Dengue
Dengue
बारिश के बाद निकलती तेज धूप, बढ़ती उमस और अचानक बदलता मौसम इस समय वायरल फीवर के साथ-साथ मच्छरों से होने वाली बीमारियों का खतरा भी बढ़ा रहा है. ऐसे में अचानक तेज बुखार आते ही सबसे बड़ा सवाल यही होता है यह सामान्य वायरल है या डेंगू? कई लोग 102-103°F बुखार देखते ही घबरा जाते हैं और तुरंत दवा लेना शुरू कर देते हैं, जबकि कुछ लोग बुखार उतरते ही मान लेते हैं कि बीमारी ठीक हो गई. लेकिन डेंगू में सिर्फ थर्मामीटर बीमारी की गंभीरता नहीं बताता. कई बार बुखार कम होने के बाद ही मरीज की स्थिति बिगड़ सकती है.
डेंगू और सामान्य वायरल फीवर के शुरुआती लक्षण भी काफी हद तक एक जैसे हो सकते हैं, इसलिए केवल लक्षण देखकर बीमारी की पुष्टि करना मुश्किल है. इन तमाम सवालों को समझने के लिए हमने Yatharth Super Speciality Hospital के Senior Director - Internal Medicine डॉ. जयन्त ठाकुरिया से बातचीत की. उन्होंने बताया कि डेंगू में कब जांच करानी चाहिए, किस स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और प्लेटलेट्स गिरने पर खान-पान को लेकर किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.
1. अचानक तेज बुखार आए तो डेंगू की जांच कब करानी चाहिए?
अगर अचानक तेज बुखार के साथ तेज सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों या जोड़ों में दर्द, जी मिचलाना, उल्टी, शरीर पर दाने या असामान्य कमजोरी जैसे लक्षण हैं, तो डेंगू की जांच पर विचार करना चाहिए. खासकर तब, जब आसपास डेंगू के मामले सामने आ रहे हों या मच्छरों के संपर्क की संभावना रही हो.
बीमारी के शुरुआती दिनों में जांच ज्यादा उपयोगी होती है. आमतौर पर बुखार के पहले 3-5 दिनों में NS1 टेस्ट डॉक्टर की सलाह पर कराया जा सकता है. इसके बाद एंटीबॉडी आधारित टेस्ट ज्यादा उपयोगी हो सकते हैं. हालांकि किस मरीज में कौन-सा टेस्ट और कब कराना है, यह बीमारी के दिन और मरीज की स्थिति के आधार पर डॉक्टर तय करते हैं.
2. डेंगू और सामान्य वायरल फीवर में शुरुआती अंतर कैसे पहचानें?
शुरुआती दौर में डेंगू और सामान्य वायरल फीवर के लक्षण काफी मिलते-जुलते हो सकते हैं. इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर डेंगू की पुष्टि नहीं की जा सकती.
डेंगू में तेज बुखार के साथ बहुत ज्यादा सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में तेज दर्द, जी मिचलाना, उल्टी और शरीर पर दाने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं. वहीं सामान्य वायरल फीवर में खांसी, जुकाम या गले में खराश जैसे श्वसन संबंधी लक्षण अधिक देखने को मिल सकते हैं.
हालांकि यह अंतर पक्का नहीं है. डेंगू की पुष्टि के लिए जरूरत पड़ने पर ब्लड टेस्ट कराना जरूरी हो सकता है. WHO के अनुसार भी शुरुआती febrile phase में केवल लक्षणों के आधार पर डेंगू को दूसरी वायरल बीमारियों से अलग करना मुश्किल हो सकता है.
3. कितना बुखार होने पर डॉक्टर को दिखाना चाहिए?
डॉ. जयन्त ठाकुरिया के मुताबिक केवल तापमान देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि मरीज की स्थिति कितनी गंभीर है या उसे अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत है. अगर किसी वयस्क को तेज बुखार बना हुआ है और यह 2-3 दिन से ज्यादा समय तक रहता है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है.
डेंगू के लक्षण
लगातार उल्टी
तेज पेट दर्द
किसी भी तरह की असामान्य ब्लीडिंग
सांस लेने में परेशानी या तेज सांस
बहुत ज्यादा कमजोरी, सुस्ती या उनींदापन
पेशाब कम होना
शरीर में पानी की कमी
बेचैनी
4. क्या 102-103°F से ज्यादा बुखार का मतलब गंभीर डेंगू है?
नहीं. 102-103°F या इससे ज्यादा बुखार होने का मतलब यह नहीं है कि डेंगू गंभीर हो गया है. डेंगू के शुरुआती चरण में तेज बुखार आम है और कई दूसरी इंफेक्शन में भी इतना बुखार हो सकता है. बीमारी की गंभीरता मरीज की पूरी स्थिति, लक्षण, शरीर में पानी की स्थिति, ब्लड काउंट और शरीर के अंगों के काम करने की स्थिति को देखकर तय की जाती है. खास बात यह है कि बुखार कम होना हमेशा ठीक होने का संकेत नहीं होता. कई बार डेंगू में बुखार उतरने के आसपास गंभीर परेशानी शुरू हो सकती है. इस दौरान शरीर में ज्यादा ब्लीडिंग, ब्लड प्रेशर गिरने यानी शॉक या किसी अंग पर असर जैसी स्थिति हो सकती है.
5. प्लेटलेट्स तेजी से गिर रहे हों तो क्या खाएं?
अगर डेंगू में प्लेटलेट्स तेजी से गिर रहे हैं तो किसी एक खास चीज पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर की निगरानी सबसे जरूरी है. इस दौरान मरीज को थोड़ा-थोड़ा और आसानी से पचने वाला खाना देना चाहिए. खाने में खिचड़ी, चावल, दाल, सूप, हरी सब्जियां, फल और दही लिया जा सकता है, अगर मरीज को ये चीजें आसानी से पच रही हों. शरीर में पानी की कमी न हो, इसके लिए पानी और ORS जैसे तरल पदार्थ लेते रहना भी जरूरी है.
भारत में हर साल कितने डेंगू केस आते हैं?
भारत में डेंगू एक बड़ी मौसमी बीमारी है और मानसून व पोस्ट-मानसून के दौरान इसका खतरा बढ़ जाता है. स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार 2024 में देश में 2,33,519 डेंगू केस और 297 मौतें दर्ज की गई थीं. वहीं 2025 में 31 अगस्त तक 49,573 केस और 42 मौतें रिपोर्ट हुई थीं.
दुनिया में हर साल 100-400 मिलियन डेंगू संक्रमण
डेंगू सिर्फ भारत तक सीमित बीमारी नहीं है. WHO के मुताबिक दुनियाभर में हर साल करीब 100-400 मिलियन डेंगू संक्रमण होते हैं और दुनिया की लगभग आधी आबादी इस बीमारी के खतरे में रहती है. 2024 में WHO को 112 देशों से 1.43 करोड़ से ज्यादा डेंगू केस रिपोर्ट हुए थे, जो अब तक के सबसे ऊंचे रिपोर्टेड स्तरों में शामिल हैं.
कैसे फैलता है डेंगू और इसका इलाज क्या है?
डेंगू वायरस संक्रमित Aedes मच्छर, खासकर Aedes aegypti के काटने से फैलता है. संक्रमित व्यक्ति का खून चूसने के बाद मच्छर वायरस को दूसरे व्यक्ति तक पहुंचा सकता है. यह मच्छर दिन के समय भी सक्रिय रहता है और घरों के आसपास जमा साफ पानी में पनप सकता है. इसलिए कूलर, गमले, बाल्टी, टंकी या किसी भी बर्तन में पानी जमा न होने देना डेंगू से बचाव का अहम तरीका है. मच्छरों से बचने के लिए पूरी आस्तीन के कपड़े पहनना और मच्छर भगाने वाले उपायों का इस्तेमाल भी मददगार हो सकता है.