिविटी
डॉ. बिभु आनंद बताते हैं, बारिश का मौसम हमारी रोज की गतिविधियों को भी बदल देता है. तेज बारिश में बाहर निकलना मुश्किल होता है. लोग पैदल चलने, पार्क जाने या रोज की एक्सरसाइज से बचने लगते हैं. कई बार ऑफिस या घर में घंटों एक ही जगह बैठे रहने की आदत बन जाती है. शारीरिक गतिविधि कम होने का असर ऊर्जा और नींद दोनों पर पड़ सकता है. इसलिए बारिश होने का मतलब यह नहीं कि पूरी तरह निष्क्रिय हो जाएं. अगर बाहर जाना संभव नहीं है तो घर के अंदर हल्की वॉक, स्ट्रेचिंग या योग किया जा सकता है. रोजाना थोड़ी शारीरिक गतिविधि भी शरीर को एक्टिव रखने में मदद कर सकती है और दिनभर की सुस्ती कम महसूस हो सकती है.

Monsoon Fatigue से बचने के लिए क्या करें?

  • पानी पर्याप्त मात्रा में पिएं. प्यास कम लगने पर भी पानी पीते रहें.

  • प्राकृतिक रोशनी लें. बारिश रुकने पर कुछ समय बाहर या बालकनी जैसी जगह पर प्राकृतिक रोशनी में बिताएं.

  • शरीर को एक्टिव रखें. घर पर 20-30 मिनट वॉक, योग या स्ट्रेचिंग कर सकते हैं.

  • सोने और जागने का समय तय रखें. बारिश के कारण अपनी दिनचर्या को बहुत ज्यादा न बदलें.

  • रात की नींद पूरी करें. पर्याप्त और अच्छी गुणवत्ता वाली नींद शरीर को तरोताजा रखने के लिए जरूरी है.

  • दिन में बहुत देर तक न सोएं. लंबे समय तक दिन में सोने से रात की नींद प्रभावित हो सकती है.

  • खाने पर ध्यान दें. डाइट में प्रोटीन, फल, सब्जियां और साबुत अनाज शामिल करें.

  • तला-भुना और प्रोसेस्ड फूड कम करें.

ज्यादा नींद को नजरअंदाज भी न करें
बारिश के दिनों में कभी-कभार सुस्ती महसूस होना सामान्य हो सकता है. लेकिन अगर कई दिनों या हफ्तों तक लगातार थकान बनी हुई है, बहुत ज्यादा नींद आती है, सांस फूलती है, ध्यान लगाने में परेशानी होती है या पर्याप्त नींद के बाद भी शरीर तरोताजा महसूस नहीं करता, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. डॉक्टरों के मुताबिक, लगातार थकान के पीछे एनीमिया, थायरॉयड, विटामिन बी12 या विटामिन डी की कमी, नींद से जुड़ी समस्या या दूसरी स्वास्थ्य स्थितियां भी हो सकती हैं. इसलिए लंबे समय तक बने रहने वाले लक्षणों को सिर्फ मौसम का असर मानकर खुद से नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है.

 

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